एक साथ चुनाव: 9 दलों ने किया विरोध तो SP समेत 4 का मिला समर्थन, बीजेपी-कांग्रेस ने साधी चुप्पी
लॉ कमीशन ने एक साथ चुनाव कराये जाने के मसले पर प्रमुख दलों से राय मांगी थी. दो दिवसीय परामर्श प्रक्रिया में बीजेपी और कांग्रेस के प्रतिनिधि नहीं पहुंचे.

नई दिल्ली: लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराए जाने के मसले पर विरोध के सुर तेज हो गए हैं. तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी), आम आदमी पार्टी (आप) और तेलगू देशम पार्टी (टीडीपी) समेत नौ दलों ने एक साथ चुनाव कराए जाने के कॉन्सेप्ट का विरोध किया है. ज्यादातर विपक्षी दलों की असहमति के बीच समाजवादी पार्टी (सपा) ने इस मामले में सशर्त हामी भर दी है. वहीं कांग्रेस और बीजेपी ने फिलहाल पत्ते नहीं खोले हैं.
दरअसल, लॉ कमीशन ने एक साथ चुनाव कराये जाने के मसले पर प्रमुख दलों से राय मांगी थी. दो दिवसीय परामर्श प्रक्रिया में बीजेपी और कांग्रेस के प्रतिनिधि नहीं पहुंचे. वहीं ममता बनर्जी की नेतृत्व वाली टीएमसी, गोवा में बीजेपी की सहयोगी गोवा फॉरवर्ड पार्टी, अरविंद केजरीवाल की आप, करुणानिधि की डीएमके, चंद्रबाबू नायडू की टीडीपी, फॉरवर्ड ब्लॉक, एचडी देवगौड़ा की जेडीएस और वामदलों ने इसका विरोध किया. वहीं बीजेपी की नेतृत्व वाली एनडीए की सहयोगी शिरोमणि अकाली दल के अलावा एआईएडीएमके, समाजवादी पार्टी और टीआरएस ने समर्थन किया.
समाजवादी पार्टी नेता राम गोपाल यादव ने कहा कि 2019 लोकसभा चुनाव से ही एक साथ चुनाव कराया जाना चाहिए. ऐसे में अगर एक साथ चुनाव 2019 में हुआ तो उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की बीजेपी सरकार का कार्यकाल छोटा हो जाएगा.
वहीं आम आदमी पार्टी की ओर से आशीष खेतान ने लॉ कमीशन से कहा कि एकसाथ चुनाव लोगों को एक सरकार बनाने से दूर रखने की एक ‘चाल’ है क्योंकि यदि दोनों चुनाव साथ हुए तो सदनों का कार्यकाल बढ़ाया जाएगा.
तेलंगाना के मुख्यमंत्री और टीआरएस प्रमुख के. चंद्रशेखर राव ने विधि आयोग को दिये एक लिखित जवाब में कहा कि उनकी पार्टी देश में एकसाथ लोकसभा और विधानसभा चुनाव कराये जाने का समर्थन करती है. सीपीआईएम महासचिव सीताराम येचुरी ने आयोग को पत्र लिखकर प्रस्ताव पर अपनी पार्टी की आपत्ति दर्ज करायी.
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आयोग ने 'एक साथ चुनाव : संवैधानिक और कानूनी परिप्रेक्ष्य' नाम से एक मसौदा तैयार किया है और इसे अंतिम रूप देने और सरकार के पास भेजने से पहले इसपर राजनीतिक दलों, संविधान विशेषज्ञों, नौकरशाहों, शिक्षाविदों और अन्य लोगों सहित सभी हितधारकों से इस पर सुझाव मांगे हैं. चुनाव आयोग ने पहले ही कह दिया है कि वह एक साथ चुनाव करवाने में सक्षम है, बशर्ते कानूनी रूपरेखा और लॉजिटिक्स दुरुस्त हो.
आपको बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद एकसाथ चुनाव कराए जाने की बात कर चुके हैं. उन्होंने इस संबंध में राजनीतिक दलों से सुझाव देने की अपील की थी. सरकार का मानना है कि एक साथ चुनाव कराए जाने से राजस्व पर बोझ कम पड़ेगा और समय की भी बचत होगी.
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