पहलगाम हमले पर विवादित पोस्ट मामले में सिंगर नेहा सिंह राठौर को मिली गिरफ्तारी से अंतरिम राहत, SC ने दिया यह सख्त निर्देश
उत्तर प्रदेश सरकार ने दावा किया कि नेहा सिंह राठौर इंवेस्टिगेटिंग ऑफिसर (IO) के साथ पूछताछ में कॉरपरेट नहीं कर रही हैं. इस पर नेहा के वकील ने दलील दी कि वह 3 जनवरी को आईओ के सामने पेश हुई थीं.

लोक गायिका नेहा सिंह राठौर को सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम राहत मिल गई है. पहलगाम आतंकी हमले के बाद किए गए विवादित सोशल मीडिया पोस्ट मामले में फिलहाल उनकी गिरफ्तारी नहीं होगी. कोर्ट ने बुधवार (7 जनवरी, 2026) को नेहा की याचिका पर यूपी सरकार और मामले के शिकायतकर्ता को नोटिस जारी किया है.
जस्टिस जेके महेश्वरी और जस्टिस अतुल एस चंदुरकर की बेंच ने नेहा सिंह राठौर की याचिका पर आदेश देते हुए कहा कि कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी. हालांकि, कोर्ट ने यह भी साफ किया कि नेहा को 19 जनवरी को पुलिस की पूछताछ में हिस्सा लेना होगा. अगर उन्होंने ऐसा नहीं किया तो इसे गंभीरता से लिया जाएगा.
नेहा सिंह राठौर ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी, जिसमें उन्हें अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया गया था. नेहा ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और बीजेपी के खिलाफ आपत्तिजनक पोस्ट किए थे. उन पर संवेदनशील समय में अशांति पैदा करने और देशविरोधी बातों का प्रचार करने का आरोप है. इसे लेकर लखनऊ के हजरतगंज थाने में केस दर्ज हुआ है.
इससे पहले हाई कोर्ट ने उन्हें अग्रिम जमानत देने से मना कर दिया था. अब उन्हें सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम राहत मिली है. नेहा ने गिरफ्तारी पर रोक और केस रद्द करने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार ने दावा किया कि नेहा सिंह राठौर इंवेस्टिगेटिंग ऑफिसर (IO) के साथ पूछताछ में कॉरपरेट नहीं कर रही हैं. इस पर नेहा के वकील ने दलील दी कि वह 3 जनवरी को आईओ के सामने पेश हुई थीं.
अभियोजन पक्ष का दावा है कि जब सरकार पहलगाम आतंकी हमले का बदला लेने की तैयारी कर रही थी और देश में कड़े प्रतिबंध लगाए गए थे, उस समय नेहा सिंह राठौर ने लगातार कई पोस्ट किए, जिनका मकसद देश की अखंडता को प्रभावित करना और लोगों को धर्म और जाति के आधार पर एक-दूसरे के खिलाफ अपराध करने के लिए उकसाना था.
हाईकोर्ट ने भी उनकी याचिका खारिज करते हुए कहा था कि संविधान का आर्टिकल 19 भले बोलने की आजादी का अधिकार देता है, लेकिन फिर भी सार्वजनिक व्यवस्था, शालीनता और नैतिकता के लिए इस पर उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं. कोर्ट ने कहा कि नेहा ने ऐसे संवेदनशील समय पर ये पोस्ट किए जब पहलगाम आतंकी हमले जैसी घटना हुई.
(निपुण सहगल के इनपुट के साथ)
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