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चुनावों में जाते नेताओं की बजाए विजेता सरकारों की मेहमाननवाजी पसंद करते रहे हैं अमेरिकी राष्ट्रपति

मोदी सरकार ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत दौरे के लिए उन्हें गणतंत्र दिवस समारोह में खास मेहमान बनने का न्योता दिया है.

नई दिल्ली: साल 2019 में तय आम चुनावों से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विदेश नीति का नया पावर शो करने की तैयारी में है. मोदी सरकार ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत दौरे के लिए उन्हें गणतंत्र दिवस समारोह में खास मेहमान बनने का न्योता दिया है. सूत्रों के मुताबिक इस बाबत एक निमंत्रण प्रस्ताव भी अमेरिका को बीते दिनों भेजा गया है.

अगर राष्ट्रपति ट्रंप प्रधानमंत्री मोदी का न्योता स्वीकार करते हैं तो यह किसी भी एक प्रधानमंत्री के कार्यकाल में अमेरिकी राष्ट्रपति की दूसरी यात्रा होगी. इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा 2015 में गणतंत्र दिवस पर खास मेहमान के तौर पर भारत आए थे.

हालांकि गणतंत्र दिवस समारोह में शिरकत के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति को भेजे गए निमंत्रण के मुद्दे पर आधिकारिक तौर पर न तो अमेरिका सरकार ने कुछ कहा है औऱ न ही विदेश मंत्रालय ने इसकी पुष्टि की है. इस बीच सूत्र बताते हैं कि पीएम मोदी ने जून 2017 में अपनी अमेरिका यात्रा के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप और उनके परिवार को भारत आने का न्योता दिया था. इस प्रस्ताव को लेकर दोनों पक्ष लगातार संपर्क में हैं और इसी दौरान राष्ट्रपति ट्रंप के गणतंत्र दिवस समारोह में विशेष अतिथि बनने का प्रस्ताव व्हाइट हाउस को दिया गया.

सूत्र मानते हैं अगस्त 2017 में अपनी नई दक्षिण एशिया नीति की कामयाबियां गिनाने और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की बढ़ती अहमियत के बीच राष्ट्रपति ट्रंप के लिए नई दिल्ली का दौरा मददगार हो सकता है. साथ ही इस यात्रा के लिए गणतंत्र दिवस एक मुफीद मौका भी साबित हो सकता है. अलबत्ता यह जरूरी नहीं कि राष्ट्रपति ट्रंप गणतंत्र दिवस को ही अपनी यात्रा का मौका बनाए. लिहाजा फैसला मेहमान को करना है.

चुनाव विजेताओं के मेहमान बनते रहे हैं अमेरिकी राष्ट्रपति हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपतियों की पिछली भारत यात्राओं का रिकॉर्ड देखें तो अधिकतर दौरे आम चुनावों की ओर बढ़ रही किसी सरकार के कार्यकाल में नहीं बल्कि चुनाव जीत कर सत्ता संभालने वाले प्रधानमंत्री के पहले दो सालों में हुए हैं. बीते चार दशकों के दौरान राष्ट्रपति निक्सन से लेकर बराक ओबामा तक की भारत यात्राओं में यह सिलसिला नजर आता है.

प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की आगुवाई वाली पिछली एनडीए सरकार ने 1999 के आम चुनावों में बहुमत हासिल कर सत्ता संभालने के बाद मार्च 2000 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति की मेजबानी की थी. वहीं मई 2004 में सत्ता में आई यूपीए सरकार की अगुवाई कर रहे प्रधानमंत्री मनमोहन ने मार्च 2006 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश का दिल्ली में स्वागत किया था.

अमेरिका में 2008 के चुनावों में बहुमत हासिल कर व्हाइट हाउस पहुंचे बराक ओबामा की पहली भारत यात्रा 2010 में उस वक्त हुई थी जब 2009 के आम चुनावों में जीत कर तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की सरकार सत्ता में अपना एक साल पूरा कर चुकी थी. वहीं बराक ओबामा 2015 में जब गणतंत्र दिवस समारोह में विशेष अतिथि बनकर भारत आए थे तो उन्हें निमंत्रित करने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी थे जो 2014 के आम चुनावों में भारी बहुमत के साथ सरकार में आए थे.

ऐसे में अगर राष्ट्रपति ट्रंप गणतंत्र दिवस समारोह में खास मेहमान बनकर भारत आते हैं तो न केवल पुराना सिलसिला टूटेगा बल्कि पीएम मोदी अपने एक कार्यकाल में दो अमेरिकी राष्ट्रपतियों की मेजबानी करने वाले पहले प्रधानमंत्री होंगे. जाहिर तौर पर नरेंद्र मोदी सरकार की कोशिश भी ट्रंप के दौरे को आम चुनावों से पहले अपनी साख पर अमेरिकी मुहर की तरह दिखाने की होगी. बीते दिनों जब भारत आए दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जे-इन ने 2020 में प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत की तैयारी की बात कही तो कूटनीतिक गलियारों में इसके कई मायने निकाले जा रहे हैं.

स्वागत से ज्यादा मुश्किल के नतीजों की तैयारी बहरहाल, ट्रंप गणतंत्र दिवस के मौके पर आएं या उसके पहले. भारत औऱ अमेरिका के रिश्तों के ताने बाने का मौजूदा उलझाव बड़े नतीजों की राह मुश्किल बनाता है. भारतीय पेशेवरों के लिए खासे अहम एच1बी वीजा को लेकर ट्रंप प्रशासन की सख्त नीतियां हों या ईरान से तेल खरीद घटाने का दबाव, कारोबार के मोर्चे पर ट्रेड बंदिशों की फेहरिस्त हो या कॉमकॉस और सिस्मोआ जैसे समझौतों के अभाव में अटकी अरबों डॉलर की रक्षा परियोजनाएं. ऐसे बहुत से मुद्दे हैं जिनकी सिलवटें दोनों नेताओं को बातचीत की मेज पर बैठने से पहले दूर करनी होंगी. संबंधों के मौजूदा मिजाज का ही पैमाना है कि दोनों देशों के बीच रक्षा और विदेश मंत्रियों की संयुक्त 2+2 वार्ता अब तक दो बार टाली जा चुकी है.

कांग्रेस ने किया समर्थन इस बीच विपक्ष में मौजूद कांग्रेस ने राष्ट्रपति ट्रंप को निमंत्रित किए जाने की खबरों पर सधी प्रतिक्रिया देते हुए इतना ही कहा है कि राष्ट्रीय कार्यक्रमों में मेहमानों को बुलाना सरकार का काम है. पार्टी प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि अमेरिका हमारा दोस्त है और पहले भी अमेरिकी राष्ट्रपति भारत आते रहे हैं. हम खुले मन से अतिथि का स्वागत करते हैं.

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