COVID-19: रोहतांग दर्रे को बीआरओ ने तीन हफ्ते पहले खोला, लाहौल-स्पिति जिले में भेजी जानी है दवाइयां-जरूरी सामान
भारी बर्फबारी और ठंडे मौसम के चलते रोहतांग पास करीब छह महीने तक बंद रहता है. जब ये बंद होता है तो लाहौल-स्पिति जिला देश के बाकी हिस्सों से पूरी तरह से कटा हुआ रहता है.

शिमला: कोरोना वायरस से लड़ने के लिए देश के सबसे सुदूर इलाके लाहौल-स्पिति तक जरूरी दवाईयां और सामान की सप्लाई हो सके, इसके लिए बॉर्डर रोड ऑर्गेनाईजेशन (बीआरओ) ने रोहतांग पास (दर्रे) को तीन हफ्ते पहले ही खोल दिया है. करीब साढ़े तेरह हजार फीट की उंचाई पर रोहतांग पास इनदिनों पूरी तरह से बर्फ से ढंका रहता है.
रक्षा मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि 11 अप्रैल को हिमाचल प्रदेश सरकार ने बीआरओ से रोहतांग पास जल्द खोलने की गुजारिश की थी, ताकि लाहौल घाटी के किसान खेती के लिए अपने घर वापस लौट सकें और कोविड-19 से लड़ने के लिए जिले में जरूरी दवाईयां और राहत सामाग्री पहुंचाई जा सके. इसके बाद बीआरओ ने हाईटेक मशीनरी का इस्तेमाल कर दर्रे से कई फीट उंची बर्फ को साफ किया और रास्ता खोल दिया.
लेकिन रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, ये काम इतना आसान नहीं था. इस दौरान बीआरओ की टीम को कोरोना वायरस से तो अपने आप को सुरक्षित रहना ही था. साथ ही बर्फबारी, बर्फीले तूफान और जमाने वाली ठंड का सामना करना पड़ा. शनिवार को जैसे ही रास्ता साफ हुआ एक डॉक्टर के नेतृत्व में जरूरी सामान और 150 किसानों के एक दल को गाड़ियों सहित रवाना कर दिया गया.
बता दें कि ठंड के मौसम में भारी बर्फबारी के चलते रोहतांग पास करीब छह महीने तक बंद रहता है. इस दौरान लाहौल-स्पिति जिला पूरी तरह से देश के बाकी हिस्सों से कटा रहता है. जिले के बड़ी तादाद में किसान और दूसरी जनता दर्रा बंद होने से पहले ही मनाली या फिर दूसरे इलाकों में पहुंच जाते हैं. इस मौसम में भी 12 दिसम्बर से रोहतांग दर्रा पूरी तरह से बंद है. इस दौरान पूरी लाहौल घाटी किसी भी तरह की जरूरत के लिए हवाई-ऑपरेशन्स पर निर्भर रहती है. लेकिन खराब मौसम होने के चलते कई बार उड़ान भी प्रभावित हो जाती हैं. अमूमन, हर साल रोहतांग दर्रा मई के महीने में खुलता है. लेकिन इस बार तीन हफ्ते पहले ही रास्ता साफ कर दिया गया. खुद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इन विषम परिस्थितियों में रोहतांग पास तीन हफ्ते पहले ही खोलने के लिए बीआरओ को बधाई दी. उन्होनें बीआरओ और हिमाचल में लगे प्रोजेक्ट-दीपक की प्रशंसा की.
गौरतलब है कि पिछले कई सालों से साढ़ें आठ किलोमीटर लंबी ‘अटल-टनल’ पर काम चल रहा है जो मनाली को रोहतांग पास से जोड़ेगी. रोहतांग दर्रे के नीचे बनाई जा रही ये टनल भी बीआरओ बना रही है. इस टनल के बनने से लाहौल घाटी बारह महीने देश के बाकी हिस्सों से जुड़ी रहेगी. लॉकडाउन शुरू होने पर इस टनल का काम भी रूक गया है. लेकिन अब फिर से टनल का काम शुरू हो गया है और माना जा रहा है कि इस साल सितंबर तक टनल पूरी तरह से बनकर तैयार हो जाएगी.
COVID-19: देश में कोरोना के करीब 25 हजार पॉटिजिव केस, पढ़ें राज्यवार आंकड़े
टॉप हेडलाइंस
Source: IOCL






















