मायानगरी मुंबई में वृद्धजनों का अकेलापन ऐसे बांट रही है मुंबई पुलिस
मुंबई के कांदिवली पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर विजय ने बताया कि उनके इलाके में अकेले बुजुर्गों का हाल जानने के लिए पुलिस की टीम नियमित रूप से उनके पास आती जाती रहती है.

मुंबईः मुंबई की भागदौड़ भरी जिंदगी में शहर का अकेलापन बढ़ता जा रहा है. जहां नई पीढ़ी के लोग नौकरी के चक्कर में अपने घरों से दूर रहने को मजबूर है और घरों में उनके बूढ़े माता-पिता और परिजन अकेले रहने को मजबूर हैं उनकी इस मजबूरी में अब इलाके के पुलिस के सिपाही सहारा बन रहे हैं.
वैसे तो घर पर पुलिस का आना अच्छा नहीं माना जाता है, पुलिस दरवाजे पर दस्तक देती है तो लोग डर जाते हैं. पर अब मुम्बई में पुलिस जब आम लोगों के घर पहुंचती है तो उनको डराने के लिए नहीं बल्कि उनका अकेलापन दूर करने के लिए और उनकी खुशियां बढ़ाने के लिए जाती है. मुंबई के कांदिवली पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर विजय बताते हैं कि उनके थाने के इलाके के तकरीबन 700 ऐसे बुजुर्ग हैं जो अपने घर में अकेले रहते हैं. इन अकेले बुजुर्गों का हाल जानने के लिए पुलिस की टीम नियमित रूप से उनके पास आती जाती रहती है.
कांदिवली पुलिस स्टेशन के तहत आने वाली 4 चौकियों जिनमें हर चौकी में एक अधिकारी और तकरीबन 4 सिपाही होते हैं. हर चौकी में उस इलाके के घर में रह रहे बुजुर्गों का फोन नंबर और घर का पता रहता है पुलिस की टीम क्रमवार सुबह या शाम इनसे मिलने के लिए इनके घर जाती रहती है, कोशिश रहती है कि हफ्ते में एक बार मुलाकात करके वृद्धजनों का हालचाल ले लिया जाए.
मुंबई में कई एनजीओ,सोसायटी के लोग परिजनों के बिना अकेले रह रहे बुजुर्गों को खुश रखने के लिए उनका अकेलापन दूर करने के लिए और टाइम पास के लिए क्लब चलाते हैं उनके लिए तरह-तरह के आयोजन करते हैं खेलों का भी आयोजन करते रहते हैं. उनके अकेलेपन का सहारा भी मुंबई पुलिस बन रही है.
अकेले रह रहे इन बुजुर्गों के घर जब पुलिस वाले पहुंचते हैं तो उनकी खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहता है. जैसे कोई परिजन आया हो वैसे ही ये वृद्धजन पुलिस वालों का स्वागत करते हैं. पुलिस वालों के साथ बैठकर देर तक बातें करते हैं. अपना अकेलापन दूर करते हैं. इंस्पेक्टर विजय बताते हैं कि कोशिश यही रहती है कि जन्मदिन पड़ने पर बुजुर्गों का जन्मदिन भी जश्न के तौर पर मनाया जाए.
बुजुर्गों के पास हर चौकी के एक पुलिस कर्मी का नंबर रहता है, अगर उनको कोई खास जरूरत हो कोई दवा लानी हो तो वह खुद भी फोन कर कर पुलिस वालों से वह दवा मंगवा लेते हैं. कई बुजुर्गों और पुलिस वालों के बीच परिवार की तरह संबंध हो गए हैं पुलिस वालों के घर वाले भी इन बुजुर्गों को जानते हैं और उनसे मेल मुलाकात करते रहते हैं.
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