एक्सप्लोरर

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव: शिवसेना ने बीजेपी के सामने क्यों घुटने टेक दिए?

शिवसेना कम सीटों पर कैसे राजी हो गई इसको लेकर पार्टी के मुखपत्र सामना की संपादकीय में सफाई पेश की गई है. इसमें कहा गया कि बीजेपी राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पार्टी है. हमने अपना दिल बड़ा करके इसे स्वीकार किया है.

मुंबई: 'टाइगर अब ढोकला खाने लगा है', मुंबई में बुधवार शाम एनसीपी प्रवक्ता नवाब मलिक ने ये बात जब कही तब उनका निशाना शिवसेना पर था. टाइगर यानी बाघ शिवसेना का प्रतीक है. महाराष्ट्र की सबसे आक्रमक राजनीतिक पार्टी मानी जानेवाली शिवसेना, चुनावी गठबंधन के लिये बीजेपी के सामने बैकफुट पर नजर आई.

जो शिवसेना मुख्यमंत्री के पद पर शिवसैनिक बिठाना चाहती थी, वो कम सीटों पर चुनाव लड़ने के लिये क्यों तैयार हो गई. महाराष्ट्र में बीजेपी के साथ गठबंधन में शिवसेना आधी से भी कम यानी कि 288 में से सिर्फ 124 सीटों के लिए तैयार कैसे हो गयी? इस सवाल पर पार्टी के मुखपत्र सामना के संपादकीय में सफाई दी गई.

इसमें कहा गया, "ये मानना पड़ेगा कि लेना कम और देना ज्यादा हुआ है लेकिन जो हमारे हिस्से आया है उसमें शत-प्रतिशत यश पाने का हमारा संकल्प है. बीजेपी राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पार्टी बन चुकी है. कई पार्टियों के प्रमुख लोग महाराष्ट्र में उनकी चौखट पर बैठे हैं. उनकी मेहमान नवाजी करने के लिए बड़ा ग्रास देना होगा और हमने अपना दिल बड़ा करके इसे स्वीकार किया है."

महाराष्ट्र चुनाव: वर्ली से 24 घंटे के भीतर हटे आदित्य ठाकरे के अलग-अलग भाषाओं वाले पोस्टर

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव: शिवसेना ने बीजेपी के सामने क्यों घुटने टेक दिए? (फाइल फोटो)

शिवसेना ने दिल बड़ा किया है या दिली ख्वाहिश के साथ समझौता किया है, ये सवाल है. जो शिवसेना महाराष्ट्र में अपने आप को 'बड़े भाई' की भूमिका में पेश करती थी, जो शिवसेना महाराष्ट्र में अपना मुख्यमंत्री बनाने की बात करती थी, जो शिवसेना अकेले 150 सीटों पर लड़ने की बात करती थी, वही शिवसेना आज बैकफुट पर नजर आ रही है. इसके पीछे 2014 में हुए विधानसभा चुनाव से लेकर अब तक जो घटनाक्रम हुए हैं, वो जिम्मेदार हैं.

2014 के चुनाव की खातिर बीजेपी से गठबंधन की चर्चा आदित्य ठाकरे की अगुवाई में हो रही थी. आदित्य 288 सीटों में से 150 सीटों पर शिवसेना के उम्मीदवार उतारने की जिद पर अड़े थे. इतनी सीटें बीजेपी देने को तैयार नहीं हुई और दोनो पार्टियों ने अलग अलग चुनाव लड़ा. 150 सीटों की चाहत रखनेवाली शिवसेना को महज 63 सीटें मिलीं, जबकि बीजेपी 122 सीटें हासिल करके सबसे बड़ी पार्टी बन गई और सरकार बना ली.

इसके बाद 2017 के मुंबई महानगरपालिका के चुनाव में भी शिवसेना ने बीजेपी के साथ गठबंधन नहीं किया. इस बार शिवसेना के हाथ से सत्ता जाते जाते बची. 221 सीटों में से शिवसेना को 84 सीटें मिलीं, जबकि बीजेपी को महज 2 सीटों कम यानी कि 82 सीटें.

2018 में पालघर लोकसभा सीट का उपचुनाव हुआ. इस उपचुनाव में भी बीजेपी और शिवसेना के बीच सहमति नहीं हुई. नतीजा ये हुआ कि शिवसेना के उम्मीदवार श्रीनिवास वनगा को बीजेपी के उम्मीदवार राजेंद्र गावित के सामने हार झेलनी पड़ी.

इस दौरान शिवसेना केंद्र और राज्य में बीजेपी के साथ सरकार में बनी रही और अपने मुखपत्र सामना के जरिये विपक्षी पार्टी की तरह बीजेपी पर हमले भी करती रही...लेकिन साथ ही उसे ये भी समझ में आ गया कि बीजेपी महाराष्ट्र में उससे कहीं ज्यादा ताकतवर बन चुकी है. यही वजह थी कि शिवसेना सांसद संजय राउत के मुंह से निकल पड़ा कि 2014 में अगर शिवसेना विपक्ष में बैठती तो इस बार उसकी स्थिति अलग होती.

महाराष्ट्र चुनाव: पहली बार चुनावी समर में उतरे भतीजे की मदद करेंगे चाचा राज ठाकरे ?

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव: शिवसेना ने बीजेपी के सामने क्यों घुटने टेक दिए? (फाइल फोटो)

लोकसभा चुनाव के चंद महीने पहले तक भले ही शिवसेना की ओर से ऐसा माहौल बना दिया गया था कि वो अपने दम पर ही चुनाव लड़ेगी. लेकिन चुनाव के ठीक पहले उसने फिर बीजेपी से गठबंधन कर लिया. उस वक्त ये प्रचारित किया गया कि लोकसभा में बीजेपी ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ेगी और शिवसेना विधानसभा में 50 फीसदी सीटों पर चुनाव लड़ेगी. लेकिन बीजेपी नेताओं को ये फॉर्मूला ठीक नहीं लगा.

बीजेपी में ये बात उठी कि जब बिना गठबंधन किये वो 122 सीटों पर चुनाव लड़ सकती है तो भला शिवसेना को ज्यादा सीटें क्यों दी जायें. बीजेपी ने विधानसभा चुनाव के लिये शिवसेना को 50 फीसदी सीटें देने से इनकार कर दिया. बीजेपी की राज्य में मौजूदा पैठ को देखते हुए शिवसेना को अब कम सीटों पर ही संतोष करना पड़ रहा है.

कोंकण के दिग्गज नेता नारायण राणे भी बीजेपी के साथ हैं, जिन्होने कुछ वक्त पहले संकेत दिया था कि वे शिवसेना के विधायको को तोड़कर बीजेपी में ला सकते हैं. जिस तरह से कांग्रेस और एनसीपी के कई दिग्गज नेता अपनी पार्टी को छोडकर बीजेपी में शामिल हुए हैं, उससे शिवसेना में भी ये आशंका बनी हुई थी कि अगर गठबंधन नहीं हुआ तो कहीं ऐसी ही सेंधमारी बीजेपी, शिवसेना में भी न कर दे.

लोकसभा चुनाव में बीजेपी का प्रदर्शन और राष्ट्रवाद के सामने स्थानीय मुद्दों के प्रासंगिक न रह जाने से भी शिवसेना पर मनोवैज्ञानिक दबाव पड़ा. इसी वजह से शिवसेना की नई पीढ़ी के नेताओं ने कम सीटों पर ही सही, बीजेपी से गठबंधन करने में ही भलाई समझी, हालांकि पुराने नेता इसका विरोध कर रहे थे.

पत्रकारों के कड़वे सवालों से बचने के लिए गठबंधन के ऐलान की खातिर शिवसेना बीजेपी की संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस भी नहीं बुलाई, जैसा कि हमेशा होते आया था. सिर्फ एक प्रेस रिलीज जारी कर दी गयी और सीधे तय उम्मीदवारों को टिकट दिया जाना शुरू हो गया. किसी भी राजनीतिक पार्टी का सबसे बड़ा मकसद सत्ता हासिल करना होता है. फिर इसके लिए चाहे विचारधारा से समझौता करना पड़े या पुरानी बातें भुलानी पड़ें. शिवसेना और बीजेपी के गठबंधन में भी यही देखने मिल रहा है.

और पढ़ें
Sponsored Links by Taboola

टॉप हेडलाइंस

तेलंगाना के शिव प्रताप शुक्ला, बंगाल में आरएन रवि... 9 राज्यों में बदले गए राज्यपाल और LG
तेलंगाना के शिव प्रताप शुक्ला, बंगाल में आरएन रवि... 9 राज्यों में बदले गए राज्यपाल और LG
भारतीय वायुसेना का Su-30MKI फाइटर जेट लापता, रडार से संपर्क टूटा, रक्षा मंत्रालय ने क्या बताया?
भारतीय वायुसेना का Su-30MKI फाइटर जेट लापता, रडार से संपर्क टूटा, रक्षा मंत्रालय ने क्या बताया?
'अमेरिका-इजरायल ने दुनिया को युद्ध की आग में झोंका, अब उसकी आंच भारत...', मिडिल ईस्ट में छिड़ी जंग पर भड़के इमरान मसूद
'दुनिया को युद्ध की आग में झोंका, उसकी आंच भारत...', मिडिल ईस्ट में जंग पर भड़के इमरान मसूद
तेलंगाना में बड़ा रेल हादसा टला, इस्सार एक्सप्रेस का इंजन पहिया टूटा, रातभर पटरी पर खड़ी रही ट्रेन
तेलंगाना में बड़ा रेल हादसा टला, इस्सार एक्सप्रेस का इंजन पहिया टूटा, रातभर पटरी पर खड़ी रही ट्रेन

वीडियोज

Chitra Tripathi: बेटे Nishant की लॉन्चिंग के लिए Nitish Kumar ने BJP को सौंपी सत्ता? | JDU | Bihar
Bharat Ki Baat: बिहार में BJP से CM की रेस में कौन आगे, क्या होगा फॉर्मूला? | Nitish Kumar | JDU
Sandeep Chaudhary: बिहार का CM कौन...BJP क्यों है मौन? | Nitish Kumar | Bihar | BJP | JDU
Bihar Politics: दिल्ली में Nitish Kumar..बिहार में BJP? निषाद या महिला कौन होगी मुख्यमंत्री? | JDU
Chitra Tripathi: बेटे के लिए नीतीश का 'रिटायरमेंट प्लान'? | Big Breaking | Nitish Kumar | Bihar CM

फोटो गैलरी

Petrol Price Today
₹ 94.77 / litre
New Delhi
Diesel Price Today
₹ 87.67 / litre
New Delhi

Source: IOCL

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
ईरान, अमेरिका से लेकर कुवैत, ओमान तक... मिडिल ईस्ट में छिड़ी जंग में अब तक किस देश के कितने लोगों की हुई मौत?
ईरान, US से कुवैत, ओमान तक... मिडिल ईस्ट में छिड़ी जंग में किस देश के कितने लोगों की हुई मौत?
नीतीश कुमार के फैसले से उनके गांव के ही लोग नहीं खुश! कहा- RJD को देंगे समर्थन
नीतीश कुमार के फैसले से उनके गांव के ही लोग नहीं खुश! कहा- RJD को देंगे समर्थन
चीन ही नहीं, भारत को भी मिलेगी राहत... ईरान के ऐलान ने अमेरिका-यूरोप की बढ़ाई टेंशन, अब क्या करेंगे ट्रंप?
चीन ही नहीं, भारत को भी मिलेगी राहत! ईरान के ऐलान ने US-यूरोप की बढ़ाई टेंशन, क्या करेंगे ट्रंप?
कौन हैं अर्जुन तेंदुलकर की दुल्हन सानिया चंडोक, कितनी पढ़ी-लिखी हैं? कितनी अमीर हैं? जानें A टू Z डिटेल्स
कौन हैं अर्जुन तेंदुलकर की दुल्हन सानिया चंडोक, कितनी पढ़ी-लिखी हैं? कितनी अमीर हैं?
'ये उसका रोज का है' अनुराग डोभाल के वायरल वीडियो पर भाई ने किया रिएक्ट, बोले- 'वो बीवी को मारता था'
'ये उसका रोज का है' अनुराग डोभाल के वायरल वीडियो पर भाई ने किया रिएक्ट, बोले- 'वो बीवी को मारता था'
खामेनेई की मौत के 5 दिन बाद भारत ने जताया दुख, ईरानी दूतावास पहुंचे विदेश सचिव विक्रम मिसरी, लिखा शोक संदेश
खामेनेई की मौत के 5 दिन बाद भारत ने जताया दुख, ईरानी दूतावास पहुंचे विदेश सचिव विक्रम मिसरी, लिखा शोक संदेश
Citroen Basalt Vs Kia Syros: इंजन और फीचर्स के मामले में कौन सी SUV है बेहतर? यहां जानें अंतर
Citroen Basalt Vs Kia Syros: इंजन और फीचर्स के मामले में कौन सी SUV है बेहतर? यहां जानें अंतर
Strait of Hormuz: क्या है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, जानें कैसे मिला था इसे इसका यह नाम?
क्या है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, जानें कैसे मिला था इसे इसका यह नाम?
Embed widget