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Explained: जानिए- देश का संविधान किसे नागरिक मानता है, क्या हैं कानून और प्रक्रियाएं

Explained: कौन भारत का नागरिक हो सकता है और कौन नहीं इसको लेकर संविधान में साफ-साफ जिक्र है. आइए जानते हैं भारत का नागरिक होने के लिए क्या शर्त है.

नई दिल्ली: देश में एक बार फिर नेशनल रजिस्टर ऑफ़ सिटिजंस (एनआरसी) का मुद्दा गरमाया हुआ है. केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा है कि NRC देशभर में बिना धर्म को देखे लोगों को कवर करेगा. ऐसे में अगर देशभर में NRC लागू किया गया तो क्या होगा. कई लोगों के मन में यह सवाल फिलहाल बना हुआ है. साथ ही एक सवाल और जो लोगों के मन में है वह यह कि देश का नागरिक कौन हो सकता है. किसी के लिए देश का नागरिक होने के लिए क्या नियम है.

कोई किसी देश का नागरिक कैसे हो सकता है?

किसी भी व्यक्ति के लिए किसी देश का नागरिक होने की कुछ शर्ते होती हैं. इसको लेकर पूरी दुनिया में दो तरह की थ्योरी है. एक थ्योरी तो यह कहती है कि कोई भी व्यक्ति जिस देश में जन्म लेता है उसे वहां की नागरिकता मिल जाती है. ऐसा ही देश अमेरिका है जहां जन्म लेने वाले किसी भी बच्चे को वहां की नागरिकता मिल जाती है.

वहीं नागरिकता को लेकर दूसरी थ्योरी का संबंध जन्म से तो है लेकिन इसके साथ ही इससे भी है कि आपके पूर्वज कहां के थे. भारत का नागरिकता अधियनियम इसी दूसरी तरह की थ्योरी से जुड़ा है. इसमें बताया गया है कि किस-किस तरह के लोग भारत के नागरिक हो सकते हैं. दरअसल भारतीय संविधान में नागरिक की कोई परिभाषा नहीं दी गई है. हां इस बात को परिभाषित किया गया है कि देश का नागरिक कौन होगा. यहां ये भी बता दें कि देश के संविधान में नागरिकता कानून 26 नवंबर 1949 से लागू हो गया था जबकि संविधान 26 जनवरी 1950 से लागू हुआ था.

क्या कहता है संविधान, कौन है भारत का नागरिक

देश के संविधान का आर्टिकल पांच कहता है कि जिस वक्त से देश का संविधान वजूद में आया उसके बाद जो भी भारत में पैदा हुआ उसे देश का नागरिक माना जाएगा. साथ ही जिसके माता-पिता भारत में पैदा हुए हैं उसको भारत का नागरिक माना जाएगा. इसके साथ ही संविधान लागू होने से पांच साल पहले से जो शख्स भारत में रहता आया था उसको भी देश का नागरिक माना जाएगा.

आर्टिकल पांच में इस बात का तो जिक्र है कि किसको भारत का नागरिक माना जा सकता है लेकिन इसके साथ ही एक अन्य आर्टिकल जो कि आर्टिक 11 है उसके बारे में भी जान लेना जरूरी है. यह आर्टिकल देश की संसद को यह अधिकार देता है कि वह भविष्य के लिए नागरिकता संबंधित बातों को डिसाइड करे. इसी के तहत साल 1955 में नागरिकता अधिनियम  बना, जिसमें कई बार बाद में संशोधन किया गए.

नागरिकता अधिनियम 1955 के सेक्शन तीन

नागरिकता अधिनियम 1955 के अंतर्गत धारा 3, 4, 5(1) में बताया गया है कि कौन भारत का नागरिक हो सकता है. धारा तीन में नागरिकता को लेकर स्पष्ट तौर पर बताया गया है. इसमें साफ कहा है गया है कि जो भी व्यक्ति 26 जनवरी 1950 के बाद से  1 जुलाई 1987 के बीच पैदा हुआ वह भारत का नागरिक माना जाएगा. वहीं धारा चार कहता है कि जो भी व्यक्ति 1 जुलाई 1987 से 2 दिसंबर 2004 के बीच में पैदा हुआ और उसके माता-पिता में कोई एक भारत का नागिरक है तो ही बच्चे को भी देश की नागरिकता मिलेगी. यानी 1 जुलाई 1987 से 2 दिसंबर 2004 के बीच में पैदा होने वाले बच्चों के माता-पिता में किसी एक का भारतीय नागरिक होना आवश्यक है.

धारा 5(1) में कहा गया है कि जो भी लोग 2003 के बाद पैदा हुए उनको भारत की नागरिकता तभी मिलेगी जब उनके माता-पिता दोनों भारत के नागरिक हों. यहां संविधान में यह भी कहा गया है कि अगर कोई बच्चा साल 2003 के बाद पैदा हुआ है और उसके मां-बाप में कोई एक ही भारत का नागरिक है तो भी उसे नागरिकता मिल सकती है लेकिन इसकी शर्त यह होगी कि माता-पिता में जो भी भारत का नागरिक नहीं है वह इललीगल माइग्रेंट न हो.

पंजीकरण के आधार पर नागरिकता

भारतीय मूल का व्यक्ति नागरिकता अधिनियम, 1 955 की धारा 5 (1) (ए) के तहत भारतीय नागरिक के रूप में पंजीकरण करा सकता है. वह नागरिकता पंजीकरण के आधार पर हासिल कर सकता है. इसके लिए जरूरी है कि व्यक्ति भारतीय मूल का शख्स, जो देश में नागरिकता के लिए आवेदन देने के सात साल पहले तक रहा हो.

नागरिकता कैसे अमान्य हो जाती है? संशोधित नागरिकता अधिनियम, 1955 देश के किसी भी व्यक्ति को दो देशों की नागरिकता पाने का अधिकार नहीं देता. नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 9 में इसे खत्म करने का जिक्र भी है. प्रावधान के अनुसार, भारत का कोई भी नागरिक, जो पंजीकरण या रहने के आधार पर या अन्य कारण से किसी दूसरे देश की नागरिकता पा लेता है, तब उसकी पहले देश वाली नागरिकता को अमान्य घोषित कर दिया जाता है.

राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर और  रजिस्टर ऑफ़ सिटिज़नशिन में अंतर है 

रजिस्टर ऑफ़ सिटिज़नशिन और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर में अंतर होता है. रजिस्टर ऑफ़ सिटिज़नशिन एक ऐसी सूची है जिसमें उन सभी लोगों के नाम दर्ज होंगे जिनके अब 30 जून 1987  तक  या उसके पहले अपने परिवार के देश  में होने के सबूत मौजूद होंगे. वहीं राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर ( National Population Register- NPR ) के तहत भारतीय नागरिकों के बायोमेट्रिक और वंशावली का डेटा सितंबर 2020 में दर्ज किया जाएगा. NPR के तहत सामान्य निवासी को एक ऐसे व्यक्ति के रूप में परिभाषित किया जाता है जो स्थानीय क्षेत्र में छह महीने या उससे अधिक समय के लिये निवास कर रहा हो या एक व्यक्ति जो उस क्षेत्र में अगले छह महीने या उससे अधिक समय तक निवास करने की इच्छा रखता हो. अब साल 2020 में राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर तैयार किया जाएगा.

भारतीय नागरिकता साबित करने के लिए किन दस्तावेजों की जरूरत होगी

भारतीय नागरिकता साबित करने के लिए आपके पास निम्नलिखित दस्तावेज होने चाहिए

1. 1951 का एनआरसी 2. 1 जुलाई 1987 तक का मतदाता सूची में नाम 3. जमीन का मालिकाना हक या किरायेदार होने का रिकॉर्ड 4. नागरिकता प्रमाणपत्र 5. स्थायी निवासी प्रमाण पत्र 6. शरणार्थी पंजीकरण प्रमाण पत्र 7. किसी भी सरकारी प्राधिकरण द्वारा जारी लाइसेंस/सर्टिफिकेट 8. सरकार या सरकारी उपक्रम के तहत सेवा या नियुक्ति को प्रमाणिक करने वाला दस्तावेज 7. बैंक या पोस्ट ऑफिस अकाउंट 8. जन्म प्रमाणपत्र 9. राज्य के एजुकेशन बोर्ड या यूनिवर्सिटी के प्रमाण पत्र 10. अदालत के आदेश रिकॉर्ड 11. पासपोर्ट 12. कोई भी एलआईसी पॉलिसी

अब असम के लोगों के लिए ऊपर दिए गए दस्तावेजों में से कोई भी 24 मार्च 1971 के बाद का नहीं होना चाहिए. अगर असम के किसी नागरिक के पास इस डेट से पहले का दस्तावेज नहीं है तो 24 मार्च 1971 से पहले का अपने पिता या दादा का डॉक्यूमेंट दिखा सकता है. इसके लिए उन्हें लिस्ट बी डॉक्यूमेंट में साबित करना होगा. लिस्ट बी में इन दस्तावजों का जिक्र है

1. जन्म प्रमाणपत्र 2. भूमि दस्तावेज 3.बोर्ड या विश्वविद्यालय प्रमाण पत्र 4. बैंक / एलआईसी / पोस्ट ऑफिस रिकॉर्ड 5. राशन कार्ड 6. मतदाता सूची में नाम 7. कानूनी रूप से स्वीकार्य अन्य दस्तावेज 8. विवाहित महिलाओं के केस में सर्कल अधिकारी या ग्राम पंचायत सचिव द्वारा दिया गया प्रमाण पत्र

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