25 नवंबर को एक बार फिर अंतरिक्ष में बड़ी छलांग लगाने वाला है इसरो
इसरो ने अभी ऐलान कर दिया है कि 25 नवंबर को पीएसएलवी c47 के जरिए भारत का कार्टोसैट- 3 उपग्रह और उसके साथ अमेरिका के 13 नैनो सैटेलाइट्स का प्रक्षेपण करेगा.

नई दिल्ली: चंद्रयान 2 मिशन के बाद सबकी निगाहें टिकी थीं कि आखिर इसरो अपना अगला मिशन कौन सा लांच करेगा? वहीं इसरो ने अभी ऐलान कर दिया है कि 25 नवंबर को पीएसएलवी c47 के जरिए भारत का कार्टोसैट- 3 उपग्रह और उसके साथ अमेरिका के 13 नैनो सैटेलाइट्स का प्रक्षेपण करेगा.
कार्टोसैट- 3 उपग्रह कार्टोसैट सीरीज का तीसरा उपग्रह है जो कि अंतरिक्ष से भारत की सरहदों की निगरानी के लिए प्रक्षेपित किया जाएगा. सीमा निगरानी के लिए इसरो कार्टोसैट- 3 के बाद दो और उपग्रह रीसैट-2 बीआर1 (Risat-2BR1) और रीसैट 2 बीआर 2 (Risat-2BR2) को पीएसएलवी सी- 48 और पीएसएलवी सी- 49 की मदद से दिसंबर में श्रीहरिकोटा से लांच किया जाना है.
वहीं कार्टोसेट- 3 उपग्रह 25 नवंबर को लांच किया जाएगा. कार्टोसेट-3 अंतरिक्ष में 509 किलोमीटर दूर 97.5 डिग्री के झुकाव के साथ कक्षा में स्थापित किया जाएगा. इन सेटेलाइटों के साथ साथ 13 अमेरिका के नैनो उपग्रहों और माइक्रो सेटेलाइटों को लॉन्च किया जाएगा.
पीएसएलवी सी-47 रॉकेट को श्रीहरिकोटा से 25 नवंबर को नौ बजकर 28 मिनट पर लॉन्च किया जाएगा, जो अपने साथ थर्ड जनरेशन के अर्थ इमेजिंग सैटेलाइट कार्टोसेट-3 और अमेरिका के 13 कॉमर्शियल सैटेलाइटों लेकर जाएगा.
इसके बाद इसरो दो और सर्विलांस सैटेलाइटों की लॉन्चिंग करेगा. रीसैट-2 बीआर1 और रीसैट 2 बीआर 2 को दिसंबर में दो अलग अलग मिशन में प्रक्षेपित किया जाएगा. जानकारों का मानना है कि भारतीय सरहदों की निगेहबानी के लिए ये तीनों सैटेलाइट Risat-2BR1, Risat-2BR2, Cartosat 3 अंतरिक्ष में भारत की आंख के तौर पर काम करेंगे. जिसे भारत की "Eye In The Sky" या अंतरिक्ष में भारत की खुफिया आंख कह सकते हैं.
बीते जून महीने में इसरो की ओर से कार्टोसैट-2 श्रृंखला के साथ 31 नैनो उपग्रहों का आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्पेस स्टेशन से लॉन्च किया गया था. कार्टोसैट-2 एक अर्थ इमेजिंग उपग्रह है जिसमें मल्टी स्पेक्ट्रल कैमरे भी लगे हैं. ऐसा पहली बार होने जा रहा है जब इसरो श्रीहरिकोटा से साल में हुए सभी सैटेलाइटों की लॉन्चिंग सैन्य उद्देश्यों से कर रहा है. सर्जिकल स्ट्राइक और बालाकोट स्ट्राइक के दौरान भी इसरो के उपग्रहों ने अहम भूमिका निभाई थी.
Source: IOCL

























