Explained: EC का 17 राज्यों/UTs में SSR का आदेश, जानिए यह SIR से कितना अलग और क्यों है अहम
SSR और SIR दोनों ही प्रक्रियाओं का अंतिम उद्देश्य मतदाता सूची को निष्पक्ष, पारदर्शी और गलतियों से मुक्त बनाना है ताकि लोकतांत्रिक शुचिता बनी रहे.

भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने देश के 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूचियों के अपडेट के लिए वार्षिक 'विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण' (स्पेशल समरी रिविजन SSR) शुरू करने का औपचारिक ऐलान किया है. यह एक नियमित प्रशासनिक और वैधानिक प्रक्रिया है. हालांकि, हाल के दिनों में देश के कुछ हिस्सों में SIR की प्रक्रिया और उसे लेकर जारी राजनीतिक और सार्वजनिक चर्चाओं के बीच, नागरिकों के मन में इन दोनों प्रक्रियाओं को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है.
हालांकि, SSR और SIR दोनों ही प्रक्रियाओं का अंतिम उद्देश्य मतदाता सूची को निष्पक्ष, पारदर्शी और गलतियों से मुक्त बनाना है ताकि लोकतांत्रिक शुचिता बनी रहे. लेकिन इनके कार्यक्षेत्र, काम करने के तरीके, दस्तावेजी आवश्यकताओं और आम जनता पर पड़ने वाले प्रभाव के लिहाज से दोनों में ज़मीन-आसमान का अंतर है.
आइए विस्तार से समझते हैं कि SSR और SIR में क्या अंतर है, इनकी कार्यप्रणाली क्या है और चुनाव आयोग इस दोहरी व्यवस्था का उपयोग क्यों करता है.
क्या है विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण ( SSR)
'विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण' (SSR) एक नियमित और वार्षिक वैधानिक प्रक्रिया है, जिसे चुनाव आयोग हर साल आने वाले कैलेंडर वर्ष की 1 जनवरी को ध्यान में रखते हुए आयोजित करता है. इस प्रक्रिया में पहले से मौजूद मतदाता सूची को ही आधार माना जाता है. यदि आपका नाम मतदाता सूची में पहले से दर्ज है, तो वह स्वतः ही बना रहता है, जब तक कि उसे हटाने के लिए कोई वैध आपत्ति या आवेदन न आए.
प्रक्रिया की शुरुआत में सभी पोलिंग बूथों और चुनाव कार्यालयों में ड्राफ्ट रोल (ड्राफ्ट मतदाता सूची) प्रकाशित किया जाता है. इसके बाद एक निश्चित समय-सीमा (जैसे 30 दिन) के भीतर नागरिकों से दावे और आपत्तियां आमंत्रित की जाती हैं.
जो युवा 1 जनवरी तक 18 वर्ष के हो रहे हैं, वे नए पंजीकरण (फॉर्म 6) के लिए आवेदन कर सकते हैं. इसके अलावा, मौजूदा मतदाता अपने पते, नाम या अन्य जनसांख्यिकीय विवरणों में सुधार (फॉर्म 8) या मृत/स्थान स्थानांतरित रिश्तेदारों के नाम हटवाने (फॉर्म 7) के लिए आवेदन करते हैं.
इसमें प्रक्रिया मुख्य रूप से नागरिकों द्वारा दिए गए आवेदनों और बीएलओ (BLO) द्वारा घर-घर जाकर किए जाने वाले नियमित भौतिक सत्यापन पर निर्भर करती है.
क्या है विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR)
सामान्य या संक्षिप्त पुनरीक्षण के विपरीत, 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) एक अत्यधिक व्यापक, गहन और जमीनी स्तर पर बड़े पैमाने पर चलाई जाने वाली सत्यापन प्रक्रिया है. SIR में पुरानी या मौजूदा मतदाता सूची को सीधे आधार नहीं माना जाता. इसके बजाय पूरी मतदाता सूची का नए सिरे से भौतिक और पूर्ण सत्यापन किया जाता है.
फील्ड अधिकारी और टीम लक्षित क्षेत्र के प्रत्येक घर में व्यक्तिगत रूप से जाती हैं. वहां रहने वाले हर नागरिक को अपनी पात्रता, आयु, निवास और पहचान साबित करनी होती है.
इस प्रक्रिया में पुरानी सूची को महज अपडेट करने के बजाय एक तरह से नए सिरे से पूरा वोटर रजिस्टर तैयार किया जाता है.
दस्तावेज़ संबंधी आवश्यकताएं और सामाजिक प्रभाव
दोनों प्रक्रियाओं में सबसे बड़ा अंतर प्रशासनिक तेजी और 'बर्डन ऑफ प्रूफ' का है. संक्षिप्त पुनरीक्षण (SSR) का ढांचा नागरिकों के लिए बेहद सहज और कम परेशानी वाला है. अगर किसी मतदाता के विवरण में कोई बदलाव नहीं है, तो उसे बिना किसी कागजी प्रक्रिया के सूची में बनाए रखा जाता है.
इसके विपरीत, गहन पुनरीक्षण (SIR) में साक्ष्य का भार पूरी तरह से नागरिक पर आ जाता है. प्रत्येक व्यक्ति को अपनी मतदान स्थिति बनाए रखने के लिए विशिष्ट दस्तावेज प्रस्तुत करने पड़ते हैं.
इसी वजह से, SIR लागू होने पर अक्सर नागरिक समाज समूहों और राजनीतिक दलों द्वारा यह चिंता जताई जाती है कि इससे गरीब, अनपढ़ या हाशिए पर रहने वाले समुदायों के लोग मतदाता सूची से बाहर हो सकते हैं, क्योंकि उनके पास अक्सर औपचारिक या पुराने पहचान पत्र उपलब्ध नहीं होते हैं.
ECI क्यों बनाए रखता है यह दोहरी पुनरीक्षण व्यवस्था?
चुनाव आयोग देश की विविधता और अलग-अलग क्षेत्रों की प्रशासनिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए इन दोनों व्यवस्थाओं (SSR और SIR) का संतुलित उपयोग करता है
SSR की आवश्यकता: यह सुनिश्चित करता है कि देश भर में मतदाता सूची लगातार और बिना किसी बड़ी बाधा के अपडेट होती रहे. इससे आयोग को कम से कम जनशक्ति और संसाधनों के साथ पूरे देश में नियमित चुनाव तैयारियां बनाए रखने में मदद मिलती है.
SIR की आवश्यकता: चुनाव आयोग गहन पुनरीक्षण (SIR) का सहारा केवल तब लेता है जब किसी विशिष्ट क्षेत्र में बड़े पैमाने पर जनसांख्यिकीय बदलाव हुए हों, अवैध प्रवासन या तीव्र शहरीकरण के कारण पुरानी सूचियों में भारी त्रुटियों की आशंका हो, या फिर परिसीमन के बाद निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं में व्यापक बदलाव हुआ हो.
17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में आयोजित किया जा रहा 'विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण' (SSR) चुनाव आयोग का एक मानक और सुचारू प्रशासनिक कदम है, जिसका उद्देश्य आगामी चुनावों के लिए एक स्वच्छ और अपडेटेड मतदाता सूची तैयार करना है. यह प्रक्रिया आम नागरिकों को बिना किसी परेशानी के अपना नाम जोड़ने, सुधारने या जांचने का अवसर देती है.





















