DMK और NCP (SP) के विरोध के बीच FCRA बिल पर बढ़ा सस्पेंस, BAC बैठक पर नजरें
मॉनसून सत्र के आखिरी हफ्ते में लोकसभा के एजेंडे में FCRA संशोधन बिल को शामिल नहीं किया गया है. परिसीमन मामले और महिला आरक्षण कानून को लेकर सरकार कुछ विपक्षी दलों को साधना चाहती है.

संसद में मॉनसून सत्र के आखिरी हफ्ते में लोकसभा के एजेंडे में FCRA संशोधन बिल को शामिल नहीं किया गया है. माना जा रहा है कि सरकार इस विवादित बिल पर थोड़ी नरमी बरत सकती है ताकि DMK और NCP(SP) जैसी पार्टियों को खुश किया जा सके. ये पार्टियां बिल के प्रावधानों का विरोध कर रही हैं, लेकिन बीजेपी गठबंधन इन्हें परिसीमन की प्रक्रिया में संभावित समर्थक के तौर पर देख रहा है.
सूत्रों के मुताबिक, सोमवार को लोकसभा की बिजनेस एडवाइजरी कमिटी की बैठक में तस्वीर साफ हो जाएगी. इस बैठक में आगे के एजेंडे पर फैसला लिया जाना है. अगर संसद के मॉनसून सत्र के बचे हुए 4 दिनों में बिल को पास कराने के लिए पेश करना है, तो उस पर चर्चा का समय तय करना होगा. सोमवार के एजेंडे में 4 बिल पेश करने की बात है, लेकिन फ़ॉरेन कॉन्ट्रिब्यूशन (रेगुलेशन) अमेंडमेंट बिल का कहीं जिक्र नहीं है.
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, ये बिल 25 मार्च को लोकसभा में पेश किया गया था, लेकिन विपक्षी पार्टियों और अल्पसंख्यक समूहों, खासकर ईसाई संगठनों के कड़े विरोध के कारण इस पर अभी तक चर्चा नहीं हो पाई है. ईसाई समूहों को विदेशों से बड़ी मात्रा में फंड मिलता है. उन्होंने प्रस्तावित संशोधनों की आलोचना करते हुए कहा है कि इससे उनके चैरिटी के कामों पर खतरा मंडरा रहा है और अगर उनका FCRA लाइसेंस रद्द कर दिया जाता है या रिन्यू नहीं किया जाता है, तो सरकार उनकी संपत्ति जब्त कर सकती है.
स्टालिन ने फंसाया पेच
DMK सुप्रीमो एमके स्टालिन ने अलग-अलग चर्चों के प्रतिनिधियों के उस ग्रुप का समर्थन किया है, जिसने गृह मंत्री अमित शाह से मिलकर मांग की थी कि या तो बिल वापस लिया जाए या फिर जांच के लिए इसे संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजा जाए. ऐसे में सरकार परिसीमन मामले को लेकर और 2029 से महिला आरक्षण कानून लागू करने से पहले DMK को साधकर अपने साथ लाना चाहती है. कई सांसदों का कहना है कि सरकार FCRA बिल लाकर इस क्षेत्रीय पार्टी को मुश्किल में नहीं डालना चाहेगी.
सुप्रिया सुले भी विरोध में
इसके अलावा NCP (SP) की सुप्रिया सुले ने भी FCRA बिल का विरोध किया है. सरकार इस पार्टी को भी संशोधन बिल के संभावित समर्थक के तौर पर देख रही है. विपक्ष के विरोध के कारण संसद में जारी गतिरोध ने अनिश्चितता बढ़ा दी है, क्योंकि सरकार पूरी तरह से बहस चाहती है ताकि गृह मंत्रालय बिल से जुड़ी आलोचनाओं का जवाब दे सके.
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