महाराष्ट्र के सियासी घमासान से चढ़ा संसद का पारा, अभी जारी रह सकता है उबाल
महाराष्ट्र के मुद्दे पर कांग्रेस लोकसभा और राज्यसभा में आक्रमक है. इसका असर कल केंद्रीय कक्ष में होने वाले संविधान दिवस कार्यक्रम पर पड़ सकता है.

नई दिल्ली: महाराष्ट्र की सियासी उठापटक को लेकर बीजेपी और विपक्ष के बीच चल रहे घमासान की तनाव भरी तस्वीर संसद में भी नज़र आई. यहां तक कि हंगामे और विरोध के चलते दो कांग्रेस सांसदों को एक दिन के लिए लोकसभा की कार्रवाई से निलंबित भी किया गया. साफ है कि महाराष्ट्र में जारी राजनीतिक महाभारत के बीच संसद में उठा उबाल अभी जारी रह सकता है.
सरकार और विपक्ष के बीच खींची टकराव की तलवारें अभी म्यान में नहीं गई हैं. ऐसे में संसद के केंद्रीय कक्ष में मंगलवार को होने वाले संविधान दिवस कार्यक्रम पर भी इसकी छाया पड़ सकती है. कांग्रेस ने संकेत दिए हैं कि अपने सांसदों के साथ हुए बर्ताव के खिलाफ वो कार्यक्रम से अनुपस्थित भी रह सकती है. कांग्रेस नेता के सुरेश के मुताबिक, इस बारे में गंभीरता से विचार हो रहा है और हम अन्य विपक्षी दलों से भी बात कर रहे हैं. ऐसे में जबकि लोकतांत्र की हत्या हो रही हो, संविधान पर राष्ट्रपति के भाषण का क्या महत्व बच जाता है? हालांकि फिलहाल पार्टी ने कार्यक्रम के बहिष्कार को लेकर कोई आधिकारिक एलान नहीं किया गया है.
महाराष्ट्र में नाटकीय तरीके से शनिवार सुबह हुए सरकार गठन के बाद सोमवार को लोकसभा की बैठक विपक्षी सांसदों के हंगामे के साथ ही शुरू हुई. कुछ ही देर में नौबत यहां तक आ गई कि लोकसभा अध्यक्ष ने सदन में पोस्टर-बैनर लहरा रहे दो सदस्यों का नाम लेते हुए उन्हें बाहर करने का आदेश दिया. इतना ही नहीं सदन में सांसदों और मार्शल के बीच धक्का-मुक्की का नज़ारा तक सामने आया.
सदन की बैठक सुबह 11 बजे शुरू हुई तो कुछ ही देर में विपक्षी सांसद महाराष्ट्र के राजनीतिक घटनाक्रम पर पोस्टर और बैनर लेकर हंगामा करते हुए आसन के पास आ गए. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन की कार्य व्यवस्था बनाए रखने के लिए कई बार अपील भी की. हालांकि हंगामा बदस्तूर जारी रहा कांग्रेसी सांसद सदन में पोस्टर लहराते हुए नारे लगाए जाते रहे हैं.
लोकसभा में धक्का-मुक्की से स्पीकर दुखी, चेताते हुए कहा- नहीं सुधार हुआ तो होगा 5 साल के लिए निलंबन
हंगामा कर रहे सांसदों पर लोकसभा अध्यक्ष आसन से दी जा रही चेतावनियां भी जब बेअसर गई तो ओम बिड़ला ने नियम 373 के तहत हब्बी एडन और टी एन प्रतापन को सदन से बाहर करने का आदेश दिया जो बैनर दिखा रहे थे.
इस आदेश के बाद सदन में आए मार्शल ने दोनों सांसदो को बाहर निकलने का अनुरोध किया तो सदन में हंगामा और बढ़ गया. लोकसभा अध्यक्ष की तरफ से सख्ती से मिले आदेश के अनुपालन करते हुए मर्शल जब सांसदों को बाहर ले जाने का प्रयास किया तो स्थिति धक्का-मुक्की तक पहुंच गई. विपक्षी सांसद इस बात का विरोध करते हुए मार्शल पर अपना गुस्सा उतार रहे थे.
इस बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने महाराष्ट्र के राजनीतिक घटनाक्रम का हवाला देते हुए प्रश्नकाल के दौरान सवाल पूछने से ही इनकार किया. बाद में केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने आरोप लगाया कि सदन में हुए हंगामे का नेतृत्व राहुल गांधी ही कर रहे थे.
वहीं, केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि संसद बहस और चर्चा की जगह है. कांग्रेस ने आज संसदीय अनुशासन, शालीनता की सभी हदें पार कर दी. स्पीकर के बार बार मना करनेऔर इसके बाद मार्शल के साथ जोर जबरदस्ती करना अनुशासनहीनता की पराकाष्ठा है. सांसदों के ऐसे व्यवहार की भर्त्सना करते है.
कांग्रेस ने आरोप लगाए कि विपक्ष के विरोध की आवाज़ बन्द करने के लिए इस तरह मार्शल बुलाए गए. इस दौरान वरिष्ठ कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी और पार्टी की महिला सांसदों के साथ भी बदसलूकी की गई.
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