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महादेव ऐप घोटाला: कपड़ा बेचने वाला सटोरिया लोगों को 'चूना' लगा बना अरबों का मालिक, पढ़िए सौरभ चंद्राकर की पूरी कुंडली

Mahadev Betting App Scam: महादेव बेटिंग ऐप के प्रमोटर सौरभ चंद्राकर की कहानी बेहद ही दिलचस्प है. कभी कपड़ा बेचने वाला सौरभ धांधली के जरिए अरबों का मालिक बन गया.

Mahadev Betting App: महादेव बेटिंग ऐप...पिछले कुछ दिनों से ये नाम टीवी से लेकर अखबारों तक की सुर्खियों में छाया हुआ है. गैरकानूनी सट्टेबाजी के जरिए 5000 करोड़ रुपये घोटाले की बात कही गई है. महादेव बेटिंग ऐप का जब भी जिक्र हो रहा है, तो सौरभ चंद्राकर की बात भी हो रही है. इस ऑनलाइन गेमिंग ऐप के प्रमोटर्स में से एक सौरभ चंद्राकर है, जिसकी उम्र 26 साल है. भिलाई के रहने वाले इस लड़के की तलाश में भारत लगा हुआ है. 

महादेव बेटिंग ऐप के दूसरे प्रमोटर का नाम रवि उप्पल है. सौरभ और रवि ने मिलकर लोगों को 5000 करोड़ रुपये का चूना लगाया है. सबसे ज्यादा हैरानी वाली बात ये है कि कुछ साल पहले तक सौरभ कपड़े की दुकान में काम किया करता था. लेकिन सट्टेबाजी की उसकी लत ने उसे ऐसा घपलेबाज बनाया है, जो आज चर्चा का विषय बना हुआ है. महादेव ऐप के पीछे सौरभ का ही दिमाग है. आइए आज आपको सौरभ चंद्राकर की पूरी क्राइम कुंडली बताते हैं. 

भिलाई से शुरू हुई सौरभ की कहानी? 

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सौरभ चंद्राकर के पिता भिलाई नगर निगम में ग्रेड 4 कर्मचारी थे. परिवार की आर्थिक हालत ज्यादा ठीक नहीं थी. पूरा परिवार के एक टूटे हुए घर में रहता था. 12वीं तक पढ़ाई करने के बाद 2014 में 17 साल की उम्र में ही उसने काम करने की शुरुआत कर दी. वह भिलाई के आकाशगंगा नाम की बिल्डिंग में कपड़े की दुकान पर काम करता था. उसे 12 से 14 हजार रुपये महीना की सैलरी मिलती थी. 

सौरभ को शुरू से ही जुए की लत रही है. वह मोबाइल पर सट्टेबाजी किया करता था. जिस बिल्डिंग में सौरभ काम करता था, वो सट्टेबाजी के लिए बदनाम थी. यहां ढेरों सट्टेबाज पहुंचते थे. कहा जाता है कि यहीं पर वह अवैध सट्टेबाजी के ग्रुप्स में शामिल हो गया. कहा तो ये भी जाता है कि यहीं पर उसकी मुलाकात रवि उप्पल से हुई. सौरभ की दिलचस्पी क्रिकेट में ज्यादा थी, यही वजह थी कि उसने अपने शुरुआती पैसे इसी खेल में लगाना शुरू कर दिया. 

2017 आते-आते सौरभ चंद्राकर पुलिस की नजरों में चढ़ चुका था. एचटी से बात करने वाले एक नेता ने बताया कि सौरभ के पिता ने एक बार उन्हें फोन करके बताया कि उनका बेटा दिन भर लैपटॉप पर सट्टेबाजी करता है. कुछ पुलिसवाले उसे पकड़कर ले गए हैं. आप उसे छुड़वा दीजिए. इस नेता ने पुलिस में बात की और छोटा-मोटा मामला होने की वजह से सौरभ को छोड़ दिया गया. लेकिन किसी को ये नहीं मालूम था कि ये लड़का कितनी बड़ा अपराधी बनने वाला है. 

कैसे शुरू हुआ महादेव ऐप? 

सौरभ से मिलने से पहले रवि उप्पल एक गेमिंग ऐप बना चुका था. 2018 में चंद्राकर ने इस गेम में दिलचस्पी दिखाई और फिर दोनों साथ आ गए. दोनों ने मिलकर एक नेटवर्क बनाया और फिर कुछ महीनों में भिलाई में एक जूस फैक्ट्री खोली गई. 2021 में पुलिस भिलाई के तालपुरी इंटरनेशनल कॉलोनी में जांच के लिए पहुंची हुई थी. यहां उन्हें पहली बार ऑर्गेनाइज्ड सट्टे की जानकारी मिली. मगर सबूतों का अभाव था, ताकि इसे साबित किया जा सके. 

पुलिस ने बताया कि हमें छापेमारी के दौरान कंप्यूटर्स मिले थे, जो कहीं बाहर से ऑपरेट हो रहे थे. फिर दुर्ग पुलिस ने मार्च, 2022 में मोहन नगर नाम इलाके में एक दूसरे जगह रेड मारी. इस दौरान पुलिस को चंद्रकार और उप्पल तो नहीं मिले, मगर उनके हाथ एक अहम जानकारी लगी. इसके जरिए ये साबित हो गया कि यहां से ऑनलाइन सट्टेबाजी की जा रही है. ये सट्टेबाजी सिर्फ क्रिकेट में ही नहीं हो रही है, बल्कि इसमें कुछ बड़ी चीज चल रही है .

अक्टूबर 2022 में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को इसकी जानकारी दी गई. इसके बाद जांच में पता चला कि महादेव बेटिंग ऐप नाम के एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए सट्टेबाजी की जा रही है. इस ऐप पर न सिर्फ तीन पत्ती और पोकर जैसे लाइव गेम्स खेले जा रहे हैं, बल्कि क्रिकेट और चुनावी नतीजों पर दांव भी लगाए जा रहे हैं. ईडी ने जांच में पाया कि चंद्राकर और उप्पल दोनों इस ऐप के प्रमोटर्स हैं. दोनों दुबई में छिपे हुए हैं और वहां से ऐप को ऑपरेट कर रहे हैं.

कैसे चलता था अपराध का धंधा? 

ईडी की जांच में पता चला कि आरोपी अलग-अलग वेबसाइटों पर कॉन्टैक्ट नंबरों का विज्ञापन किया करते थे. लोगों को लालच दिया जाता था कि अगर वह इस नंबर से संपर्क करेंगे, तो उन्हें मुनाफा होगा. अगर किसी को दिलचस्पी होती थी, तो उसे सट्टेबाजी वाली वेबसाइट पर भेजा जाता था. यूजर के पास ऑप्शन होता था कि वह किस खेल पर दांव लगाना चाहता है. शुरुआती रकम 500 रुपये होती थी. शुरू में यूजर जीतता भी, मगर जैसे ही वह बड़ी रकम लगाता, उसे हार मिलती. 

इस ऐप को इस तरह से डिजाइन किया गया था कि खेल पर पूरा कंट्रोल इसे बनाने वाले यानी चंद्रकार की कंपनी के पास होता था. यही वजह थी कि खेल शुरू होने से पहले ही हार तय होती थी. ईडी ने इस साल अगस्त में छत्तीसगढ़ में छापेमारी की और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में चार लोगों को पकड़ा. इसमें सुनील दम्मानी, अनिल दम्मानी, सतीश चंद्राकर और एएसआई चंद्रभूषण वर्मा शामिल थे. इन लोगों ने इस बेटिंग ऐप को भारत में फैलाने का काम किया था. 

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