गोवा में 97 वोटर्स पर बवाल! CEO ने तुरंत दी सफाई, बोले- 'उनमें से कुछ...'
गोवा में SIR के दौरान गड़बड़ियों के कारण 97 मतदाताओं को लिस्ट से हटा दिया गया था, लेकिन अब उनमें से कई को लिस्ट में शामिल कर लिया गया है.

गोवा में ECINet और इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर्स की शक्तियों को लेकर विवाद चल रहा है. डिजिटल सिस्टम EROs को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं. अब गुरुवार को मुख्य चुनाव अधिकारी (CEO) ने कहा कि जिन 97 मतदाताओं को वोटर लिस्ट में शामिल होने के लिए योग्य पाया गया था, लेकिन फरवरी में जारी अंतिम लिस्ट में वे छूट गए थे, उनमें से कई को अब लिस्ट में शामिल कर लिया गया है, जबकि बाकी मामलों पर काम चल रहा है.
सोशल मीडिया पर प्रेस नोट शेयर करके इसकी जानकारी दी गई है. प्रेस नोट में, CEO ऑफिस ने कहा कि इन 97 मामलों पर बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLOs) ने घर-घर जाकर और फॉर्म 6 भरवाकर अलग से कार्रवाई की थी. ऑफिस ने कहा, "कई लोगों को अब लिस्ट में शामिल कर लिया गया है, जबकि बाकी मामलों पर काम चल रहा है." साथ ही यह भी दोहराया कि "किसी भी योग्य मतदाता को पीछे नहीं छोड़ा जाएगा."
क्यों छूट गए थे 97 मतदाता?
शुरुआत में, स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) के दौरान इन 97 मतदाताओं के मामलों में कुछ तार्किक विसंगतियां पाई गई थीं. दस्तावेज जमा करने और अपनी बात रखने का मौका दिए जाने के बाद, इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर्स (EROs) और असिस्टेंट EROs ने उन्हें लिस्ट में शामिल करने के लिए योग्य पाया.
इसके बाद गोवा के CEO ऑफिस ने चुनाव आयोग से 'रोलबैक' सुविधा (पहले की स्थिति में लौटने की सुविधा) मांगी थी, ताकि 21 फरवरी को अंतिम वोटर लिस्ट जारी होने से पहले इन नामों को फिर से जोड़ा जा सके. लेकिन यह सुविधा समय पर चालू नहीं हो पाई. चुनाव आयोग ने बाद में एक न्यूज चैनल को बताया कि ECINet में एक बार जब नाम हटाने के लिए फॉर्म 7 पर क्लिक कर दिया जाता है, तो उसके बाद 'रोलबैक' का कोई प्रावधान नहीं होता है.
गोवा CEO ऑफिस ने इस अपडेट से साफ कर दिया है कि इन 97 मतदाताओं को चुनावी प्रक्रिया से हमेशा के लिए बाहर नहीं किया गया था. हालांकि, इससे यह सवाल भी उठता है कि जब EROs ने मतदाताओं को योग्य मान लिया था, तो अंतिम लिस्ट जारी होने से पहले गोवा CEO ऑफिस के मांगी गई 'रोलबैक' सुविधा क्यों चालू नहीं की गई.
क्या है ECINet विवाद
गोवा का यह मामला ECINet और इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर्स की शक्तियों को लेकर चल रहे बड़े विवाद में एक अहम मुद्दा बन गया है. सवाल उठाए जा रहे हैं कि क्या यह डिजिटल सिस्टम EROs को वोटर लिस्ट से जुड़े फैसलों को पलटने का पर्याप्त अधिकार देता है या नहीं. चुनाव आयोग का कहना है कि EROs के पास अपनी कानूनी शक्तियां और ECINet तक "पूरी और बिना किसी रोक-टोक के पहुंच" बनी हुई है और ये प्लेटफॉर्म केवल काम को आसान बनाने वाला एक सिस्टम है. यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब दो चुनाव आयुक्तों ने डिजिटल वोटर लिस्ट सिस्टम और 'फॉर्म 6' से जुड़े बदलावों के कुछ पहलुओं पर आपत्ति जताई है.
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