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US Tariff Row: बंधुआ मजदूरी शुल्क पर भारत ने अमेरिका की दोहरी नीति पर उठाए सवाल , 1600 सामानों को मिली छूट

बंधुआ मजदूरी के नाम पर प्रस्तावित अमेरिकी टैरिफ के खिलाफ भारत ने सार्वजनिक सुनवाई में कड़ा रुख अपनाया और अमेरिका की नीति को दोहरा मापदंड बताते हुए कई गंभीर सवाल उठाए.

भारत ने बंधुआ मजदूरी से जुड़े सामानों पर अतिरिक्त शुल्क लगाने के अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) के प्रस्ताव पर सार्वजनिक सुनवाई के दौरान अमेरिका के रुख में असंगतियों की ओर ध्यान दिलाया है.

वाणिज्य मंत्रालय में संयुक्त सचिव बृज मोहन मिश्रा ने यूएसटीआर की समिति के समक्ष कहा कि अमेरिका 1,600 ऐसे सामानों को बंधुआ मजदूरी संबंधी जांच से छूट देता है, जिनका उत्पादन या खेती उसके यहां संभव नहीं है. बृज मोहन  ने कहा कि यह छूट वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में बंधुआ मजदूरी से निपटने के घोषित उद्देश्य को कमजोर करती है.

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अमेरिकी नीति पर सवाल

मिश्रा ने समिति के समक्ष कहा कि अमेरिका अपने कपास और उससे जुड़े उत्पादों का उपयोग करके तैयार किए गए वस्त्रों पर रियायती शुल्क दरें लागू करता है. उनका कहना था कि वस्त्र क्षेत्र में कच्चे माल के आयात पर कम शुल्क की यह व्यवस्था विदेशी निर्माताओं के स्रोत निर्धारण संबंधी फैसलों को प्रभावित करती है और बंधुआ मजदूरी की समस्या का प्रभावी समाधान भी नहीं करती.

द्विपक्षीय वार्ता पर जोर

उन्होंने कहा कि भारत सभी चिंताओं पर बातचीत के लिए तैयार है. उनका मानना है कि ऐसे मुद्दों का समाधान भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार वार्ता के माध्यम से होना चाहिए, न कि धारा-301 के तहत किसी एकतरफा जांच प्रक्रिया के जरिए.

यूएसटीआर का प्रस्ताव

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि ने मार्च 2026 में बंधुआ मजदूरी और जरूरत से अधिक औद्योगिक क्षमता से जुड़ी चिंताओं को लेकर 60 देशों के खिलाफ धारा-301 के तहत जांच शुरू की थी. इसके बाद तीन जून को जारी रिपोर्ट में 54 देशों से होने वाले आयात पर अतिरिक्त शुल्क लगाने का प्रस्ताव रखा गया. प्रस्ताव के तहत भारत और चीन समेत 48 अर्थव्यवस्थाओं पर 12.5 प्रतिशत तथा कनाडा, यूरोपीय संघ, मेक्सिको, इंडोनेशिया, पाकिस्तान और इक्वाडोर सहित अन्य देशों पर 10 प्रतिशत शुल्क लगाने की बात कही गई है.

उद्योग संगठनों की चिंता

सार्वजनिक सुनवाई में फेडरेशन ऑफ इंडियन चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) और भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के प्रतिनिधियों ने भी अपना पक्ष रखा. फिक्की की प्रतिनिधि पूर्णिमा शेनॉय ने कहा कि अतिरिक्त शुल्क केवल भारतीय निर्यातकों पर ही नहीं, बल्कि अमेरिकी विनिर्माताओं, आयातकों, खुदरा विक्रेताओं और उपभोक्ताओं पर भी अतिरिक्त लागत का बोझ डालेगा. उन्होंने कहा कि इससे केवल विश्वसनीय आपूर्ति श्रृंखलाएं महंगी होंगी, जबकि बंधुआ मजदूरी से बने सामानों की पहचान में कोई विशेष मदद नहीं मिलेगी.

भारत का पक्ष मजबूत

सीआईआई की प्रतिनिधि सुचिता सोनालिका ने कहा कि भारत की नीतिगत व्यवस्था को 1974 के व्यापार अधिनियम की धारा-301(बी) के तहत न तो अनुचित और न ही भेदभावपूर्ण माना जा सकता है. उन्होंने कहा कि भारत में मजबूत संवैधानिक और कानूनी ढांचा मौजूद है, जो कंपनियों को बंधुआ मजदूरी का इस्तेमाल करने से रोकता है.

साक्ष्यों पर आपत्ति

भारत ने यह भी कहा कि यूएसटीआर यह साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य पेश नहीं कर सका कि बंधुआ मजदूरी से जुड़े आयात पर प्रतिबंध का अभाव अमेरिकी उद्योग को नुकसान पहुंचाता है. भारत का कहना है कि जांच के दायरे में शामिल 60 देशों का अलग-अलग विश्लेषण करने के बजाय व्यापक निष्कर्ष निकाला गया और भारत के प्रमुख निर्यात क्षेत्रों में बंधुआ मजदूरी से जुड़े कोई ठोस प्रमाण भी पेश नहीं किए गए.

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