मुंबईः किसान मोर्चे ने की सीएम से मुलाकातः देवेंद्र फडणवीस बोले-आदिवासी किसानों की सभी मांगें मानी गई
आज आदिवासी किसानों के मोर्चे के प्रतिनिधि मंडल ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की जिसके बाद सरकार ने आश्वासन दिया है कि प्रतिनिधिमंडल और मुख्यमंत्री के बीच बातचीत सकारात्मक निकली. अगले 3 महीने में लंबित पड़े मामलों पर सरकार फैसला लेगी.

नई दिल्लीः महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बयान दिया है कि आदिवासी किसानों की मांगों पर लिखित स्वरूप में आश्वासन दिया गया है. वहीं पिछले मोर्चे के दौरान जो मांगें थी उन मांगों पर भी काम लगभग पूरा हो चुका है. आदिवासी किसानों की सभी मांगों को मान्य कर लिया गया है.
इसके बाद आज आदिवासी किसानों के मोर्चे के प्रतिनिधि मंडल ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की जिसके बाद सरकार ने आश्वासन दिया है कि प्रतिनिधिमंडल और मुख्यमंत्री के बीच बातचीत सकारात्मक निकली. अगले 3 महीने में लंबित पड़े मामलों पर सरकार फैसला लेगी, आदिवासी और गैर आदिवासी समाज के तीन पीढ़ियों के रहने के दस्तावेज जमा करने की शर्त रद्द किया जाए इस विषय पर राज्य सरकार केंद्र सरकार से सिफारिश करेगी. जंगल की जमीन आदिवासियों को देने के मामले में 80 फीसदी दावे सरकार ने नकार दिए थे इस पर सरकार पुनर्विचार करेगी.
महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की सरकार के खिलाफ आज किसानों ने हल्ला बोला. किसानों ने आज मुंबई के आजाद मैदान में इक्कठा होकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया. किसानों की मांग थी कि आदिवासियों की जमीन के मसले को सुलझाया जाए. साथ ही लोड शेडिंग की समस्या, वनाधिकार कानून, सूखे से राहत, न्यूनतन समर्थन मूल्य, स्वामीनाथ रिपोर्ट को जल्द से जल्द लागू किया जाए.
महाराष्ट्र सरकार की तरफ से कहा गया है कि वन्य जमीन के सभी दावेदारों के नाम एक ही दस्तावेज पर ना होकर सभी दावेदारों को अलग अलग दस्तावेज दिए जाएंगे. वन्य अधिकार नियम को लागू करने के लिए आदिवासी गांव के 50 फ़ीसदी लोगों की उपस्थिति जरूरी थी अब इसे गांव की जगह पर बड़े क्षेत्र (गांव के अतिरिक्त गांव का हिस्सा भी) को भी ध्यान में रखा जाएगा.
गढ़चिरौली और चंद्रपुर जिले के 50 गांव में 25 से 30000 बंगाली शरणार्थी हैं. जिस तरह से सिंधी शरणार्थियों को पुनर्वासन किया गया उसी प्रकार से बंगाली शरणार्थियों का भी उसी नियम के अनुसार पुनर्वसन किया जाएगा. आदिवासियों की जमीन के किसानों को सूखाग्रस्त लोगों को मिलने वाली सभी सहूलियत उपलब्ध कराने पर सरकार फैसला लेगी. आदिवासियों की खेती के लिए सरकार द्वारा अनुदान पर फैसला लिया गया है.
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