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लाखों की भीड़ का सत्कार और अरबों डॉलर के सौदों से झोली भर रवाना हुए ट्रंप

ट्रंप के भारत की वो कौन सी अपेक्षाएं थी और उनमें से कितनी पूरी हुई? बहरहाल इस सवाल के जवाब बीते 36 घंटों में राष्ट्रपति ट्रंप औऱ प्रधानमंत्री के बयानों, पर्दे के पीछे चली कवायदों के बाद नतीजे की शक्ल में सामने आए समझौतों व साझा बयानों में नजर आते हैं.

नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप कारोबारी हैं. लिहाजा आंकड़ों की भाषा और नफे-नुकसान की इबारत पढ़ना बखूबी जानते हैं. भारत में अपने फायदे का सौदा देख ट्रंप अपने परिवार और पूरे लाव लश्कर के साथ 24 फरवरी की दोपहर भारत पहुंचे. वहीं करीब 35 घंटे बाद उनके विमान ने राजधानी दिल्ली के वायुसेना अड्डे से उड़ान भरी तो उनके पास अहमदाबाद के मोटेरा स्टेडियम में एक लाख लोगों से ज्यादा की भीड़ के साथ किसी अमेरिकी राष्ट्रपति के अब तक के सबसे भव्य स्वागत की तस्वीरें थीं. तो साथ ही थे 3 अरब डॉलर से ज्यादा के रक्षा खरीद सौदों समेत कई करार.

ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर भारत के खाते में अमेरिकी राष्ट्रपति के इस दौरे का हासिल क्या है? इसी बात को दूसरे शब्दों में कहा जाए तो, ट्रंप के भारत की वो कौन सी अपेक्षाएं थी और उनमें से कितनी पूरी हुई? बहरहाल इस सवाल के जवाब बीते 36 घंटों में राष्ट्रपति ट्रंप औऱ प्रधानमंत्री के बयानों, पर्दे के पीछे चली कवायदों के बाद नतीजे की शक्ल में सामने आए समझौतों व साझा बयानों में नजर आते हैं.

हालांकि जाहिर है, दो मुल्कों और दो नेताओं के बीच साझेदारी के तार तभी जुड़ते हैं जब दोनों के हित मिलते हों. बीते दो दशकों के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपतियों की भारत यात्राओं का सिलसिला बताता है कि किस तरह अमेरिका को भारत की अहमियत समझ आने लगी है. वहीं गत आठ महीनों के दौरान छठी बार राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी की मुलाकात ने यह जताने में कोई कसर नहीं छोड़ी की दोनों नेताओं का एक-दूसरे से जुड़ाव काफी अच्छा है.

राजनीतिक फायदा अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की भारत यात्रा मेहमना औऱ मेजबान दोनों के लिए फायदे का सौदा साबित हुई. अमेरिका में महाभियोग की परीक्षा पास करने के बाद और अपने चुनावी इम्तिहान से पहले राष्ट्रपति ट्रंप की भारत यात्रा ने उन्हें अपना ग्राफ बढ़ाने का मौका दिया. अहमदाबाद के रोड शो और मोटेरा क्रिकेट स्टेडियम में अभूतपूर्व भीड़ के साथ आयोजित नसस्ते ट्रंप कार्यक्रम ने ट्रंप को एक ऐसा अमेरिकी राष्ट्रपति बना दिया जिसके स्वागत में विदेशी धरती पर अब तक का सबसे बड़ा स्वागत समारोह हुआ. अहमदाबाद और आगरा में अपनी अगवानी के लिए उमड़ी भीड़ को देख ट्रंप भी कुछ देर को गिनती भूल गए होंगे.जाहिर है, दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत में उमड़ी भीड़ की तस्वीरों का इस्तेमाल अमेरिकी मतदाताओं को लुभाने में भी काम आएगी.

राष्ट्रपति ट्रंप के इस दौरे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राजनीति को भी ताकत का टॉनिक दे दिया. अहमदाबाद का नमस्ते ट्रंप कार्यक्रम हो या फिर दिल्ली में मिडिया कैमरों के आगे पत्रकारों के आगे हुआ ट्रंप का संवाद, अमेरिकी राष्ट्रपति ने भारतीय प्रधानमंत्री की तारीफों के पुल बांधने में कोई कसर नहीं छोड़ी। ट्रंप ने मोदी के लिए मेहनती, लगनशील, सख्त, जैसे कई विशेषताओं से नवाजा. इसके अलावा ट्रंप ने दिल्ली की हिंसा औऱ भारत के नागरिकता संशोधन कानून पर भी कोई टि्पणी करने से साफ पल्ला झाड़ लिया. स्वाभाविक तौर पर यह पीएम मोदी के लिए काफी राहत की बात थी. इतना ही नहीं मोदी सरकार के राज में अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत में आलोचना करने वाले सुरों को भी ट्रंप ने करारा जवाब भारतीय जमीन. ही दे दिया.

आर्थिक नफा-नुकसान

सीधे आर्थिक फायदे के लिहाज से अमेरिकी राष्ट्रपति का यह दौरा यूं तो भारत को सीधे कोई तोहफा नहीं दे गया. लेकिन ऐसे कई प्रावधानों पर दोनों देशों के बीच सहमति बनी है जिनके चलते भारत में निवेश संभावनाएं बढ़ाने में मदद मिलेगी. राष्ट्रपति ट्रंप और पीएम मोदी के बीच हुई बातचीत के बाद जारी साझा बयान के मुताबिक अमेरिका का अंतरराष्ट्रीय विकास वित्त निगम भारत में अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं के लिए 60 करोड़ डॉलर की राशि उपलब्ध कराएगा. इसके अलावा अमेरिकी संस्था यूएसएड भारत की डेवलपमेंट पार्टनरशिप असिसटेंट के साथ मिलकर किसी तीसरे देश में भी परियोजनाएं चलाएंगे.

भारत औऱ अमेरिका ने व्यापक व्यापार समझौता करने के लिए कानूनी आधार के साथ बातचीत शुरु करने का फैसला लिया. इसका ऐलान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच हुई बातचीत के बाद किया गया. दोनों देशों ने व्यापक समझौता होने तक ट्रेड को लेकर चल रही मौजूदा बातचीत के जल्द पूरा करने और उसे पहली सीढ़ी के तौर पर बनाने का फैसला किया है. महत्वपूर्ण है कि भारत और अमेरिका के बीच कारोबार समझौते के लिए बातचीत चल रही है. मगर कारोबार की अपनी-अपनी चिंताओं के कारण मामला बीते कई महीने से कवायद चल रही. मगर नतीजा नहीं निकल पा रहा है. इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति ने कई बार इस बात का जिक्र किया कि भारत एक ऐसा मुल्क है जो बहुत ज्यादा आयात शुल्क लगाता है. वहीं भारतीय खेमे की दलील है कि एक विकासशील देश होने के नाते भारत की अपनी कई चिंताएं हैं. फिर भी भारत अमेरिकी उत्पादों पर जर्मनी, जापान और कोरिया जैसे उन देशों से ज्यादा शुल्क नहीं वसूलता है जिनके साथ अमेरिका का कारोबार काफी ज्यादा है.

हालांकि 150 अरब डॉलर से अधिक मूल्य और बड़े दायरे में व्यापार विस्तार वाले भारत और अमेरिका जैसे सहयोगियों के बीच कोई व्यापक कारोबार समझौता ही अपने आप में काफी लंबी प्रक्रिया है। ऐसे में आश्चर्य नहीं होना चाहिए कि इस तरह के समझौते के लिए अभी काफी इंतजार करना पड़े.

सैन्य और सामरिक फायदा रक्षा और सामरिक साझेदारी भारत और अमेरिका के रिश्तों का सबसे मजबूत स्तंभ है. विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रिंगला के मुताबिक बीते पांच सालों के दौरान भारत ने अमेरिका से करीब 9 अरब डॉलर से ज्यादा मूल्य का सैन्य साजो-सामान खरीदा है.

राष्ट्रपति ट्रंप की यात्रा के दौरान भारत ने अमेरिका से 30 नए सैन्य हैलिकॉप्टर खरीद के समझौते पर मुहर लगाई.तीन अरब डॉलर के समझौते के तहत भारत को जहां 24 MH60 रोमियो हेलिकॉप्टर हासिल होंगे. वहीं भारतीय सेना की एविएशन विंग के लिए 6 अपाचे लड़ाकू हेलिकॉप्टर मिल सकेंगे. इसके अलावा अमेरिका ने भारत के रक्षा उत्पादन उद्योग के मजबूत करने के लिए अपनी ग्लोबल डिफेंस सप्लाई चेन में अधिक जगह देने का भी भरोसा दिया गया है.

भारत और अमेरिका ने बेसिक एक्सचेंज एंड कोऑपरेशन एग्रीमेंट (बीईसीए) को जल्द पूरा करने पर भी रजांदी जताई है. बीईसीए उन मूलभूत समझौतों का हिस्सा है जिनके पूरा होने के बाद अमेरिका अपने किसी भी सहयोगी मुल्क के साथ उन्नत सैन्य तकनीक साझा कर सकता है. बीईसीए के बाद अमेरिका से भारत के लिए उन्नत ड्रोन व मिसाइल तकनीक हासिल करना आसान हो जाएगा.

आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में साझेदारी

पाकिस्तान के खिलाफ सख्ती तो छोड़िए, अमेरिकी राष्ट्रपति कोई सख्त बयान देने से भी कतराते नजर आए. उन्होंने एक से अधिक बार इस बात का जिक्र किया कि पाकिस्तान के साथ अमेरिका काफी सकारात्मक तरीके से संपर्क में है. ताकि आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके। जाहिर है पाकिस्तान पर यह नरमी भारत में कई लोगों को जरा कम रास आई.

पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच बातचीत के बाद जारी बयान में अमेरिका और भारत ने पाकिस्तान से आतंकियों के खिलाफ सतत कदम उठाने और अलकायदा, लश्कर-ए-तोयबा, जैश-ए-मोहम्मद, डी-कंपनी जैसे संगठनों के खिलाफ लगातार कार्रवाई करने को कहा.

दोनों मुल्कों के बीच बंद कमरों में हुई बातचीत के बाद सामने आए फैसलों के मुताबिक भारत और अमेरिका होमलैंड सिक्योरिटी में साझेदारी बढ़ाएंगे. इस कड़ी में भारत और अमेरिका आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई, सूचनाओं की साझेदारी और क्षमता विकास में सहयोग करेंगे. इसके अलावा आतंकियों को आर्थिक रसद मुहैया कराने वाले नशीली दवाओं और ड्रग्स के कारोबार पर काबू के लिए भारत और अमेरिका आपसी सहयोगा का एक नया तंत्र भी बनाएंगे.

वैसे, मीडिया से बातचीत में राष्ट्रपति ट्रंप यह कहना नहीं भूले कि प्रधानमंत्री मोदी एक मजबूत नेता हैं और वो आतंकवाद के मुद्दे को खुद ही संभाल सकते हैं.

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