ग्राहम स्टेंस हत्याकांड: SC से ओडिशा को फटकार, 'फैसला लीजिए नहीं तो...'
ग्राहम स्टेंस हत्याकांड के दोषी दारा सिंह ने 2024 में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी. तब से मामला लंबित है. ओडिशा सरकार ने सिंह की याचिका पर फैसला नहीं लिया है. इसी को लेकर SC ने फटकार लगाई है.

1999 के ग्राहम स्टेंस हत्याकांड के दोषी दारा सिंह के रिहाई आवेदन पर फैसला न लेने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने ओडिशा सरकार को फटकार लगाई है. कोर्ट ने सरकार को अंतिम अवसर देते हुए सुनवाई 2 सितंबर के लिए टाल दी है. दारा सिंह ने लगभग 26 साल जेल में बिता लेने के आधार पर रिहाई की मांग की है.
दारा सिंह ने 2024 में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी. तब से मामला लंबित है. ओडिशा सरकार के सज़ा रिव्यू बोर्ड ने अभी तक दारा के आवेदन पर फैसला नहीं लिया है. सुप्रीम कोर्ट इस फैसले के इंतज़ार में कई बार सुनवाई टाल चुका है. बुधवार, 19 अगस्त को हुई सुनवाई में ओडिशा के वकील ने एक बार फिर यह जानकारी दी कि अभी तक फैसला नहीं लिया गया है.
जज की अहम टिप्पणी
ओडिशा सरकार के लिए पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि रिव्यू बोर्ड ने क्योंझर जेल से रिपोर्ट मांगी थी. वह रिपोर्ट नहीं मिलने के चलते बोर्ड मामले पर विचार नहीं कर पाया है.
मामले में पहले भी कई बार समय दे चुके जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच इस जवाब पर सख्त नाराज़ नज़र आई. जस्टिस मिश्रा ने कहा, "हमें इस बात से मतलब नहीं कि आपकी प्रक्रिया किस तरह की है. आप आवेदन पर फैसला लीजिए नहीं तो हम विचार करेंगे."
क्या है केस?
23 जनवरी 1999 को ओडिशा के क्योंझर जिले के मनोहरपुर में ऑस्ट्रेलिया के ईसाई मिशनरी ग्राहम स्टेंस और उनके दो नाबालिग बेटों फिलिप और टिमोथी की हत्या हुई थी. उन्हें कार में सोते समय जला कर मार दिया गया था. रविंद्र पाल उर्फ दारा सिंह को इस मामले में दोषी पाया गया था. उसे निचली अदालत ने फांसी की सज़ा दी थी. 2005 में ओडिशा हाई कोर्ट ने उसे उम्र कैद में बदल दिया. 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने भी इसी सज़ा को बनाए रखा.
3 लोगों की हत्या के दोषी ने अपनी याचिका मे कहा है कि वह बिना किसी परोल के 26 साल से ज़्यादा समय जेल मे बिता चुका है. पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के हत्यारे पेरारिवलन को भी सुप्रीम कोर्ट ने इसी आधार पर रिहा किया था. दारा सिंह ने यह भी कहा है कि उसने जब हत्या की थी, तब वह युवा था. जोश में किए गए उस अपराध के लिए उसे पछतावा है. अब उसे सुधरी हुई ज़िंदगी जीने का मौका दिया जाए.























