पेपर लीक रोकने कड़े संशोधन करने जा रही मोदी सरकार, आज लोकसभा में पेश होगा अहम बिल
कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह इस बिल का अनुमति प्रस्ताव सदन के पटल पर रखेंगे. बिल सात मुख्य संशोधन पेश करता है. इनका मकसद सार्वजनिक परीक्षाओं से जुड़ी खामी दूर करना है.

CJP के प्रदर्शन के बाद उठा शिक्षा का मुद्दा देश की सियासत का मुख्य केंद्रित मुद्दा बनकर उभरा है. केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने 25 जुलाई 2026 को अपना इस्तीफा सौंप दिया. ऐसे में मोदी सरकार शिक्षा के मुद्दे पर गंभीर नजर आ रही है. केंद्र सरकार सोमवार (27 जुलाई) को लोकसभा में सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक 2026 पेश करेगी.
कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह इस बिल का अनुमति प्रस्ताव सदन के पटल पर रखेंगे. यह बिल सात मुख्य संशोधन पेश करता है. इनका मकसद NEET-UG 2026 परीक्षा में बड़े पैमाने पर हुई गड़बड़ियों के बाद लागू करने में आ रही कमियों को दूर करना, खास न्यायिक तंत्र बनाना और आपराधिक मुकदमों में तेजी लाना है.
सरकार ने यह कदम मानसून सत्र जो 20 जुलाई से शुरू हुआ है, उसके ठप हो जाने के बाद उठाया है. विपक्षी दलों और स्टूडेंट ग्रुप्स ने पेपर लीक के मुद्दे पर केंद्र पर लगातार प्रेशर बनाए रखा था. इस कानून का मकसद जांच-न्यायिक कार्यवाही दोनों के लिए सख्त समय सीमा तय करके मूल 2024 के ढांचे में बड़े बदलाव करना है.
इस बिल के तहत मिलेंगी यह शक्तियां
इस बिल में राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन को सेशन कोर्ट को स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट के तौर पर नामित करने का अधिकार दिया जाएगा. यह खास तौर पर इस कानून के तहत अपराधों की सुनवाई करेंगे. विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट में कार्यवाही रोजाना के आधार पर होना चाहिए. चार्जशीट दाखिल होने की तारीख से तीन महीने के भीतर सुनवाई पूरी होनी चाहिए. गंभीर या एक से ज्यादा राज्यों से जुड़े परीक्षा धोखाधड़ी के मामलों को संभालने के लिए केंद्र के पास एक स्पेशल टास्क फोर्स बनाने का अधिकार होगा.
इस कानून के तहत अपराधों की जांच दो महीने के भीतर पूरी करनी होगी. राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन को परीक्षा में गड़बड़ियों के मुकदमे के लिए खास तौर पर कानूनी सलाहकार नियुक्त करने का अधिकार होगा. संगठित पेपर लीक के दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों, कोचिंग सेंटरों और सर्विस प्रोवाइडरों के लिए जेल की सजा और भारी आर्थिक जुर्माने का प्रावधान होगा.
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