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लॉकडाउन: बीते 77 दिनों में देश पर कैसे मुसीबतों का पहाड़ टूटा, जीने का तरीका तक बदल गया

21 दिनों के इस लॉकडाउन में देश को करीब 8 लाख करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान हो चुका है.लॉकडाउन में रेल, हवाईजहाज, बसें, कारखाने, दुकानें और हजारों कंपनियां समेत लगभग सभी जरूरी साधनों को बंद करना पड़ा.

नई दिल्ली: देश को जानलेवा कोरोना वायरस के प्रकोप से बचाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज एक बार फिर 3 मई तक लॉकडाउन का एलान किया है. आज लॉकडाउन का 21वां दिन है, लेकिन देश बीते 77 दिनों से मुसीबतें झेल रहा है. कोरोना वायरस ने देश पर ऐसा कहर बरपाया है कि सब कुछ बंद हो गया. रेल, हवाईजहाज, बसें, कारखाने, दुकानें और हजारों कंपनियां समेत लगभग सभी जरूरी साधनों को बंद करना पड़ा और लोग घरों में कैद हो गए. यानी एक चलता फिरता भारत, सुखी भारत, दनदनाता भारत, कुछ दिनों में ही पूरी तरह से ठप सा हो गया.

एक चलता फिरता भारत, सुखी भारत, दनदनाता भारत

जनवरी का महीना था. नए साल को लेकर सभी के अपने अपने सपने और लक्ष्य थे. इसी महीने भारत की जनता ने पहली बार कोरोना वायरस का नाम सुना. तब कोरोना वायरस से जुड़ी खबरें सिर्फ चीन से आ रही थीं. न्यूज़ चैनलों, सोशल मीडिया और अखबारों में कोरोना वायरस से जुड़ी खबरें सिर्फ छोटी हैडिंग में ही सिमट जाती थी, लेकिन किसी को पता नहीं था कि आने वाले महीनों में ये वायरस एक महामारी साबित होगी और सबकुछ बंद करने पर मजबूर कर देगा.

30 जनवरी को पहला केस आया और मुश्किल दौर की शुरुआत हुई

भारत में कोरोना वायरस का पहला केस 30 जनवरी को आया. दक्षिण राज्य केरल में चीन के वुहान प्रांत से लौटीं एक महिला कोरोना वायरस पॉजिटिव पाई गई. पीड़ित महिला का इलाज तृस्सूर मेडिकल कॉलेज में किया गया. इलाज के बाद महिला की रिपोर्ट निगेटिव आई और उसे डिस्चार्ज कर दिया गया. इस दौरान केरल में कई मामले सामने आए.

हफ्ते के हिसाब से कोविड-19 के केस बढ़ते गए

इसके बाद देश में हर रोज एक-दो एक-दो करके केस बढ़ते गए. मार्च आते-आते देश में कोरोना के करीब 30 केस हो गए. देश इस वक्त होली का त्योहार मना रहा था, लेकिन कोरोना की वजह से होली के रंग भी फीके हो गए. कोरोना वायरस के लगातार बढ़ते मामलों के बाद राज्य सरकारें सख्ते में आ गई और जनता को सेनिटाईजर और मास्क का इस्तेमाल करने के लिए जागरूक करने लगी, लेकिन फिर भी मामले बड़ी संख्या में बढ़ते रहे.

आखिर कार पीएम जनता कर्फ्य़ू का एलान

19 मार्च गुरुवार को देश में कोरोना वायरस के मामले बढ़कर करीब 400 तक पहुंच गए थे. तबतक इस जानलेवा वायरस से सात लोगों की मौत भी हो चुकी थी. कोरोना वायरस के प्रकोप को भांपते हुए पीएम मोदी ने राष्ट्र के नाम संबोधन दिया और जनता से अपील की कि वह 22 मार्च रविवार को सुबह सात बजे से रात नौ बजे तक जनता कर्फ्यू लगाए. ताकि कोरोना वायरस की कड़ी को तोड़ा जा सके. देश ने अपने पीएम की बात मानी और पूरे देश में बाजार-कंपनियां बंद हो गई. यातायात रुक गया और सड़के खाली हो गईं.

फिर लॉकडाउन का एलान

कोरोना वायरस से देश को बचाने के लिए 24 मार्च को पीएम मोदी ने रात आठ बजे फिर देश को संबोधित किया और इसी दौरान पीएम मोदी ने देश में अगले 21 दिनों के लॉकडाउन की घोषणा कर दी और लोगों से संयम बरतने और घरों से बाहर नहीं निकलने की अपील की.

कोरोबार ठप हो गया, देश को 8 लाख करोड़ का आर्थिक नुकसान हुआ

21 दिनों के लॉकडाउन में रेल-हवाई यातायात भी पूरी तरह बंद कर दिया गया. सड़के सूनी हो गई. बाजार बंद हो गए. यानी कारोबार पूरी तरह से ठप हो गया. जीवन घर की चार दीवारी में कैद हो गया. लॉकडाउन के चलते देश को भारी आर्थिक नुकसान भी हो रहा है. 21 दिनों के इस लॉकडाउन में देश को करीब 8 लाख करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान हो चुका है.

शॉपिंग के तरीके बदल गए

देश में लॉकडाउन लागू हुआ तो लोगों के शॉपिंग करने के तरीके भी बदल गए. लोग बाजारों में न जाकर ऑनलाईन शॉपिंग का रास्ता चुनने लगे. हालांकि ये सुविधा भी जनता को ज्यादा दिन नहीं मिल पाई और फ्लिपकार्ड-अमेजॉन जैसी बड़ी ऑनलाईन शॉपिंग कंपनियों ने भी होम डिलिवरी की सुविधा बंद कर दी.

काम करने के तरीके बदल गए

लॉकडाउन से पहले ही कई राज्यों में जनता को भीड़ से बचाने के लिए बाजारों और मॉल्स को बंद कर दिया गया था. जरूरी कंपनियों को छोड़कर मीडिया संस्थान, सरकारी दफ्तर, बैंक और डाकघर जैसी जरूरी सुविधाएं जारी रहीं. सरकार की अपील के बाद प्राइवेट कंपनियों ने अपने कर्मचारियों को घर से काम करने की सुविधा दी. लॉकडाउन के कठिन समय में लोग वर्फ फ्रॉम होम यानी घर से काम कर रहे हैं.

पढ़ाई के तरीके बदल गए

मार्च महीने में देश में तमाम बोर्ड परिक्षाएं आयोजित की जाती हैं, लेकिन इस बार कोरोना वायरस के चलते पढ़ाई पर बुरा असर पड़ा. कहीं परिक्षाएं हुईं तो कहीं रद्द कर दी गई. कई राज्य सरकारों ने दसवीं और बारहवीं क्लास में पढ़ने वाले बच्चों के अलावा बाकी क्लासेज़ के बच्चों को बिना परिक्षा दिए ही आगे की क्लास में भेजने का आदेश दिया. लॉकडाउन के समय में स्कूल प्रशासन बच्चों को ऑनलाइन भी पढ़ा रहे हैं. स्कूल प्रशासन सोशल मीडिया के जरिए बच्चों और अभिभावकों से संपर्क में है. स्कूल प्रशासन व्हाट्स एप मैसेज और वीडियो कॉलिंग के जरिए बच्चों को होम वर्क दे रहा है.

रहने-सहने का तरीका बदल गया, सामाजिक दूरी जीवन का हिस्सा बन गई

अब लॉकडाउन 3 मई तक बढ़ गया है. लॉकडाउन ने लोगों के रहने सहने केतरी में बहुत बदलाव ला दिया है. लोग घर से ऑफिस का काम करने के अलावा इन दिनों बच्चों के साथ वक्त बिता रहे हैं. कोई दूरदर्शन पर रामायण-महाभारत देखकर वक्त गुजार रहा है तो कोई फिल्मे-गाने देख रहा है. कुछ लोग अपनी हॉबी भी फॉलो कर रहे हैं. घर से बाहर निकलना मना है. ऐसे में सामाजिक दूरी लोगों के जीवन का हिस्सा बन गई है.

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