Delhi Liquor Policy Scam: CAG रिपोर्ट का आधार, AAP और BJP पर वार; दिल्ली शराब घोटाले में कांग्रेस ने पूछे नए सवाल
Delhi Liquor Policy Scam: दिल्ली शराब घोटाले पर कैग रिपोर्ट आने के बाद कांग्रेस ने आज (26 फरवरी) प्रेस कॉन्फ्रेंस की. इस दौरान AAP और BJP दोनों पर निशाना साधा गया.

Delhi Liquor Policy Scam: अरविंद केजरीवाल की AAP सरकार के दौरान दिल्ली में हुए शराब घोटाले पर मंगलवार (25 फरवरी) को CAG रिपोर्ट सामने आ चुकी है. इसमें कई अनियमितताएं उजागर हुई हैं. हालांकि कांग्रेस को शिकायत है कि इस रिपोर्ट में दिल्ली के उपराज्यपाल और कुछ बीजेपी नेताओं की भूमिका को नजरअंदाज किया गया है. इसी को लेकर दिल्ली कांग्रेस ने आज (26 फरवरी) एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की.
दिल्ली प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष देवेन्द्र यादव और संदीप दीक्षित ने इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि उनकी पार्टी ने जो मुद्दे उठाए थे, वे कैग की रिपोर्ट में सही साबित हुए. दोनों नेताओँ ने यह भी कहा कि अब जल्द ही PAC का गठन हो, कैग रिपोर्ट पर चर्चा हो और दोषियों को सजा मिले.
दिल्ली प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष देवेन्द्र यादव ने कहा, 'हम चाहते हैं CAG रिपोर्ट की पब्लिक अकाउंट्स कमिटी (PAC) में जांच हो. जल्द से जल्द PAC बनाई जाए, ताकि इस रिपोर्ट की जांच हो सके और जो भी लोग लूट में शामिल थे, उन्हें सजा मिले. हमारी मांग है कि इन रिपोर्ट्स को सार्वजनिक तौर पर चर्चा में भी लेकर आया जाए.'
उन्होंने कहा, 'दिल्ली विधानसभा में शराब नीति से जुड़ी CAG की 14 में से एक रिपोर्ट पेश की गई. कांग्रेस को पहले से संदेह था कि इस नीति में बहुत सारी अनियमितताएं हैं, जिससे सरकार के राजस्व पर असर पड़ने वाला है. दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने जांच एजेंसियों को शराब नीति से जुड़ी लिखित शिकायत भी दी थी, जिसमें BJP के संलिप्त होने के भी सबूत थे.'
LIVE: Congress party briefing by Shri @devendrayadvinc and Shri @_SandeepDikshit at AICC HQ. https://t.co/94dKH035oR
— Congress (@INCIndia) February 26, 2025
कांग्रेस के चार बड़े सवाल
1. विधानसभा में शराब नीति से जुड़ी सभी 14 रिपोर्ट्स पेश क्यों नहीं की गई?
2. शराब नीति के समय तीन आबकारी आयुक्त की नियुक्ति क्यों हुई?
3. एलजी ने शराब नीति को हरी झंडी क्यों दी?
4. मास्टरप्लान का उल्लंघन कर ठेके खुलने की अनुमति किसने दी?
प्रेस कॉन्फ्रेंस की प्रमुख बातें
- कैग की रिपोर्ट में उपराज्यपाल और कुछ बीजेपी नेताओं की भूमिका को नजरंदाज किया गया.
- बिना नगर निगम की अनुमति के ऐसा नहीं हो सकता, तब नगर निगम में बीजेपी का शासन था.
- राजस्व बढ़ाने के आम आदमी पार्टी की पोल खुल गई. राजस्व में दो हजार करोड़ का घाटा हुआ. इससे आम लोगों की मदद हो सकती थी.
- शराब घोटाले की जांच का दायरा व्यापक होना चाहिए. जिन कंपनियों को ठेके मिले उन्होंने आम आदमी पार्टी और बीजेपी को चंदा दिया गया. इसकी जांच होनी चाहिए.
- सदन में कैग रिपोर्ट पेश करने के बाद भी चर्चा नहीं हुई. इस मुद्दे पर सार्वजनिक मंच पर चर्चा होनी चाहिए.
- इस पहलू पर भी जाँच होनी चाहिए कि पंजाब की कुछ शराब कंपनियों के ब्रांड को दिल्ली के बाजार में बढ़ावा दिया गया.
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Source: IOCL























