परिवार खोया, निर्वासन की जिंदगी और अब…, बांग्लादेश वापसी पर क्या बोलीं शेख हसीना?
शेख हसीना ने अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए कहा कि आज मैं सिर्फ एक पूर्व प्रधानमंत्री के तौर पर नहीं, बल्कि राष्ट्रपिता की बेटी के तौर पर बोल रही हूं. उन्होंने वतन वापसी पर बयान दिया है.

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना अपने वतन लौटने इच्छा रखती हैं. उन्होंने यह बयान बुधवार को एक मीडिया प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिया. उन्होंने कहा कि मैंने बांग्लादेश वापस जाने का फैसला किया है. वो दिसंबर में बांग्लादेश जाना चाहती हैं.
मैंने बांग्लादेश जाने का फैसला कर लिया है: शेख हसीना
शेख हसीना ने अपने बयान में कहा, 'मैंने बांग्लादेश जाने का निर्णय लिया है. मैं दिसंबर में बांग्लादेश वापस जाना चाहती हूं. मेरी वापसी पर वो मुझे जेल में डाल सकते हैं या मार भी सकते हैं. लेकिन मैं बांग्लादेश के लिए वापस जाऊंगी. सवाल जवाब में शेख हसीना ने कहा कि वो दिसंबर में वापस लौटना चाहती हैं.'
शेख हसीना ने कहा, मुझे हिरासत में लिया जा सकता है. मुझ पर मुकदमा चलाया जा सकता है. लेकिन डर यह तय नहीं करेगा, कि लोगों के प्रति मेरा फर्ज क्या है. 1975 में मैंने अपना परिवार खो दिया. मैं 6 साल तक देश से बाहर रही. मैंने मिलिट्री शासन के खिलाफ लड़ाई लड़ी. मुझे अपने भविष्य की चिंता नहीं है. मुझे बांग्लादेश के लोगों की चिंता है. बात बांग्लादेश को फिर से सही रास्ते पर लाने की है. हम लोगों के साथ खड़े होना चाहते हैं. मुझे उनपर भरोसा है. मैं उनसे प्यार करती हूं. मैं बांग्लादेश के लोगों के लिए वापस आऊंगी.
मैं राष्ट्रपिता की बेटी के तौर पर बोल रही हूं: शेख हसीना
इसके अलावा उन्होंने अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए कहा कि आज मैं सिर्फ एक पूर्व प्रधानमंत्री के तौर पर नहीं, बल्कि राष्ट्रपिता की बेटी के तौर पर बोल रही हूं. पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने मारे गए अपने परिवार के सदस्यों को याद करके रो पड़ीं. बांग्लादेश की पूर्व पीएम शेख हसीना ने कहा कि पिछले कुछ सालों में बांग्लादेश में डर हर जगह घुस गया है. ये वो बांग्लदेश नहीं है जिसके लिए लाखों लोगों ने शहादत दी थी.
उन्होंने कहा कि कुछ सालों में कुछ संगठन काम कर रहे थे. छात्रों की मांगों को हिंसा में कैसा बदला जाए. ऑर्गेनाइज्ड ग्रुप ने इसको हिंसा और सत्ता परिवर्तन के लिए इस्तेमाल किया.
मैंने अपने प्यारे बांग्लादेश को मुश्किलों से गुजरते देखा है: शेख हसीना
उन्होंने कहा कि पिछले दो सालों में मैंने अपने प्यार बांग्लादेश को मुश्किलों से गुजरते देखा है. ये वो बांग्लादेश नहीं है जिसे हमने बनाया था. ये वो बांग्लादेश नहीं है जिसके लिए 1971 में 30 लाख लोगों ने अपनी जान दी थी. मैं जुलाई और अगस्त 2024 की सच्चाई से अपनी बात शुरू करना चाहती हूं. ये छात्रों का कोई शांतिपूर्ण आंदोलन नहीं था.























