कोरोना वायरसः वीजा पाबंदियों के बीच चीनी कंपनियां भारत से कर रही हैं रियायत की मांग
कोरोना वायरस संक्रमण के मद्देनजर भारत की तरफ से लगाई गई वीजा पाबंदियों के बीच चीनी कंपनियों ने भारत से रियायत की मांग की है. इन कंपनियों का कहना है कि जो कर्मचारी स्वस्थ हैं उन्हें भारत आकर व्यापार करने की इजाजत मिलनी चाहिए.

नई दिल्ली: भारत की तरफ से लगाई गई वीजा पाबंदियों के चलते व्यापारिक नुकसान का हवाला देते हुए चीन की कंपनियों ने रियायत का रास्ता निकालने की अपील की है. चीनी कंपनियां मांग कर रही हैं कि उनके जो कर्मचारी स्वस्थ हैं उन्हें आकर अपना कामकाज संभालने की इजाजत दी जाए. हालांकि ईरान, इटली, जापान और दक्षिण कोरिया में पैर पसार रहे कोरोना वायरस के बीच फिलहाल भारत की तरफ से फौरन किसी राहत की उम्मीद धुंधली है.
लाखों डॉलर का हो रहा नुकसान
भारत में कारोबार कर रही चीनी कंपनियों के संगठन, चैम्बर ऑफ चाइनीज़ एंटरप्राइसेज इन इंडिया के अध्यक्ष एलन वेंग ने कहा कि कर्मचारियों के भारत ना आ पाने की वजह से कंपनियों को लाखों डॉलर का घाटा उठाना पड़ रहा है. इसके अलावा कई भारतीय रोजगार भी इससे प्रभावित हो रहे हैं. वेंग ने कहा कि लोगों की स्वास्थ्य चिंताओं को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ऐसे कदम उठाए जिनसे चीनी कंपनियों का कारोबार और कामकाज भी प्रभावित ना हो.
भारत ने निरस्त की ई-वीजा
महत्वपूर्ण है कि कोरोना वायरस को लेकर फैली चिंताओं के बीच भारत ने चीन से आने वाले सभी लोगों के लिए ई-वीजा निरस्त कर दिए हैं. साथ ही पहले से जारी रोजगार और बिजनेस वीजा को भी निलंबित किया गया है. वेंग के मुताबिक इसके कारण भारत में काम करने वाले 15000 से अधिक चीनी पेशेवर प्रभावित हुए हैं जो स्प्रिंग फेस्टिवल की छुट्टियां मनाने चीन गए थे और अब वीजा पाबंदियों के कारण लौटने का इंतजार कर रहे हैं.
इंटरनेशनल एडवरटाइजिंग एसोसिएशन के मुताबिक कार्यक्रम वी स्टैंड विथ चायना के दौरान उद्यमी कुणाल लालनी का कहना था कि कोरोना वायरस के कारण पैदा चिंताओं के चलते आज भारत और चीन के बीच करीब 87 अरब डॉलर के आपसी करोबार पर संशय के बादल हैं. संकट की इस घड़ी में हम चीन की कंपनियों, उसके व्यापार और लोगों के साथ खड़े हैं.
अब तक 37 मिलियन डॉलर का हुआ नुकसान
इस मौके पर चीनी विदेश व्यापार संवर्धन परिषद के मुख्य प्रतिनिधि हैरिस लू का कहना था कि भारत में चीन की करीब 1500 कंपनियों ने दस अरब डॉलर का निवेश कर रखा है. भारत की संभावनाओं के चलते निवेश का यह आंकड़ा तेजी से बढ़ भी रहा है. लू ने सीसीपीआईटी के आकलनों का हवाला देते हुए कहा कि वीजा पाबंदियों के कारण भारत में काम कर रहीं चीनी कंपनियों को करीब 37 मिलियन डॉलर का नुकसान हो चुका है.
'स्वास्थ्य पहली प्राथमिकता'
हालांकि चीन में काम करने वाले वरिष्ठ भारतीय पत्रकार शैबाल दासगुप्ता चीन की इन दलीलों से पूरी तरह इत्तेफाक नहीं रखते. उनके मुताबिक व्यापक रूप से फैलते वायरस संक्रमण के बीच पहली प्राथमिकता लोगों के स्वास्थ्य की होती है. ऐसे में यह कहना मुनासिब नहीं कि वीजा पाबंदियों के कारण चीन का व्यापार प्रभावित हो रहा है. चीन की अपनी कंपनियों लॉक डाउन में हैं और भय के कारण कई गांव तक लोगों की आवाजाही पर पाबंदी लगी हुई है.
दासगुप्ता के मुताबिक कोरोना वायरस संक्रमण का हुबेई प्रांत में होने के कारण चीन के आर्थिक नुकसान का दायरा बहुत ज्यादा नहीं है, क्योंकि चीन के कुल जीडीपी में हुबेई की हिस्सेदारी पांच फीसदी से भी कम है, अगर इस वायरस का विस्तार गुवांगझाओ या जिनजियांग जैसे सूबों में होता तो नुकसान बहुत अधिक हो सकता था.
गौरतलब है कि कोरोना वायरस संक्रमण के कारण काफी मुल्कों के साथ चीन का कारोबार प्रभावित हुआ है. भारत में चीन के साथ लोगों की आवाजाही पर भले ही नियंत्रण लगाया हो, लेकिन चिकित्सा सुरक्षा स्क्रीनिंग के बाद चीन से आने वाले जहाजों के जरिए व्यापारिक कारोबार जारी है.
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