पहले गीजर, फिर मिक्सर... अब KitKat में छिपाकर ड्रग्स तस्करी की कोशिश नाकाम
दिल्ली के IGI एयरपोर्ट पर कस्टम विभाग ने फुकेट से आए एक यात्री के पास से किटकैट चॉकलेट पैकेटों में छिपाकर लाई गई 2.759 किलोग्राम हाइड्रोपोनिक गांजा बरामद किया.

दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय (IGI) एयरपोर्ट पर ड्रग्स तस्करों और कस्टम विभाग के बीच मानो तकनीक की जंग छिड़ी हुई है. तस्कर हर बार छिपाने का नया तरीका खोज रहे हैं, लेकिन एयर इंटेलिजेंस यूनिट (AIU) की प्रोफाइलिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित जोखिम विश्लेषण और हाई रिजॉल्यूशन एक्स-रे स्कैनिंग लगातार उनकी योजनाओं को विफल कर रही है. ताजा मामले में फुकेट से आए एक यात्री ने KitKat चॉकलेट के पैकेटों में 2.759 किलोग्राम हाइड्रोपोनिक गांजा छिपाकर दिल्ली लाने की कोशिश की, लेकिन एयरपोर्ट पर ही उसका भंडाफोड़ हो गया.
जांच एजेंसियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय तस्कर अब पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़ चुके हैं. कभी गीजर के भीतर मादक पदार्थ छिपाए जा रहे हैं, तो कभी ट्रॉली बैग के खोखले हिस्सों का इस्तेमाल किया जा रहा है. अब चॉकलेट के पैकेट भी तस्करी का नया माध्यम बन गए हैं. इससे साफ है कि सिंडिकेट हर बार जांच एजेंसियों को चकमा देने के लिए अलग तरीका अपना रहे हैं.
Customs, IGI Airport Date: 02.08.2026
— Delhi Customs (Airport & General) (@AirportGenCus) August 2, 2026
Operation: AIU, IGI Airport, New Delhi
Seizure: 2759 grams Hydroponic weed (Ganja)
The customs officers of IGI airport, New Delhi, have booked a case of smuggling green colour NDPS substance suspected ganja/marijuana. On the basis of APIS… pic.twitter.com/cmJZsnoXG2
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किटकैट चॉकलेट के रैपर में छिपा था 2.759 किलो हाइड्रोपोनिक गांजा
दो अगस्त को एयर इंडिया की फ्लाइट एआई-2377 से फुकेट से दिल्ली पहुंचे एक यात्री को एपीआईएस (Advance Passenger Information System) प्रोफाइलिंग के आधार पर चिन्हित किया गया. ग्रीन चैनल पार करने के बाद उसे रोका गया और बैग की एक्स-रे जांच की गई. तलाशी के दौरान किटकैट चॉकलेट के पैकेटों के भीतर चार वैक्यूम सील पैकेट मिले, जिनमें कुल 2.759 किलोग्राम हाइड्रोपोनिक गांजा छिपाया गया था. कस्टम विभाग ने आरोपी को एनडीपीएस अधिनियम के तहत गिरफ्तार कर लिया.
AI और हाईटेक स्कैनिंग बन रही तस्करों की सबसे बड़ी चुनौती
कस्टम विभाग अब केवल सामान की सामान्य जांच तक सीमित नहीं है. संदिग्ध यात्रियों की पहचान के लिए एपीआईएस प्रोफाइलिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित जोखिम विश्लेषण, हाई रिजॉल्यूशन एक्स-रे स्कैनिंग और खुफिया सूचनाओं का इस्तेमाल किया जा रहा है. इन्हीं तकनीकों की वजह से लगातार ऐसे मामलों का खुलासा हो रहा है, जिनमें तस्करों ने बेहद शातिर तरीके अपनाए थे.
दो महीने में 140 किलो से ज्यादा मादक पदार्थ जब्त
दिल्ली कस्टम के आंकड़े बताते हैं कि जून महीने में 80 किलोग्राम से अधिक मादक पदार्थ बरामद किए गए और सात तस्करों को गिरफ्तार किया गया. वहीं एक जुलाई से दो अगस्त के बीच 60 किलोग्राम से ज्यादा हाइड्रोपोनिक गांजा जब्त कर 15 से अधिक तस्करों को पकड़ा गया. इस तरह केवल दो महीनों में 140 किलोग्राम से ज्यादा मादक पदार्थ बरामद किए जा चुके हैं, जबकि 22 से अधिक आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है.
इन अंतरराष्ट्रीय रूटों पर सबसे ज्यादा नजर
कस्टम विभाग के अनुसार हाल के अधिकांश मामले बैंकाक, फुकेट और कुआलालंपुर से आने वाली उड़ानों से जुड़े हैं. जांच एजेंसियों ने इन रूटों को हाई रिस्क श्रेणी में रखा है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स सिंडिकेट भारत में ड्रग्स पहुंचाने के लिए इनका लगातार इस्तेमाल कर रहे हैं.
गीजर से मिली थी 15.38 किलो, बैंकाक से पकड़ी गई थी 47.8 किलो की खेप
तस्करी के बदलते तरीकों के बीच पहले भी कई बड़ी कार्रवाई हो चुकी हैं. सात जून को कुआलालंपुर से आए दो यात्रियों के सामान में रखे गीजरों के भीतर छिपाकर लाई गई 15.38 किलोग्राम हाइड्रोपोनिक गांजा बरामद किया गया था. इससे पहले 23 मई को बैंकाक से आए दो थाई नागरिकों के कब्जे से 47.8 किलोग्राम हाइड्रोपोनिक गांजा जब्त किया गया था. यदि इन दोनों मामलों की बरामदगी को हालिया आंकड़ों में शामिल किया जाए तो कुल बरामदगी 187.8 किलोग्राम तक पहुंच जाती है.
जुलाई में भी लगातार होती रही बड़ी कार्रवाई
जुलाई के दौरान भी कस्टम की कार्रवाई थमी नहीं. 27 जुलाई को 7.4 किलोग्राम, 29 जुलाई को 11 किलोग्राम से अधिक और 30 जुलाई को 18.15 किलोग्राम हाइड्रोपोनिक गांजा बरामद किया गया. इन तीन मामलों में ही सात तस्करों को गिरफ्तार किया गया. इसके अलावा कई अन्य मामलों में दो से 10 किलोग्राम तक की नशीली खेप भी जब्त की.
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