'प्रियांक खरगे ने RSS को बिना किसी आधार के किया बदनाम', कर्नाटक सरकार में मंत्री को नोटिस पर बोली बीजेपी
प्रियांक खरगे ने हाल ही में आरएसएस को चिट्ठी लिखी थी, जिसमें उन्होंने आरएसएस से कानूनी स्थिति स्पष्ट करने, संगठन का पंजीकरण कराने और वित्तीय पारदर्शिता से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की थी.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को लेकर विवादित बयान देने के मामले में कर्नाटक के गृहमंत्री और कांग्रेस नेता प्रियांक खरगे की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं. तेलंगाना भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष एन. रामचंद्र राव ने भी प्रियांक खरगे पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने आरएसएस के खिलाफ बेहद मानहानिकारक बयान दिए हैं और अब उन्हें कानून का सामना करना होगा.
एन. रामचंद्र राव ने आईएएनएस से कहा, 'प्रियांक खरगे ने आरएसएस के खिलाफ ऐसे बयान दिए हैं जो पूरी तरह मानहानिकारक हैं. इस मामले में अदालत ने उन्हें समन जारी किया है. उन्होंने बिना किसी आधार के संगठन को बदनाम किया है, इसलिए उन्हें कानून का सामना करना पड़ेगा. उनके खिलाफ जो मामला दर्ज हुआ है, वह सही है और मेरा मानना है कि उन्हें सजा मिलनी चाहिए.'
प्रियांक खरगे के खिलाफ नोटिस जारी
दरअसल, बेंगलुरु की एक अदालत ने आरएसएस के खिलाफ कथित टिप्पणियों को लेकर प्रियांक खरगे और यूथ कांग्रेस नेता मोहम्मद हारिस नलपाड को समन जारी किया है.
शिकायत के अनुसार, 4 अक्टूबर 2025 को प्रियांक खरगे ने कर्नाटक सरकार को एक पत्र लिखकर सरकारी स्कूलों, कॉलेजों और खेल मैदानों में आरएसएस की गतिविधियों पर रोक लगाने की मांग की थी. आरोप है कि इस पत्र को जानबूझकर मीडिया में प्रसारित किया गया और प्रियांक खरगे ने इसे अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी साझा किया, जिससे संगठन की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई.
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प्रियांक खरगे ने आरएसएस को लिखी थी चिट्ठी
कर्नाटक सरकार में मंत्री प्रियांक खरगे ने हाल ही में आरएसएस को चिट्ठी लिखी थी, जिसमें उन्होंने आरएसएस से कानूनी स्थिति स्पष्ट करने, संगठन का पंजीकरण कराने और वित्तीय पारदर्शिता से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की थी. उन्होंने संगठन की कानूनी स्थिति, फंडिंग सोर्स, आय, खर्च और संपत्तियों की जानकारी सार्वजनिक करने की बात कही थी. उनका तर्क था कि आरएसएस को भी पारदर्शिता और संवैधानिक जवाबदेही के मानकों का पालन करना चाहिए. उनकी इस चिट्ठी पर बवाल मच गया, जिसका जवाब संघ प्रमुख मोहन भागवत ने भी दिया था.
(न्यूज एजेंसी के इनपुट के साथ)
























