12 मई को चुनाव आयोग ने बुलाई सभी दलों की बैठक, इन पांच मुद्दों पर होगी चर्चा

नई दिल्ली: ईवीएम पर शुरू हुआ विवाद अभी थमने का नाम नहीं ले रहा है, दिल्ली विधानसभा में ईवीएम जैसी दिखने वाली मशीन से छेड़छाड़ कर दिखाने वाले आप के विधायक सौरभ भारद्वाज के दावों को चुनाव आयोग ने खारिज कर दिया पर सौरभ अभी भी अपने दावे पर डटे हुए हैं. ईवीएम विवादों के बीच 12 मई को चुनाव आयोग ने क्षेत्रीय और राष्ट्रीय पार्टियों के साथ एक बैठक बुलाई है, इस मीटिंग के लिए चुनाव आयोग ने पांच मुद्दे रखे हैं.
पहला- चुनाव में रिश्वतखोरी को सजा वाले अपराध की श्रेणी में लाने का प्रस्ताव
दूसरा- मतदाताओं को पैसे देकर वोट खरीदने के मामले में नया कानून बनाने का प्रस्ताव
तीसरा- चुनाव में रिश्वतखोरी का दोषी पाए जाने पर उम्मीदवारी रद्द करने का प्रस्ताव
चौथा- राजनीतिक पार्टियों को मिलने वाले चंदे में और ज्यादा पारदर्शिता का प्रस्ताव
पांचवां- EVM के साथ VVPAT को जोड़कर मतदान में पारदर्शिता बढ़ाने का प्रस्ताव
VVPAT को लेकर क्या है स्थिति? चुनाव आयोग ने सरकार से कहा था कि अगर फरवरी 2017 तक VVPAT मशीनों का ऑर्डर नहीं दिया गया तो 2019 में होने वाला लोकसभा चुनाव इन मशीनों के बगैर ही करना पड़ेगा.
क्या है VVPAT मशीन ? VVPAT मशीन का पूरा नाम Voter Verified Paper Audit Trail है. ये एक खास किस्म की मशीन है जिसे ईवीएम के साथ अटैच किया जाता है. इसके जरिए वोटर को उसके वोट का फीडबैक दिया है कि पार्टी या उम्मीदवार को उसने वोट दिया, उसी को वोट गया है या नहीं.
वोट डालने के बाद इसमें से एक पर्ची निकलती है. इस पर्ची पर सीरियल नंबर, नाम और उस कैंडिडेट का इलेक्शन सिम्बल होता है, जिसे वोटर ने वोट दिया है. यह पर्ची सिर्फ 7 सेकेंड के लिए दिखती है, इसके बाद मशीन में लगे बॉक्स में चली जाती है. वोटों की गिनती के वक्त अगर ईवीएम खराब हो जाए या दोबारा वोटों की गिनती की जरूरत हो तो इन्हीं पर्चियों के ज़रिए दोबारा गिनती की जा सकती है.
2019 में इस्तेमाल होगी VVPAT, सरकार ने दिए 16 लाख करोड़ ईवीएम और VVPAT मशीनों को भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, बेंगलूरु और इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया, हैदराबाद में बनाया जाता है. कैबिनेट ने VVPAT मशीनों की खरीद के लिए 3174 करोड़ रूपए की मंजूरी दे दी है, चुनाव आयोग को करीब 16 लाख 15 हजार VVPAT मशीनें खरीदनी हैं.
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