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J&K: राज्यपाल की सफाई- भेदभाव करता तो BJP की सरकार बनती, उमर बोले- फैक्स मशीन ने लोकतंत्र का गला घोंटा

2019 लोकसभा चुनाव से पहले विपक्ष ने एक बार फिर एकता दिखाई है. इस बार जम्मू कश्मीर में दो धुर विरोधी राजनीतिक विचारधारा वाली पार्टियां एकजुट हुई हैं. जम्मू कश्मीर में पीडीपी और नेशनल कॉन्फ्रेंस एक दूसरे के खिलाफ रहती हैं लेकिन बीजेपी के खिलाफ उन्होंने हाथ मिला लिया.

नई दिल्ली: जम्मू कश्मीर में विधानसभा भंग होने के बाज राजनीतिक उठा पटक बेहद तेज हो गई है. कल नेशनल कॉन्फ्रेंस, कांग्रेस औऱ पीडीपी ने राज्यपाल के सामने सरकार बनाने का दावा पेश किया. इसके बाद 41 मिनट बाद राज्यपाल ने विधानसभा भंग करने का आदेश जारी कर दिया. नेशनल कॉन्फ्रेंस ने इस फैसले को अलोकतांत्रिक बताया तो वहीं गवर्नर सत्यपाल मलिक अपने फैसले को सही ठहहरा रहे हैं. इस बीच नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता और जम्मू कश्मीर के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला ने कहा है गंभीर आरोप लगाते हुए तंज किया कि फैक्स मशीन ने लोकतंत्र का गला घोंटा है.

उमर अब्दुल्ला ने कहा, ''सत्ता पाना हमारी मंजिल नहीं है, फारुख अब्दुल्ला से बातचीत के शुरुआत में ही मुख्यमंत्री बनाने के लिए पूछा गया तो उन्होंने मना कर दिया. जब मुझसे पूछा गया तो मैंने भी नकार दिया, मैंने कहा कि जिस कुर्सी को मैंने लोगों के हुकुम से छोड़ा उस पर लोगों की इजाजत से ही बैठूंगा. नए सिरे से जब इलेक्शन होंगे, लोगों की इजाजत होगी तभी हम सचिवालय में बैठेंगे. हमने कहा कि हम एक नई सराकर को बाहर से समर्थन दे सकते हैं.''

उमर अब्दुल्ला ने कहा, ''पीडीपी को खबर मिली की सरकार बनाने के लिए एक नई साजिश रची जा रही है. पीडीपी ने हमसे कहा कि हम चिट्ठी भेज रहे हैं, आप अपना समर्थन पत्र हमें दे दीजिए. इस मैंने कहा कि मैं अभी तो नहीं दे सकता हूं मुझे अपने कोर ग्रुप से बात करनी होगी. हम कल तक ये सभी औरचारिकताएं पूरी करने के बाद ही हम अपना समर्थन पत्र दे सकते हैं. लेकिन क्योंकि बातचीत हो गई थी नेशनल कॉन्फ्रेंस, कांग्रेस और पीडीपी के बीच बात हो गई थी इसलिए पीडीपी की अध्यक्ष की ओर से राजभवन को एक चिट्ठी भेजी गई थी.''

उमर अब्दुल्ला ने कहा, ''यह शायद पहली बार हुआ होगा कि फैक्स मशीन ने लोकतंत्र का गला घोंटा है. यह अजीब सी फैक्स मशीन है, यह ऐसी फैक्स मशीन है जो इशारे पर सही हो जाती है और इशारे पर खराब हो जाती है. ये कैसी फैक्स मशीन है कि राज्यपाल को सरकार बनाने का दावा नहीं पहुंचता लेकिन विधानसभा भंग करने का आदेश चला जाता है. यह फैक्स मशीन शायद वनवे (एक तरफा) है, ये सिर्फ आउटगोइंग फैक्स मशीन है.''

अब्दुल्ला ने कहा, ''गवर्नर साहेब ने अपने कारणों में कहा कि अलग अलग विचारधारा वाले दल साथ कैसे आ सकते हैं? आपने ये सवाल 2015 में बीजेपी और पीडीपी से क्यों नहीं पूछा गया. इन दोनों को उस वक्त उत्तरी ध्रुव और दक्षिणी ध्रुव कहा गया था. बीजेपी और पीडीपी की तुलना में हमारे मतभेद कम हैं. इसके बाद उन्होंने कहा है कि खरीद फरोख्त हो सकती थी?

हम तो तीन राजनीतिक दल साथ आए, हमारे फैसले के बाद एक और चिठ्ठी (सज्जाद लोन का बीजेपी के समर्थन वाला दाव) पहुंची, राज्यपाल ने साहब ने उस कहा है कि खरीद-फरोख्त हो रही है और पैसा इधर का उधर किया जा रहा है. इस चीज को इग्नोर नहीं किया जा सकता. गवर्नर साहेब के पास अगर इनके सबूत हैं तो ये लोगों के सामेन आना चाहिए. हमने ये आरोप नहीं लगाए खुद गवर्नर साहेब ने ये बात कही है.''

पीडीपी के साथ जाना नेशनल कॉन्फ्रेंस के लिए ज्यादा खतरनाक होता, हमें लोगों ने ऐसा करने से मना भी किया. लोगों ने कहा कि ऐसा करके पीडीपी को नई जिंदगी दे रहे हैं. लेकिन फिर भी हमने इस बारे में एक बार भी नहीं सोचा. हमने सिर्फ इस रियासत को उठाने का बीड़ा उठाया है, उस पर कायम हैं.

राम माधव के बयान पर जमकर हमला बीजेपी नेता राम माधव के बयान पर टिप्पणी करते हुए उमर अब्दुल्ला ने कहा, ''बड़ी बदकिस्मती की बात है कि आज बीजेपी के बड़े नेता ने संगठनों के खिलाफ बात कही है. मैं बीजेपी नेता राम माधव और उनके साथियों को चैलेंज करना चाहता हूं कि कल वो जो बात कह रहे हैं, उसके सबूत लेकर लोगों के सामने आएं. वो बताएं कि हम कहां पाकिस्तान के खिलाफ लड़ रहे हैं.

उमर अब्दुल्ला ने कहा, ''मैं राम माधव को बताना चाहता हूं कि आप मेरे लगभग उन 3000 साथियों का अपमान कर रहे हैं जिन्होंने पाकिस्तान के इशारों पर नाचना बंद कर दिया. पिछले तीस साल में जितने हमारे लोग मारे गए उतने आपके नहीं मारे गए. आप हमसे पूछते हैं कि इस मुल्क ने क्या किया? अगर हिम्मत है तो बीजेपी सबूतों सामने रखे.'

ये कारण बता कर राज्यपाल ने भंग कर दी विधानसभा राज्यपाल ने अपने आदेश में विधानसभा भंग करने के पीछे चार प्रमुख कारण बताए हैं. पहला कारण, विरोधी राजनीतिक विचारधारा वाले दलों के गठबंधन से स्थाई सरकार बनने के आसार कम हैं. दूसरा कारण, सरकार बनाने के लिए विधायकों की खरीद-फरोख्त की आशंका है.

तीसरा कारण, खंडित जनादेश से स्थाई सरकार बनाना संभव नहीं है, ऐसी पार्टियों का साथ आना जिम्मेदार सरकार बनाने की बजाए सत्ता हासिल करने का प्रयास है. चौथा कारण, जम्मू कश्मीर की नाजुक सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर सुरक्षा बलों के लिए स्थाई और सहयोगात्मक माहौल की जरूरत है.

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