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Presidential Election 2022: भारत के राष्ट्रपति चुनाव से जुड़े पांच रोचक तथ्य जानें यहां

Presidential Election 2022:देश में 15 वें राष्ट्रपति के लिए चुनाव हो रहा है. इससे पहले भी देश में इस पद के लिए चुनाव हुए है. इन्हीं चुनावों में से कुछ रोचक बातें यहां जानें.

India's Presidential Election 2022: देश में 15वें राष्ट्रपति चुनाव (Presidential Election) के लिए मतदान हो रहा है. बीजेपी (BJP) अगुवाई वाली एनडीए (NDA) उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू (Droupadi Murmu) का विपक्षी उम्मीदवार यशवंत सिन्हा (Yashwant Sinha) से मुकाबला है. हालांकि एनडीए की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू की जीत की संभावनाएं प्रबल हैं. उन्हें 61 फीसदी से अधिक वोट मिलने की उम्मीद जताई जा रही है, जबकि विपक्षी उम्मीदवार यशवंत सिन्हा का पलड़ा वोटों के मामले में इतना भारी नहीं है. उन्हें 39 फीसदी वोट मिलने की संभावना है. देश के महामहिम के चुनाव के बारे में हम यहां कुछ रोचक तथ्य आपसे साझा कर रहे हैं.

राष्ट्रपति चुनावों में सबसे बड़ी जीत का रिकॉर्ड

साल 1950

गौरतलब है कि भारत साल 1950 में एक गणतांत्रिक देश बना. संविधान सभा ने 26 जनवरी 1950 को डॉ. राजेंद्र प्रसाद को देश के पहले राष्ट्रपति के तौर पर चुना. भारत में पहली बार 2 मई 1952 को पहली बार राष्ट्रपति के चुनाव के लिए वोट डाले गए थे. इस चुनाव में कुल 6,05,386 वोट पड़े थे. इसमें डॉ प्रसाद को 5,07,400 वोट मिले थे. उनके प्रतिद्वंदी के.टी शाह को 92,827 वोट मिले थे. दोनों को मिले वोटों में 4,14,573 का बड़ा अंतर था.

साल 1957

इसके बाद साल 1957 में इस पद के लिए चुनाव हुआ. इस साल उनके विपक्षी के तौर पर चौधरी हरिराम और नागेंद्र नारायण दास खड़े थे. इस चुनाव में देश के पहले राष्ट्रपति डॉ प्रसाद को 4,59,698 वोट मिले. डॉ प्रसाद के पास उस वक्त 99 फीसदी वोट का शानदार आंकड़ा था. उनके विपक्षी उम्मीदवार चौधरी हरिराम 2672 तो नागेंद्र दास को 2000 वोट पर ही सिमट गए थे. 

साल 1962

बड़ी जीत में दूसरा नाम सर्वपल्ली राधाकृष्णन का आता है. साल 1962 के तीसरे राष्ट्रपति चुनाव में कांग्रेस ने उपराष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्णन को अपना उम्मीदवार बनाया था. उन्हें 5,53,067 वोट मिले थे, जबकि उनके खिलाफ खड़े चौधरी हरिराम को छह हजार से थोड़े अधिक वोट ही मिल पाए थे. तीसरे उम्मीदवार यमुना प्रसाद त्रिसुलिया को 3,537 वोट पड़े थे. 

साल 1997

राष्ट्रपति चुनाव के इतिहास में 1997 का चुनाव यादगार रहा. तब यूनाइटेड फ्रंट सरकार और कांग्रेस ने केआर नारायणन को अपना उम्मीदवार बनाया था. उनके खिलफ चुनाव आयोग में सुधारों के लिए मशहूर टीएन शेषन खड़े थे. इसमें केआर नारायणन 9,56,290 वोट हासिल किए, जबकि विपक्षी टीएन शेषन को केवल 50,361 वोट ही मिल पाए और उनकी जमानत तक जब्त हो गई. उस वक्त शेषन को केवल शिवसेना और कुछ निर्दलीयों का ही समर्थन मिल पाया था.

साल 2002

देश में मशहूर वैज्ञानिक राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के नाम भी राष्ट्रपति चुनावों में सबसे बड़ी जीत हासिल करने का रिकॉर्ड है. उन्होंने साल 2002 के चुनावों में कैप्टन लक्ष्मी सहगल उनके खिलाफ उतरी थीं. राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने 10,30,250 वोटों में 9,22,884 वोट पड़े थे, जबकि उनकी विपक्षी कैप्टन सहगल 1,07,366 वोट ही हासिल कर पाई.

जब बहुत कम वोटों से जीतकर बने राष्ट्रपति

इस साल राष्ट्रपति चुनावों में 17 उम्मीदवार मैदान में उतरे थे. इन सब को पीछे छोड़ते हुए डॉक्टर जाकिर हुसैन ने बाजी मारी थी. उन्हें 4,71,244 वोट मिले थे. उनके जीत का ये अंतर विपक्षी उम्मीदवार कोटा सुब्बाराव को पड़े वोट से बेहद कम रहा. कोटा सुब्बाराव को 3,63,971 वोट मिले थे. वोट का ये अंतर मात्र 107,273 का रहा. हालांकि 3 मई 1969 को डॉक्टर हुसैन की मौत के बाद चीफ जस्टिस मोहम्मद हिदयातुल्ला को 35 दिन के लिए कार्यवाहक राष्ट्रपति बनाए गए थे.

जब निर्विरोध चुने गए राष्ट्रपति

देश के राष्ट्रपति चुनावों में साल 1977 ऐसे चुनाव के तौर पर याद किया जाता है. जब नीलम संजीव रेड्डी इस सबसे बड़ें संवैधानिक पद के लिए निर्विरोध चुन लिए गए थे. तब राष्ट्रपति का पद फरवरी 1977 में तत्कालीन राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद की मौत होने से खाली हो गया था. इस चुनाव में 37 उम्मीदवारों ने अपनी दावेदारी पेश की थी. इस चुनाव में रिटर्निंग ऑफिसर ने 36 नामांकन को स्वीकार नहीं किया. इसका परिणाम ये हुआ कि नीलम संजीव रेड्डी निर्विरोध चुन लिए गए. 

अधूरे कार्यकाल में ही हो गई मौत

भारत के राष्ट्रपति चुनावों के इतिहास में दो राष्ट्रपति ऐसे रहे जिनका निधन उनके कार्यकाल खत्म होने से पहले ही हो गया. इनमें राष्ट्रपति जाकिर हुसैन और फखरुद्दीन अली अहमद शामिल हैं. ये दोनों ही तीन साल से कम वक्त तक ही इस पद पर रह पाए. जाकिर हुसैन का निधन 3 मई 1969 को हुआ जबकि फखरुद्दीन अली अहमद की 11 फरवरी 1977 को मौत हुई.

अब तक चुने गए 14 राष्ट्रपति

आजादी के बाद साल 1950 से लेकर साल 2017 तक अब तक देश को 14 महामहिम मिले हैं. इनमें से 12 राष्ट्रपतियों ने अपना कार्यकाल पूरा किया. देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद (Dr. Rajendra Prasad) के नाम दो बार देश के राष्ट्रपति रहने का रिकॉर्ड हैं.

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