Illegal Immigration: पहले भेजा नेपाल, फिर ग्रीस का प्लान, कैसे फर्जी वीजा के जरिए विदेश भेजे जा रहे लोग, बड़ा खुलासा
Fake Visa Racket : IGI एयरपोर्ट पर फर्जी वीजा रैकेट का खुलासा हुआ जहां ग्रीस का नकली वीजा बनवाकर लोगों को भेजा जा रहा था. पुलिस ने पश्चिम बंगाल के एक एजेंट को गिरफ्तार कर जांच तेज कर दी है.

Immigration Scam: आईजीआई एयरपोर्ट पुलिस ने एक बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा किया है, जिसमें पश्चिम बंगाल के एक एजेंट को गिरफ्तार किया गया है. ये एजेंट ग्रीस के फर्जी वीजा तैयार कर लोगों को विदेश भेजने का काम कर रहा था. आरोपी की पहचान संजीव कुमार राउत (37 वर्ष) के रूप में हुई है, जिसे पश्चिम बंगाल के हुगली से गिरफ्तार किया गया. पुलिस ने उसके खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.
ये मामला 16 फरवरी 2025 को सामने आया, जब पंजाब के होशियारपुर निवासी शरणजीत सिंह (20 वर्ष) आईजीआई एयरपोर्ट से ग्रीस जाने की योजना बना रहा था. उसे मिस्र के रास्ते ग्रीस पहुंचना था, लेकिन इमीग्रेशन जांच के दौरान उसके पासपोर्ट पर लगा ग्रीस का वीजा फर्जी पाया गया. जब मामले की गहराई से जांच की गई तो इस वीजा के पीछे एक एजेंट नेटवर्क का खुलासा हुआ.
ग्रीस जाने का सपना पड़ा भारी
पूछताछ में शरणजीत ने बताया कि उसके कुछ दोस्त ग्रीस में काम कर रहे थे, जिससे प्रेरित होकर उसने भी वहां जाने का फैसला किया. इसके लिए उसने एक एजेंट गौरा के जरिए संजीव कुमार राउत से संपर्क किया. संजीव ने उसे ग्रीस पहुंचाने के लिए 12.50 लाख रुपये की मांग की. इस रकम में से 11.50 लाख रुपये एचडीएफसी बैंक खाते में और 1 लाख रुपये दूसरे खाते में ट्रांसफर किए गए.
संजीव और उसके साथियों ने पहले शरणजीत को नेपाल भेजा ताकि उसकी ट्रैवल हिस्ट्री तैयार हो सके. फिर उसे ग्रीस का फर्जी वीजा दिलवाकर मिस्र के रास्ते भेजने की योजना बनाई गई, लेकिन इमीग्रेशन अधिकारियों ने उसकी साजिश पकड़ ली और उसे हिरासत में ले लिया.
पुलिस ने ऐसे पकड़ा मुख्य आरोपी
आईजीआई एयरपोर्ट थाना प्रभारी इंस्पेक्टर सुशील गोयल की अगुवाई में एक विशेष टीम बनाई गई जिसमें सब-इंस्पेक्टर प्रतिमा और हेड कांस्टेबल प्रवीन शामिल थे. तकनीकी निगरानी और खुफिया जानकारी के आधार पर टीम ने संजीव कुमार राउत को पश्चिम बंगाल के हुगली से गिरफ्तार किया.
फर्जी वीजा रैकेट का बड़ा खुलासा
पूछताछ में संजीव ने कबूल किया कि वह सिर्फ 12वीं तक पढ़ा है और पहले गुजरात में रहता था. 2014 में वह पश्चिम बंगाल चला गया और वहीं से फर्जी वीजा के धंधे में शामिल हो गया. उसने स्वीकार किया कि अब तक कई लोगों को इसी तरह विदेश भेजकर उनसे मोटी रकम वसूली है. संजीव ने ये भी कबूल किया कि उसने शरणजीत से 1 लाख रुपये अपने बैंक खाते में गूगल पे के जरिए लिए थे. पुलिस अब संजीव के बैंक खातों की जांच कर रही है और उसके बाकी साथियों की तलाश में जुटी है.
Source: IOCL






















