राजस्थान हाई कोर्ट के जज महेश चंद्र शर्मा ने कहा मोर सेक्स नहीं करता, सोशल मीडिया पर किरकिरी

नई दिल्लीः गाय और मोर को लेकर राजस्थान हाई कोर्ट के जस्टिस महेश चंद्र शर्मा की टिप्पणी पर विवाद हो रहा है. जज ने मोर को ब्रह्मचारी पक्षी बताया. इसे लेकर सोशल मीडिया पर लोग जज साहब की तीखी आलोचना कर रहे हैं. राजस्थान हाईकोर्ट में राजस्थान की हिंगोनिया गोशाला से जुड़े मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस महेश चंद्र शर्मा ने सरकार को सुझाव दे दिया कि गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित कर देना चाहिए. गोवध करने वाले की सजा उम्रकैद होनी चाहिए.
जस्टिस महेश चंद्र शर्मा ने कहा कि ' मोर को राष्ट्रीय पक्षी इसलिए घोषित किया क्योंकि मोर आजीवन ब्रह्मचारी रहता है. मोर के आंसू को चुग कर मोरनी गर्भवती होती है. मोर कभी भी मोरनी के साथ सेक्स नहीं करता. मोर के पंख को भगवान कृष्ण ने इसलिए लगाया क्योंकि वह ब्रह्मचारी है. मंदिरों में भी इसलिए मोर पंख लगाया जाता है. ठीक इसी तरह गाय के अंदर भी इतने गुण हैं कि उसे राष्ट्रीय पशु घोषित किया जाना चाहिए.'
जस्टिस महेश चंद्र शर्मा ने सरकार को ये सुझाव अपने रिटायरमेंट के दिन दिए. इसके साथ ही उन्होंने राजस्थान के मुख्य सचिव और महाधिवक्ता को गाय का लीगल कस्टोडियन बना दिया.
जिस संविधान की धारा का जिक्र हाईकोर्ट जज ने 145 पेज के आदेश में दिया है उसमें लिखा है कि नस्लों को उन्नत बनाने के लिए गाय, बछड़ों को नहीं मारना चाहिए. धारा 48 संविधान के नीति निर्देशक हैं जिससे मानना सरकार के लिए जरूरी नहीं होता है.
सोशल मीडिया पर जज साहब के इस बयान पर लोग कड़ी आलोचना कर रहे हैं. कांग्रेस नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा- गाय ऑक्सीजन लेती, छोड़ती है. मोर ब्रह्मचारी है . क्या शब्द कहे हैं जज साहब ने. अब हमें अपनी किताबें ठीक से पढ़नी चाहिए.

When I was a kid I thought women get pregnant by d grace f god , here is one retired HC judge who never grew up. #peacock #Mylord grow up !
— PoliticallyIncorrect (@jyotitiwari05) June 1, 2017
After understanding the #peacock celibacy concept, can someone connect tiger being our national animal to sheron waali mata please? #wtf — whoami (@swapssays) June 1, 2017
पशु क्रूरता निरोधक अधिनियम गाय को लेकर हाईकोर्ट के इस सुझाव से ठीक पहले 26 मई को मोदी सरकार ने वध के लिए मवेशियों की खरीद-फरोख्त को रोक लगा दी. सरकार के इस आदेश पर अदालत ने चार हफ्ते की रोक लगा दी है.
पर्यावरण मंत्रालय ने पशु क्रूरता निरोधक अधिनियम में सख्त पशु क्रूरता निरोधक नियम जोड़ दिया है. इसका मतलब ये है कि मवेशी को बाजार में खरीदने या बेचने लाने वाले को ये सुनिश्चित करना होगा कि मवेशी को बाजार में कत्ल के मकसद से खरीदने या बेचने के लिए नहीं लाया गया है. नए नियम के दायरे में गाय, बैल, सांड, बधिया बैल, बछड़े, बछिया, भैंस और ऊंट जैसे मवेशी आएंगे.
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