ड्राइवरलेस कार की भारत में 'नो एंट्री', सरकार की दलील- देश में बढ़ेगी बेरोजगारी
परिवहन मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक ड्राइवरलेस कार को लेकर दुनियाभर में तेज़ी से परीक्षण हो रहे हैं. अमेरिका की गूगल कंपनी से लेकर यूरोप की कई कंपनियां भी चालक रहित कार पर तेज़ी से काम कर रही हैं. भारत में भी टाटा मोटर्स ने चालक रहित कार के परीक्षण की तैयारी शुरू की है लेकिन मोदी सरकार ने फैसला लिया है कि भारत चालक रहित कार के लिए 'नो एंट्री ज़ोन' रहेगा.

नई दिल्ली: दुनिया में बिना ड्राइवर वाली कार का तेज़ी से परीक्षण हो रहा है लेकिन भारत में ड्राइवरलेस कार को एंट्री नहीं मिलेगी. दरअसल सरकार का मानना है कि इससे देश में बेरोजगारी बढ़ेगी, इसलिए उन्होंने इस टेक्नोलॉजी को भारत में इज़ाज़त देने से साफ इनकार कर दिया है.
दुनियाभर में तेज़ी से हो रहे हैं परीक्षण
परिवहन मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक ड्राइवरलेस कार को लेकर दुनियाभर में तेज़ी से परीक्षण हो रहे हैं. अमेरिका की गूगल कंपनी से लेकर यूरोप की कई कंपनियां भी चालक रहित कार पर तेज़ी से काम कर रही हैं. भारत में भी टाटा मोटर्स ने चालक रहित कार के परीक्षण की तैयारी शुरू की है लेकिन मोदी सरकार ने फैसला लिया है कि भारत चालक रहित कार के लिए 'नो एंट्री ज़ोन' रहेगा.
देश में बेरोज़गारी बढ़ाएगी ड्राइवरलेस कार
मोदी सरकार ने चालक रहित कार को भारत में नो एंट्री देने का फैसला लिया है. सूत्रों के मुताबिक चालक रहित कार देश में बेरोज़गारी बढ़ाएगी और सरकार ऐसा कोई भी फैसला नहीं लेगी जिससे बेरोज़गारी बढ़े या रोजगार के मौको में कटौती हो.
देश में 22 लाख ड्राइवर की कमी
जानकारी के मुताबिक वर्तमान समय में देश में 2 करोड़ से ज़्यादा ड्राइवर को रोजगार मिला हुआ है और 22 लाख ड्राइवर की कमी है. ड्राइवर रहित कार चालकों को कमी तो पूरी कर देगी लेकिन बेरोज़गारी को बढ़ावा भी देगी. इसलिए सरकार ने चालक रहित कारो को एंट्री नही देने का फैसला लिया है.
उबर का दावा, '2021 तक पूरी तरह से ड्राइवरलेस कार'
आपको बता दें कि सबसे पहले गूगल ने चालक रहित कारों का परीक्षण शुरू किया था लेकिन अब टेस्ला मोटर्स, जीएम और फोर्ड जैसी और भी कंपनियां इस दिशा में आगे आ रही हैं. टेस्ला मोटर्स, जीएम और फोर्ड जोर-शोर से इसे विकसित करने में जुटी हैं और हाल में ही इस दौड़ में ऑन डिमांड कार सेवा मुहैया कराने वाली कंपनी उबर जुट गई है. उबर ने तो घोषणा कर दी है कि 2021 तक पूरी तरह से ड्राइवरलेस कार को विकसित किया जाएगा.
सालाना 600 अरब घंटे का वक्त कार में ही बिता रहे हैं लोग
विशेषज्ञों के मुताबिक, यात्री कारें सालाना कुल 10 लाख करोड़ मील का सफर तय करती हैं और उनकी औसत रफ्तार 40 किलोमीटर प्रति घंटा होती है. उन्होंने यह भी अनुमान लगाया है कि लोग 600 अरब घंटे का वक्त सालाना कार में ही बिता रहे हैं. हालांकि अमेरिका और चीन में अगले 15-20 सालों में चालक रहित कार बेहद आम बात होगी.





















