मध्य प्रदेश: लॉकडाउन के मद्देनजर शिवराज सिंह चौहान ने किया सहायता पैकेज का एलान, लिए ये अहम फैसले
कोरोना वायरस को लेकर लगाए गए लॉकडाउन को देखते हुए मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कई अहम फैसले किए. किसानों, मजदूरों और छात्रों के लिए घोषणाएं की गईं और अधिकारियों के लिए निर्देश दिए गए.

भोपाल: मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लॉकडाउन की वजह से पैदा होने वाली स्थिति और इससे प्रभावित वर्गों के लिए सहायता पैकेज की देने का एलान किया है. उन्होंने कहा कि प्रदेश के 46 लाख पेंशनर्स को 600 रुपये प्रतिमाह सामाजिक सुरक्षा योजना अंतर्गत रुपये 275 करोड़ प्रतिमाह भुगतान किया जा रहा है. सभी प्रकार के सामाजिक सुरक्षा पेंशन, विधवा पेंशन, वृद्धा अवस्था पेंशन निराश्रित पेंशन इत्यादि का दो माह का एडवांस भुगतान किया जाएगा.
इसके साथ ही संनिर्माण कर्मकार मंडल के अंतर्गत मजदूरों को लगभग 8.25 लाख रुपये की सहायता प्रति मजदूर 1000 रुपये के हिसाब से उपलब्ध कराई जाएगी. इसी प्रकार 2.20 लाख राशि सहरिया, बैगा, भारिया जनजातियों के परिवारों के खातों में दो माह की एडवांस राशि दो हजार रुपये भेजी जाएगी.
कोरोना पॉजिटिव पाए जाने पर शासकीय हॉस्पिटल/मेडिकल कॉलेज में नि:शुल्क इलाज किया ही जाएगा, साथ-साथ चिन्हित प्राइवेट मेडिकल कॉलेज/प्राइवेट हॉस्पिटल में भी नि:शुल्क इलाज सभी वर्गों के लिए उपलब्ध रहेगा. प्राइवेट अस्पतालों को आयुष्मान भारत में निर्धारित दरों के हिसाब से भुगतान किया जाएगा.
ग्राम पंचायतों में पंच-परमेश्वर योजना की प्रशासनिक मद में राशि उपलब्ध है. इसे कोरोना के नियंत्रण और लॉकडाउन के कारण जहां भी लोगों को भोजन/आश्रय की व्यवस्था करना हो खर्च की अनुमति प्रदान की जा रही है.
स्कूल बंद होने से मध्यान्ह भोजन योजना का लाभ बच्चों को नहीं मिल पा रहा है. अप्रैल 2020 तक का खाद्यान्न रिलीज किया जा चुका है. इसे अब पीडीएस अन्तर्गत राशन दुकानों को उपलब्ध कराया जाएगा. इसके फलस्वरूप कुल 65 लाख 91 हजार विद्यार्थियों के खाते में मध्यान्ह भोजन की 156 करोड़ 15 लाख रुपये की राशि का वितरण किया जाएगा.
प्राथमिक शालाओं के 60.81 लाख विद्यार्थियों को 155 रुपये प्रति विद्यार्थी की दर से 94.25 करोड़ रुपये और माध्यमिक शाला के 26.68 लाख विद्यार्थियों को 232 रुपये प्रति विद्यार्थी की दर से 61.90 करोड़ रुपये दिए जाएंगे.
मुख्यमंत्री ने सभी संबंधित अधिकारियों को महत्वपूर्ण निर्देश दिए. उन्होने कहा कि जरूरी है कि लोग अपने घरों में रहें. भीड़-भाड़ न हो. सभी धार्मिक सामाजिक कार्यक्रम पूरी तरह बंद रहेंगे. सभी धार्मिक स्थानों को भी आम जनता के लिए बंद रखा जाएगा. जिला कलेक्टरों को निर्देश दिये ककि वे स्थानीय धर्म गुरूओं से चर्चा करें.
मुख्यमंत्री के निर्देश
मेले आदि का आयोजन भी अगले 21 दिनों तक पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा. सोशल डिस्टेंसिंग के मापदण्डों का सभी जगह गम्भीरता से पालन कराने के निर्देश दिये हैं.
सामुदायिक निगरानी को बढ़ाया जाये जिससे बुखार सर्दी खांसी के मरीजों के बारे में जिला प्रशासन को तत्काल सूचना मिल सके.
जिन मरीजों को सामान्य सर्दी खांसी और बुखार हो उन्हें जांच के बाद समाधान होने पर घर में ही दवा पहुंचाने के प्रयास करें. कलेक्टर इस कार्य के लिये मोहल्ले या वार्ड की स्वयंसेवी और सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को भी आगे मदद के लिये प्रेरित करें.
कॉल सेंटर को 24 घंटे सक्रिय रखा जाये. कॉल सेंटर से सूचना प्राप्त होने पर घर पर दवाई पहुंचाने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए.
शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में ऐसे लोग हो सकते है, जिन्हें लॉकडाउन के कारण भोजन की व्यवस्था करने में कठिनाई आ रही हो ऐसी स्थिति में स्वयं सेवी संस्थाओं आदि को प्रेरित कर भोजन के पैकेट बनवाये जाये और वितरण की व्यवस्था की जाये ताकि प्रदेश में कोई भी व्यक्ति भूखा न रहे.
सभी आवश्यक सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करें.
दवाई की दुकान, किराने की दुकान और फल सब्जियों की दुकानों के सामने नगर निगम और नगर पालिका और ग्राम पंचायत के माध्यम से पेंट और चूने से निशान लगाये जाए, जिससे खरीदी करने वाले व्यक्ति आपस में सोशल डिस्टेंसिंग रख सके.
ऐसी दुकान और संस्थाओं के खुले रहने का समय अधिक से अधिक हो ताकि किसी एक समय पर भीड़ लगने की संभावना कम हो.
सुनिश्चित करें कि प्रदेश में माल परिवहन बिना बाधित हुए चलता रहें ताकि वस्तुओं की आपूर्ति में किसी प्रकार की कमी नहीं आवे. पैकेजिंग मटेरियल के परिवहन में भी बाधा नहीं आए. माल परिवहन से संबंधित वाहनों को चेक पांईट पर भी नहीं रोका जाये.
सभी कलेक्टर यह सुनिश्चित करें कि अत्यावश्यक वस्तु और दैनिक उपयोगी और मार्केट में दवाई की सामान्य कीमत पर मिल सके. अधिक कीमतें वसूल करने की शिकायत प्राप्त होने पर कड़ी कार्रवाई की जाए.
डॉक्टर, नर्स और आवश्यक कार्य करने वाले अमले को पर्याप्त सुरक्षा और आवश्यक सुविधा मिल सके, यह सुनिश्चित करें.
सभी संभागीय आयुक्तों का यह दायित्व है कि वे अपने सभी जिलों में समन्वय रखें. यदि आपूर्ति और लॉजिस्टिक्स की कोई समस्या है तो तत्काल अवगत करायें.
उपभोक्ताओं के लिए आवश्यक सामग्री जैसे सब्जियां, किराना, दूध, फल आदि सामग्री निर्बाध रूप से उपलब्ध करायी जाये. सब्जी मंडियों में अनावश्यक भीड़-भाड़ ना हो. वहाँ से केवल रिटेल व्यापारी ही सब्जियाँ खरीदें उपभोक्ता नहीं. अगर संभव हो तो उन्हें फैला दें.
स्वास्थ्य विभाग की ओर से संपूर्ण समन्वय डॉ. पल्लवी जैन गोविल द्वारा किया जा रहा है. इन सभी वर्टिकल से संबंधित कोई भी समस्या आने पर कलेक्टर संबंधित अधिकारी से चर्चा कर समाधान कर सकते है.
होम डिलेवरी, टेक होम और कोरियर सुविधाएं चालू रहेंगी, जिससे कम से कम लोग अपने घरों से बाहर आये और उन्हें घर पहुंच सेवा उपलब्ध हो सके.
किसानों को सुविधाएं
फसल कटाई में लगे मजदूरों और हार्वेस्टर्स को आवश्यक सुविधा प्रदान की जाये ताकि फसल कटाई प्रभावित ना हों. हार्वेस्टर्स कभी भी न रोके जाये.
किसानों को मंडी में एसएमएस से बुलाने और उपार्जन केंद्रों की स्थापना और मंडियों की व्यवस्था ऐसी हो जिसमें सोशल डिस्टेंसिंग मापदंडों का कड़ाई से पालन हो. इस संबंध में आपसे पृथक से चर्चा की जावेगी.
वे जिले, जहां रेलवे के रेक पाईट है, वहां कार्य कर रहे हम्मालों और मजदूरों की भी मेडिकल स्क्रीनिंग करा ली जाए. यह सुनिश्चित करें कि रैक समय पर खाली हो ताकि प्रदेश में खाद, बीज, यूरिया आदि की कमी ना हो.
प्रदेश के प्राइवेट अस्पतालों और नर्सिंग होम्स को भी कोरोना के विरूद्ध लड़ाई के अभियान में जोड़ा जाए.
विदेश से आने वाले और अन्य राज्यों से यात्रा कर आये नागरिकों/यात्रियों की शत प्रतिशत पहचान और स्क्रीनिंग की जाए.
मेडिकल मोबाइल यूनिट, रैपिड रिस्पॉन्स टीम को पूरी तरह तैयार और सक्रिया रखा जाए.
पेयजल और बिजली की आपूर्ति अबाधित रखी जाए.
आइसोलेशन वार्ड और आइसोलेशन सेंटर की पर्याप्त व्यवस्था की जाए.
जिला कलेक्टरों को कोरोना की रोकथाम के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने की पूरी छूट होगी. वे स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार तत्काल उचित निर्णय लें. राज्य सरकार उन्हें हर प्रकार की सहायता उपलब्ध कराएगी.
Source: IOCL
























