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एलजी का इस हद तक दखल सही नहीं कि रोज़मर्रा का काम प्रभावित होने लगे: सुप्रीम कोर्ट
कोर्ट ने माना कि दिल्ली के लोगों को शासन से फायदा मिलना चाहिए. अधिकारों को लेकर खींचतान दिल्ली के हित में नहीं है.

नई दिल्ली: 'एलजी का इस हद तक दखल सही नहीं कि रोज़मर्रा का काम प्रभावित होने लगे.' केंद्र-दिल्ली अधिकार विवाद की सुनवाई के दूसरे दिन आज सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ की ये टिप्पणी दिल्ली सरकार को थोड़ी राहत देने वाली रही. पहले दिन कोर्ट ने कहा था कि पहली नज़र में उपराज्यपाल ही दिल्ली के प्रमुख नज़र आते हैं. लेकिन आज कोर्ट का कहना था कि विवादों का असर कामकाज पर नहीं पड़ना चाहिए. आज भी कोर्ट ने माना कि ज़्यादातर मामलों में दिल्ली में फैसले एलजी की सहमति से ही लिए जा सकते हैं. पर कोर्ट ने कहा कि रोज़ाना दखलंदाज़ी से काम मुश्किल हो जाएगा. अगर एलजी किसी बात पर असहमत हैं तो उसका उपयुक्त आधार होना चाहिए. आज भी दिल्ली सरकार की तरफ से वरिष्ठ वकील गोपाल सुब्रमण्यम ने पूरे दिन पैरवी की. सुब्रमण्यम 5 जजों की बेंच को इस बात पर सहमत करने की कोशिश करते रहे कि आर्टिकल 239AA के चलते दिल्ली का दर्जा बाकी केंद्र शासित क्षेत्रों से अलग है. हालांकि, बेंच उनकी कई दलीलों से असहमत हुई. उनसे कई सवाल भी किए. लेकिन कोर्ट ने माना कि दिल्ली के लोगों को शासन से फायदा मिलना चाहिए. अधिकारों को लेकर खींचतान दिल्ली के हित में नहीं है. सुनवाई कल भी जारी रहेगी. आज पूर्व केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ वकील पी चिदंबरम भी दिल्ली सरकार के वकीलों के साथ बैठे नज़र आए. हालांकि, अभी सुब्रमण्यम की दलीलें खत्म नहीं हुई हैं. इसलिए, दिल्ली सरकार के दूसरे वकीलों चिदंबरम, इंदिरा जयसिंह और राजीव धवन की बारी कब आएगी, ये कहा नहीं जा सकता. इन वकीलों की दलीलें पूरी होने के बात एलजी और केंद्र सरकार के वकील जवाब देंगे.
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Source: IOCL
























