किसान कर्जमाफी पर वित्तमंत्री जेटली की दो टूक, राज्य सरकारों को ही उठाना होगा बोझ

नई दिल्ली: कर्जमाफी को लेकर किसान महाराष्ट्र से लेकर मध्य प्रदेश तक प्रदर्शन कर रहे हैं. इस बीच वित्त मंत्री अरुण जेटली ने एक बार फिर साफ किया है कि कर्जमाफी का बोझ राज्य सरकारों को ही उठाना पड़ेगा. कर्जमाफी का पैसा अपने खजाने से ही भरना होगा.
वित्तमंत्री अरुण जेटली ने कहा, "मैं इस बारे में पहले ही साफ कर चुका हूं कि जो राज्य इस तरह की योजनाएं लाना चाहते हैं उन्हें अपने संसाधन खुद जुटाने होंगे. इससे ज्यादा मैं इस पर कुछ नहीं कह सकता.'' जेटली ने यह बात उस सवाल के जवाब में कही जिसमें उनसे क्या केंद्र सरकार राज्यों की कर्जमाफी में मदद करेगी?
वित्त मंत्री ने कहा, "महाराष्ट्र जैसे राज्य जिन्होंने कर्जमाफी का फैसला किया है, उन्हें अपने संसाघनों से फंड जुटाना होगा.'' वित्त मंत्री ने यह बात नई दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कही. वित्त मंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब खुद तीन बीजेपी शासित राज्य महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश इस दिशा में कदम उठा रहे हैं.
और क्या बोले वित्त मंत्री जेटली? अरुण जेटली ने कहा कि रिजर्व बैंक दिवाला और शोधन अक्षमता कानून के नियमों के तहत उन फंसे कर्जों की सूची तैयार कर रहा है जिनका समाधान करने की जरूरत है. इसके साथ ही सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के परस्पर विलय और अधिग्रहण की संभावनाओं पर भी काम कर रही है.
वित्त मंत्री ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने 2016-17 में 1.5 लाख करोड़ रुपये का परिचालन लाभे अजर्ति किया है. उन्होंने इसे ठीकठाक बताया औार कहा कि तमाम तरह के प्रावधान किये जाने के बाद इन बैंकों का शुद्ध लाभ 574 करोड़ रपये रहा है.
























