वकील ने चीफ जस्टिस से की प्रियंका वाड्रा पर अवमानना का मुकदमा चलाने की मांग, कहा- 'बड़े लोगों को रियायत मिल जाना गलत'
Priyanka Gandhi: कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा के एक बयान को लेकर वकील अशोक पांडे ने भारत के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर उन पर कोर्ट की अवमानना का मुकदमा चलाने की मांग की है.

Priyanka Gandhi: एक वकील ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को पत्र लिखकर कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा पर कोर्ट की अवमानना का मुकदमा चलाने की मांग की है. वकील का कहना है कि राहुल गांधी से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश पर प्रियंका गांधी की टिप्पणी अनुचित और अनावश्यक थी.
वकील अशोक पांडे ने पत्र में लिखा है कि बड़े लोगों को न्यायपालिका के खिलाफ दिए गए बयानों पर बार-बार रियायत दी जाती है, जिससे समाज में गलत संदेश जाता है.
सुप्रीम कोर्ट ने लगाईं थी फटकार
गौरतलब है कि हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी को 2022 की भारत जोड़ो यात्रा के दौरान चीन और भारतीय सेना पर दिए गए बयान को लेकर कड़ी फटकार लगाई थी. कोर्ट ने कहा था कि "कोई भी सच्चा भारतीय ऐसा बयान नहीं दे सकता". इसी टिप्पणी की आलोचना प्रियंका गांधी ने की थी, जिसका हवाला वकील ने अपने पत्र में दिया है.
अशोक पांडे ने कहा कि कंटेंप्ट ऑफ कोर्ट एक्ट की धारा 15 के तहत मुकदमा चलाने के लिए अटॉर्नी जनरल की सहमति जरूरी होती है, लेकिन आमतौर पर वे ऐसे मामलों में चुप रहते हैं या अनुमति नहीं देते. इससे बड़े लोगों को अनर्गल बयानबाजी की खुली छूट मिलती है.
लगाए गए ये आरोप
वकील ने यह भी आरोप लगाया कि वरिष्ठ नेता और वकील कपिल सिब्बल, शिवसेना सांसद संजय राउत सहित कई लोगों ने अतीत में CJI को लेकर विवादास्पद बयान दिए, लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई. उन्होंने अपने खिलाफ इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा दिए गए फैसलों का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्हें कोर्ट की अवमानना के दो मामलों में 3 और 6 महीने की सज़ा दी गई, और हाई कोर्ट में आने तक पर प्रतिबंध लगा दिया गया. जबकि वकील प्रशांत भूषण को अवमानना के एक मामले में मात्र ₹1 का जुर्माना लगाकर छोड़ दिया गया.
यह जानना जरूरी है कि किसी के खिलाफ कोर्ट की अवमानना का मुकदमा शुरू करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के नियमों के अनुसार अटॉर्नी जनरल या सॉलिसिटर जनरल की मंजूरी आवश्यक होती है. हालांकि सुप्रीम कोर्ट चाहे तो किसी भी बयान पर स्वतः संज्ञान ले सकता है, लेकिन ऐसा विरले ही होता है. ऐसे में वकील अशोक पांडे की चिट्ठी पर कोर्ट कार्रवाई करेगा या नहीं, यह फिलहाल अनिश्चित है.
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Source: IOCL






















