सोना न खरीदने की PM मोदी की अपील से ज्वैलरी बाजार में हलचल, लाखों की आजीविका पर संकट, क्या बोले एक्सपर्ट
PM Modi: विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि भारत में शादी, त्योहार और जन्म-संस्कार जैसे अवसरों पर सोना केवल विलासिता नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अगले एक साल तक गैर-जरूरी सोने की खरीदारी टालने की अपील के बाद देश के सर्राफा और ज्वैलरी कारोबार में चिंता का माहौल है. प्रधानमंत्री ने विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम करने और आयात पर निर्भरता घटाने के लिए लोगों से संयम बरतने की अपील की है. उन्होंने खासतौर पर शादियों और अन्य आयोजनों में अनावश्यक सोना खरीदने से बचने की सलाह दी.
सप्ताह के पहले दिन सोमवार की बात करें, तो मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX से लेकर घरेलू मार्केट तक में इसके भाव में उलटफेर आया है. जहां एक ओर वायदा कारोबार में सोना सस्ता और चांदी महंगी हुई है, तो वहीं IBJA के मुताबिक, घरेलू बाजारों में दोनों ही कीमती धातुओं का दाम टूटा है.
लाखों लोगों की आजीविका प्रभावित होने का खतरा
हालांकि ज्वैलरी उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि इस अपील का असर केवल बाजार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे लाखों लोगों की आजीविका प्रभावित हो सकती है. बुलियन और टैक्स विशेषज्ञ सीए (एडवोकेट) शशांक गुपता ने कहा, “प्रधानमंत्री की अपील राष्ट्रहित और विदेशी मुद्रा भंडार की सुरक्षा के उद्देश्य से प्रेरित है, लेकिन यह भी समझना जरूरी है कि स्वर्ण और आभूषण उद्योग सिर्फ व्यापार नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक परंपरा और करोड़ों परिवारों की आर्थिक रीढ़ है. ”
उन्होंने कहा कि यह उद्योग मुख्य रूप से छोटे और मध्यम उद्यमों (MSME) पर आधारित है. गांव-कस्बों के सुनार, कारीगर, पॉलिशर, हॉलमार्किंग कर्मचारी, शोरूम स्टाफ और पैकेजिंग-लॉजिस्टिक्स जैसे सहायक क्षेत्रों में काम करने वाले लाखों लोग इससे जुड़े हैं. “अगर एक साल तक मांग में भारी गिरावट आती है, तो सबसे बड़ा असर असंगठित और कमजोर वर्ग पर पड़ेगा, जहां पहले से ही मार्जिन सीमित हैं और रोजगार अस्थायी है,” उन्होंने कहा.
सोना सिर्फ विलासिता नहीं, बल्कि सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा
विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि भारत में शादी, त्योहार और जन्म-संस्कार जैसे अवसरों पर सोना केवल विलासिता नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा है. साथ ही महिलाओं के लिए यह सुरक्षित बचत का माध्यम भी माना जाता है.
शशांक गुप्ता ने सुझाव दिया कि सरकार को पूरी तरह खरीद रोकने के बजाय संतुलित नीति अपनानी चाहिए. उन्होंने गोल्ड Monetisation Scheme को प्रभावी बनाने, recycled gold को बढ़ावा देने, हॉलमार्किंग व्यवस्था मजबूत करने और कारीगरों के लिए सामाजिक सुरक्षा योजनाएं बढ़ाने की बात कही. उनके अनुसार भारतीय परिवारों के पास पहले से मौजूद सोने को अर्थव्यवस्था में उत्पादक तरीके से लाने पर आयात निर्भरता भी घटेगी और रोजगार भी सुरक्षित रहेगा.
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