कौन हैं नंदन नीलेकणी, जिन्हें PM मोदी ने सौंपी एग्जाम रिफॉर्म्स की जिम्मेदारी
PM Modi: पीएम मोदी ने कहा कि हमने परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह से लीक प्रूफ बनाने के लिए दुनिया के जाने-मानें टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट नंदन नीलेकणी के नेतृत्व में एक हाई-पावर्ड टास्क फोर्स का गठन किया है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (26 जुलाई, 2026) की शाम देश की युवाओं को संबोधित करते हुए एक वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर शेयर किया. इस वीडियो मैसेज में पीएम मोदी ने पेपर लीक मुद्दे को लेकर अहम बातें कहीं, इसके बाद उन्होंने देश की सार्वजनिक परीक्षा प्रणाली यानी पब्लिक एग्जामिनेशन सिस्टम को पूरी तरह से सुरक्षित, पारदर्शी और लीक प्रूफ बनाने के लिए एक विशेष हाई पावर्ड टास्क फोर्स के गठन की घोषणा की.
उन्होंने कहा कि हमने भारतीय परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह से लीक प्रूफ बनाने के लिए दुनिया के जाने-मानें टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट नंदन नीलेकणी के नेतृत्व में एक हाई-पावर्ड टास्क फोर्स का गठन किया है. उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में लोगों का भरोसा फिर से बहाल करने के लिए तकनीक को सबसे महत्वपूर्ण माध्यम बनाया जाना चाहिए. NEET-UG और UGC-NET जैसी परीक्षाओं में पेपर लीक और गड़बड़ियों के आरोपों के बाद परीक्षा प्रणाली (NTA) की विश्वसनीयता पर सवाल उठे हैं, ऐसे में यह टास्क फोर्स इस मुश्किल का तकनीक पर आधारित हल निकालेगी, जिससे परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्ष और सुरक्षित बनाया जा सके.
कौन हैं नंदन नीलेकणी?
देश के सबसे प्रमुख तकनीकी एक्सपर्ट्स में गिने जाने वाले नंदन मोहनराव नीलेकणी का जन्म का 2 जून, 1955 को कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में हुई थी. उन्होंने IIT बॉम्बे से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग से ग्रैजुएशन किया था और 1978 में मुंबई में पटनी कंप्यूटर सिस्टम्स से अपने करियर की शुरुआत की थी. इसके बाद, साल 1981 में उन्होंने एन. आर. नारायण मूर्ति और पांच अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर इंफोसिस की स्थापना की. उन्होंने इंफोसिस में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं और साल 2002 में कंपनी के सीईओ बने.
View this post on Instagram
आधार प्रोजेक्ट और UPI के विकास में निभाई महत्वपूर्ण भूमिका
कॉर्पोरेट जगत के अलावा, सार्वजनिक प्रशासन में नंदन नीलेकणी का सबसे बड़ा योगदान भारत के आधार प्रोजेक्ट में माना जाता है. साल 2009 में तत्कालीन पीएम मनमोहन सिंह ने उन्हें कैबिनेट मंत्री के दर्जे के साथ UIDAI का अध्यक्ष नियुक्त किया था. UIDAI के चेयरमैन के रूप में उन्होंने आधार को निर्माण और इसके क्रियान्वयन का नेतृत्व किया और आज आधार दुनिया की सबसे बड़ी बायोमेट्रिक पहचान प्रोग्राम है और भारत की डिजिटल गवर्नेंस इकोसिस्टम की रीढ़ बन चुका है.
इसके अलावा, नंदन नीलेकणी ने भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. इसके साथ ही, भारत के यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी UPI की विकासित करने की दिशा में उनकी अहम भूमिका रही है और आज UPI देश में डिजिटल पेमेंट्स का सबसे बड़ा माध्यम बन चुका है और इसे भारत की प्रमुख तकनीकी उपलब्धियों में गिना जाता है.
यह भी पढ़ेंः PM मोदी का परीक्षा सुधारों को लेकर बड़ा फैसला, बनाई हाई पावर टास्क फोर्स, जानें कौन-कौन शामिल?























