खुफिया जानकारी से AI तक, अमेरिकी सिस्टम की खुली पोल?
ईरान के मिनाब स्कूल हमले में 123 से ज्यादा बच्चों की मौत के बाद अमेरिकी टारगेटिंग सिस्टम, पुरानी खुफिया जानकारी और AI पर सवाल उठे हैं.जानिए पूरी जांच में क्या सामने आया है.

ईरान के मिनाब शहर में 28 फरवरी 2026 को हुए स्कूल हमले को लेकर अमेरिकी सेना की टारगेट तय करने की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठे हैं. ब्लूमबर्ग की एक विस्तृत जांच के मुताबिक, शजराह तैय्यबेह स्कूल पर दो टॉमहॉक मिसाइलें गिरी थीं. इस हमले में 150 से ज्यादा लोगों की मौत हुई, जिनमें कम से कम 123 बच्चे शामिल थे. संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में मृतकों की संख्या कम से कम 168 बताई गई है.
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी रक्षा विभाग की अंदरूनी जांच से जुड़े अधिकारियों ने माना कि इस घटना के पीछे एक ही गलती नहीं थी. पुरानी खुफिया जानकारी, पुराने सैटेलाइट डेटा, लक्ष्य की जानकारी अपडेट न होना और AI सिस्टम पर जरूरत से ज्यादा भरोसा जैसे कई कारण एक साथ जुड़े थे. अमेरिकी रक्षा विभाग ने सार्वजनिक रूप से इस जांच के अंतिम नतीजे जारी नहीं किए हैं.
स्कूल को सैन्य ठिकाने के रूप में दिखाता रहा पुराना डेटा
मिनाब का यह स्कूल उस जमीन पर बना था, जिसका इस्तेमाल पहले ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC की एक सैन्य इकाई करती थी. इसी वजह से अमेरिकी सैन्य रिकॉर्ड में यह जगह लंबे समय तक IRGC की सुविधा के रूप में दर्ज रही. ब्लूमबर्ग के मुताबिक, कमर्शियल सैटेलाइट तस्वीरों में 2017 तक स्कूल परिसर को अलग करने वाली दीवार और प्रवेश द्वार दिखाई देने लगे थे. 2018 की तस्वीरों में स्कूल की इमारत, फुटबॉल मैदान और बच्चों की गतिविधियों के लिए बनाए गए स्थान भी दिखाई देते हैं. रॉयटर्स की जांच में भी सामने आया था कि स्कूल कम से कम 2018 से खुले तौर पर एक शैक्षणिक संस्थान के रूप में काम कर रहा था. स्कूल की वेबसाइट और ऑनलाइन तस्वीरों में भी इसकी जानकारी उपलब्ध थी.
2019 में बदलाव की जानकारी सामने आई थी
ब्लूमबर्ग के मुताबिक, अमेरिकी खुफिया अधिकारियों में से कुछ ने 2019 में ही इस परिसर में हुए बदलावों को नोट किया था. हालांकि, इन बदलावों की जानकारी ऐसे सिस्टम में दर्ज की गई थी जो मुख्य सैन्य खुफिया डेटाबेस से जुड़ा नहीं था. लक्ष्य तय करने में इस्तेमाल होने वाले मुख्य डेटाबेस में जगह को फिर भी IRGC की सुविधा के तौर पर दिखाया जाता रहा. इस वजह से लक्ष्य तय करने वाली प्रक्रिया में पुरानी जानकारी बनी रही. रॉयटर्स ने मार्च में भी रिपोर्ट किया था कि अमेरिकी जांच इस संभावना पर ध्यान दे रही थी कि पुराने टारगेटिंग डेटा की वजह से स्कूल को सैन्य ठिकाने के रूप में पहचाना गया.
मावेन AI सिस्टम की भूमिका पर भी सवाल
जांच में अमेरिकी सेना के मावेन स्मार्ट सिस्टम के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठे हैं. यह AI आधारित सिस्टम अलग-अलग स्रोतों से बड़ी मात्रा में जानकारी को एक जगह जोड़कर सैन्य अधिकारियों को लक्ष्य और दूसरे ऑपरेशनल फैसलों में मदद करता है. ब्लूमबर्ग के मुताबिक, कुछ अमेरिकी सैन्य कर्मचारियों को उम्मीद थी कि मावेन पुराने डेटा या खुफिया जानकारी में मौजूद विरोधाभासों को पहचानकर उन्हें सामने लाएगा. लेकिन रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं है कि कर्मचारियों ने ऐसी उम्मीद क्यों की थी. प्लैनटिर टेक्नॉलोजी, जिसने मावेन सिस्टम विकसित किया है. उन्होंने ब्लूमबर्ग से कहा कि कंपनी बुनियादी डेटा या खुफिया जानकारी में मौजूद कमियों की पहचान करने के लिए जिम्मेदार नहीं है और मिनाब हमले में उसके सॉफ्टवेयर की गलती का कोई सबूत नहीं है. रॉयटर्स के मुताबिक, अमेरिकी रक्षा विभाग ने मार्च 2026 में मावेन को अपनी सैन्य व्यवस्था का एक मुख्य AI कार्यक्रम बनाने का फैसला किया था. सिस्टम लक्ष्य पहचानने में मदद करता है, लेकिन आधिकारिक तौर पर घातक कार्रवाई का अंतिम फैसला खुद नहीं करता और मानव निगरानी व्यवस्था में रहती है.
नागरिकों की सुरक्षा वाली टीमों में भी कटौती
ब्लूमबर्ग की जांच के अनुसार, अमेरिकी रक्षा विभाग में नागरिकों को नुकसान से बचाने वाली Civilian Harm Mitigation (CHM) टीमों में भी बड़ी कमी की गई थी. रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ टीमों में कर्मचारियों की संख्या करीब 90 प्रतिशत तक कम हुई और अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM की टीम 10 कर्मचारियों से घटकर एक रह गई. जांच से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, हमले से पहले मिनाब की साइट की समीक्षा किसी CHM विशेषज्ञ ने नहीं की थी. हालांकि ऐसी समीक्षा हर मामले में अनिवार्य नहीं थी, अधिकारियों का कहना है कि इससे संभावित नागरिक नुकसान का खतरा पहचाना जा सकता था.
युद्ध शुरू होने से पहले हजारों लक्ष्यों की समीक्षा
ब्लूमबर्ग के अनुसार, 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने से पहले अमेरिकी सेना के सामने ईरान से जुड़े बड़ी संख्या में संभावित लक्ष्यों की सूची थी. कई पुराने सैन्य लक्ष्य वर्षों से अमेरिकी टारगेट डेटाबेस में मौजूद थे. युद्ध शुरू होने से ठीक पहले समय कम होने के कारण कई लक्ष्यों की समीक्षा बहुत तेजी से की गई. रिपोर्ट के मुताबिक, जिस काम में पहले कई घंटे लगते थे, उसका बड़ा हिस्सा मावेन की मदद से कुछ मिनटों में किया गया. इसी प्रक्रिया में मिनाब की साइट भी संभावित शुरुआती लक्ष्यों की सूची में आ गई.





















