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ED Raids: 2004 से 2014 तक चलाए 112 सर्च ऑपरेशन, अगले 8 सालों में आया रेड का तूफान, संख्‍या 3 हजार पार, जानें कितने विपक्षी आए लपेटे में

Enforcement Directorate Searches: साल 2014 से जुलाई 2022 तक कांग्रेस के 80 नेता रेड के निशाने पर आए. कांग्रेस के बाद सबसे ज्‍यादा रेड ममता बनर्जी की पार्टी के नेताओं पर पड़ी.

ED Raids 2004 To 2014: प्रवर्तन निदेशालय (ED) रेड, इनकम  (IT) रेड. केंद्र सरकारों की एजेंसियों की छापेमारी पर सियासी संग्राम छिड़ा हुआ है. ताजा मामला रायपुर में ईडी रेड का है. जहां कांग्रेस के महाधिवेशन से तीन दिन पहले छापेमारी की गई.       

ED ने सोमवार (20 फरवरी 2023) को कांग्रेस नेताओं समेत कुल 13 लोगों के परिसरों पर छापेमारी की. मामला कथित कोयला लेवी घोटाले से जुड़ा है. दूसरी ओर कांग्रेस इस छापेमारी को सिर्फ और सिर्फ सियासत से जुड़ा बता रही है. कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने तो यहां तक कह डाला कि हम डरने या झुकने वाले नहीं है. 2024 आने वाला है... मौसम बदलने वाला है. 

मल्लिकार्जुन खरगे भी जमकर बरसे. उन्‍होंने दावा किया कि बीते 9 सालों में 95 प्रतिशत छापे सिर्फ विपक्षी नेताओं पर मारे गए, इनमें भी सबसे ज्‍यादा कांग्रेस के ही नेता है. खरगे ने चुनौती देते हुए कहा, 'मोदी जी रत्‍ती भर भी ईमानदारी है तो अपने सबसे अच्‍छे दोस्‍त के बड़े घोटालों पर छापा मारो. यह बीजेपी की कायरता है... भारत जोड़ो यात्रा की अपार सफलता से बीजेपी बेचैन है.'

कांग्रेस के इस वार पर पलटवार करने के लिए बीजेपी की ओर से छत्‍तीसगढ़ के पूर्व सीएम रमन सिंह ने मोर्चा संभाला. उन्‍होंने कहा, '4 साल कोयले की दलाली खाओगे तो ईडी नहीं तो क्‍या भारत रत्‍न देने आएंगे.'   

बहरहाल, बीजेपी और कांग्रेस के अपने-अपने दावों के बीच सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि रायपुर में ईडी ने किन-किन नेताओं के यहां छापा मारा? इनके नाम हैं- छत्‍तीसगढ़ कांग्रेस कमेटी के कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल, कांग्रेस के मीडिया प्रवक्ता आरपी सिंह, श्रम कल्याण मंडल अध्यक्ष सुशील सन्नी अग्रवाल, विधायक देवेंद्र यादव और विनोद तिवारी. 

कितने विपक्षी नेता आए रडार पर 

ये तो हुई नेताओं की बात. अब बात करते हैं रेड से जुड़े कुछ आंकड़ों की. ये डेटा है एनडीटीवी की रिपोर्ट का, जिसमें साल 2014 से जुलाई 2022 तक मारे गए छापों की पूरी डिटेल है. महत्‍वपूर्ण बात यह भी है कि यह डेटा केंद्रीय एजेंसियों की ओर से की गई उन्‍हीं रेड का है, जो विपक्षी दलों या आलोचकों पर मारी गई हैं:    
 
साल 2014 में मोदी सरकार के केंद्र में आने के बाद से जुलाई 2022 तक कुल 648 ऐसी रेड मारी गईं जिनके निशाने पर विरोधी थे. विपक्षी नेता या आलोचकों पर इन आठ सालों में कुल मिलाकर 648 रेड मारी गईं, इनमें से 466 ऐसे छापे उन लोगों पर मारे गए जो कि सीधे तौर पर बीजेपी के विरोधी हैं या उनके रिश्‍तेदार हैं. 

कांग्रेस के बाद टीएमसी पर सबसे ज्‍यादा रेड 

2014 से जुलाई 2022 तक के आंकड़े देखें तो कांग्रेस के 80 नेता रेड के निशाने पर आए. कांग्रेस के बाद सबसे ज्‍यादा रेड ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के नेताओं के यहां पड़ी. टीएमसी के 41 नेताओं के यहां रेड हुई. तीसरे नंबर पर महबूबा मुफ्ती की पार्टी पीपुल्‍स डेमोक्रेटिक (पीडीपी) और चौथे नंबर पर अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी (आप) के नेताओं पर रेड हुईं.  ‍  
     
2014 से 2022 तक ईडी ने 99,356 करोड़ की संपत्ति अटैच की 

अब एक और आंकड़े पर गौर करिए: जुलाई 2022 में मिनिस्‍टर ऑफ स्‍टेट फॉर फायनेंस पंकज चौधरी ने राज्‍य सभा में लिखित जवाब देकर बताया कि 2014 से 2022 तक अकेले ईडी ने 3010 रेड मारीं. इसे अगर 2004 से 2014 तक मारी गई रेड से कम्‍पेयर किया जाए तो यह 27 गुना ज्‍यादा है. 2004 से 2014 ईडी ने सिर्फ 112 सर्च ऑपरेशन चलाए. 

  • ध्‍यान रहे कि प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्‍ट  (PMLA) 2002 में लाया गया और इसे 1 जुलाई 2005 में लागू किया गया.    
  • PMLA लागू होने के बाद 9 सालों में ईडी ने कुल 112 सर्च ऑपरेशन किए और 5,346.16 की संपत्ति अटैच की गई. अब 2014 से 2022-2022 तक के आंकड़े पर गौर करें. इस दौरान ईडी ने कुल 3,010 सर्च ऑपरेशन चलाए. इन छापों के दौरान ईडी ने  99,356 करोड़ की संपत्ति अटैच की.          
  • एनडीए-2 यानी 2019 से अब तक के आंकड़े देखें तो ईडी के एक्‍शन के दायरे में एक सीएम, 14 पूर्व सीएम, 19 मंत्री, 24 सांसद, 21 विधायक, 11 पूर्व विधायक और 7 पूर्व सांसद आए. इनमें 19 गिरफ्तार हुए और 32 के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई. ईडी के निशाने पर आने वाले ये सभी लोग विपक्ष पार्टियों से ही हैं. (यह डेटा इंडियन एक्‍सप्रेस की रिपोर्ट से लिया गया है)           
  • यूपीए के कार्यकाल की बात करें तो इस दौरान विपक्ष के 2 पूर्व सीएम, 3 मंत्री, 3 सांसद, 0 विधायक, 0 पूर्व विधायक और 0 पूर्व सांसद ईडी के निशाने पर आए यानी इनके यहां सर्च ऑपरेशन हुए. यूपीए के कार्यकाल के दौरान ईडी ने अरेस्‍ट- 0 किया, चार्जशीट 9 हुईं और 3 दोषी पाए गए. (यह डेटा इंडियन एक्‍सप्रेस की रिपोर्ट से लिया गया है)           
  • पार्टियों के हिसाब से बात करें तो एनडीए के कार्यकाल में बीजेपी और उसके सहयोगियों के कुल 6 नेता ईडी के निशाने पर आए. कांग्रेस के 24, टीएमसी 19, एनसीपी, 11, शिवसेना 8, डीएमके 6, बीजेडी 6, आरजेडी 5, बीएसपी 5, सपा 5, टीडीपी 5, आम आदमी पार्टी 3, आईएनएलडी 3, वाईएसआरपी 3, सीपीआईएम 2, एनसी 2, पीडीपी 2, निर्दलीय 2, एआईएडीएमके 1, एमएनएस 1, एसबीएसबी 1 टीआरएस का 1 नेता ईडी के निशाने पर आ गया.

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योगेंद्र कुमार बीते 20 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्यरत हैं और राष्‍ट्रीय-अंतरराष्‍ट्रीय विषयों पर लिखने और पढ़ने में गहरी रुचि रखते हैं. खबरों की दुनिया के अलावा क्रिकेट और फिल्‍मों में खास दिलचस्‍पी है.
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