जम्मू कश्मीरः आतंकियों से निपटने के लिए तैयार है 22 जवानों की क्राइसिस रेस्पॉन्स टीम
इन कमांडोज़ को सामान्य पुलिस ड्यूटी से छूट मिली हुई है. यह कमांडोज़ अपना अधिकतर समय ट्रैंनिंग में लगते हैं. जम्मू कश्मीर की भौगोलिक स्थितियों को ध्यान में रखते हुए इन कमांडोज़ की ट्रेनिंग की रचना ख़ास तौर से की गयी है.

जम्मूः जम्मू में अब आतंकवादी हमला या किसी और ऐसी स्थिति से निपटने के लिए भारतीय सेना के पैरा कमांडोज़ की तर्ज पर क्राइसिस रिस्पांस टीम यानि सीआरटी का गठन किया किया गया है. आधुनिक हथियारों और अतिआधुनिक उपकरणों से लैस जम्मू पुलिस के यह 22 कमांडोज़ किसी स्थिति से निपटने के लिए मात्र 5 मिनट का समय लेते है.
जम्मू के नगरोटा में 31 जनवरी को आतंकियों के साथ हुए एनकाउंटर में जम्मू पुलिस, सेना और अर्धसैनिक बलों ने न सिर्फ तीन पाकिस्तानी आतंकियों को मार गिराया बल्कि आंतक के तीन मददगारों को गिरफ्तार भी किया.
इस ऑपरेशन में जम्मू पुलिस की क्राइसिस रिस्पांस टीम यानि सीआरटी के कमांडोज़ भी नज़र आये. अब तक जम्मू कश्मीर में आतंकियों से लड़ने के लिए स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप के कमांडोज़ ही शामिल होते थे.
इस ग्रुप पर आतंकवाद के साथ साथ कानून व्यवस्था, नारकोटिक्स, साइबर क्राइम समेत कई अन्य ज़िम्मेदारियां होने के कारण नए टीम का गठन किया गया है. इस टीम में पुलिस ने 22 ऐसे जवानों को शामिल किया गया है जिनका ध्यान सिर्फ अपनी ट्रैनिंग पर होता है.
समान्य ड्यूटी से मिली हुई है छूट
इन कमांडोज़ को सामान्य पुलिस ड्यूटी से छूट मिली हुई है. यह कमांडोज़ अपना अधिकतर समय ट्रैंनिंग में लगते हैं. जम्मू कश्मीर की भौगोलिक स्थितियों को ध्यान में रखते हुए इन कमांडोज़ की ट्रेनिंग की रचना ख़ास तौर से की गयी है.
इनकी ट्रैंनिंग में जंगल और सर्च ऑपरेशन को तरजीह दी गयी है. इन जवानों को ड्रोन समेत कई आधुनिक उपकरणों को चलाने की ट्रेनिंग भी दी जाती है. जम्मू कश्मीर के इन 22 कमांडोज़ को सर्च ऑपरेशन के साथ ही जंगल वारफेयर की ट्रेनिंग भी दी गयी है.
इसके साथ ही मौसम, अंधेरा या धुंध जैसे प्राकृतिक फैक्टर इन कमांडोज़ के ऑपरेशन्स में बाधा न बने इसके लिए इन कमांडोज़ को कई आधुनिक उपकरणों से भी लैस भी किया गया है.
पांच मिनट का है रेडी टाइम
अपने ऑपरेशंस को लेकर यह कमांडोज़ कितने केंद्रित है इसका अंदाज़ा आप इसी बात से लगा सकते है कि किसी भी ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए यह कमांडोज़ महज़ पांच मिनट का रेडी टाइम लेते हैं. अगर हाल के जम्मू कश्मीर के आतंकी हमलो की बात करे तो इन हमलो में से अधिकतर हमलो में आतंकी या तो किसी घर में छिपे थे या फिर किसी ईमारत का सहारा लेकर फायरिंग करते पाए गए. आतंकियों के इस स्वरुप को देखते हुए क्राइसिस रिस्पांस टीम के इन कमांडोज़ को बिल्डिंग और रूम इंटरवेंशन में महारत हासिल है. किसी इमारत या घर में छिपे आतंकियों को मारने या इन आतंकियों के चुंगल से बंधकों को छुड़ाने के लिए भी इन कमांडोज़ को विशेष ट्रैंनिंग दी गयी है. रूम इंटरवेंशन जैसे जोखिम भरे ऑपरेशन्स को अंजाम देने के लिए यह कमांडोज़ ड्रोन और दीवार के आर-पार देखने वाले कैमरों समेत कई अन्य आधुनिक उपरकणों का भी सहारा लेते हैं. जम्मू कश्मीर पुलिस इन कमांडोज़ को किसी ऑपरेशन के दौरान आतंकियों को ज़िंदा पकड़ने की भी ट्रेनिंग दे रही है. आतंकियो को ज़िंदा पकड़ने के लिए इन कमांडोज़ को जो ड्रोन दिए गया है उनमे लगे स्पीकर की ज़रिये यह कमांडोज़ आतंकियों को सरेंडर करने की अपील भी कर सकते हैं. ममता बनर्जी बोलीं- CAA, NPR और NRC काला जादू की तरहSource: IOCL



























