कांग्रेस नेता कार्ती चिदंबरम को बड़ा झटका, PMLA ट्रिब्यूनल ने ED की संपत्ति अटैचमेंट आदेश पर लगाई मुहर
मनी लॉन्ड्रिंग मामले में फंसे कांग्रेस नेता कार्ती चिदंबरम की अपील को PMLA अपीलेट ट्रिब्यूनल ने खारिज करते हुए ED की संपत्ति जब्ती के आदेश को बरकरार रखा है.

कांग्रेस नेता कार्ती चिदंबरम को बड़ी कानूनी हार का सामना करना पड़ा. मनी लॉन्ड्रिंग मामले में PMLA अपीलेट ट्रिब्यूनल ने उनकी अपील को खारिज करते हुए ED की संपत्ति जब्ती के आदेश को बरकरार रखा है. ये मामला मशहूर INX मीडिया मनी लॉन्ड्रिंग केस से जुड़ा है. ट्रिब्यूनल ने अपने आदेश में कहा कि ED की कार्रवाई और जब्त की गई संपत्तियों को लेकर कोई गलती नहीं पाई गई है.
ED का ये केस CBI की एक FIR से शुरू हुआ था, जो 2017 में दर्ज की गई थी. फरवरी 2018 में CBI ने कार्ती चिदंबरम को चेन्नई एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया था. इसके एक साल बाद, अगस्त 2019 में उनके पिता और देश के पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम को भी पहले CBI और फिर ED ने गिरफ्तार किया था.
कार्रवाई में करोड़ों की संपत्ति जब्त
ED ने अक्टूबर 2018 में कार्ती चिदंबरम और उनसे जुड़ी एक कंपनी की संपत्तियों को जब्त किया था. इन संपत्तियों में दिल्ली के जोर बाग इलाके में एक घर का हिस्सा (50%), जिसकी कीमत लगभग 16.05 करोड़ बताई गई है, चेन्नई स्थित इंडियन ओवरसीज बैंक में कई बैंक अकाउंट्स शामिल है.
कुल मिलाकर ED ने 43.8 करोड़ की अचल संपत्ति और 10.13 करोड़ की चल संपत्ति जब्त की थी. 29 अक्टूबर को ट्रिब्यूनल के ज्यूडिशियल मेंबर राजेश मल्होत्रा और एडमिनिस्ट्रेटिव मेंबर बालेश कुमार ने आदेश जारी किया.
कार्ती चिदंबरम के वकील ने क्या कहा?
ट्रिब्यूनल ने कहा कि ED ने 1 जून 2020 को अभियोजन शिकायत दाखिल की थी. भले ही ये शिकायत तय समय यानी 365 दिन के बाद दाखिल हुई हो, लेकिन कोविड महामारी के दौरान सुप्रीम कोर्ट की ओर से लगाए गए समय सीमा में छूट को ध्यान में रखा गया है. इसलिए ED की कार्रवाई सही मानी गई.
कार्ती चिदंबरम की तरफ से वकील अर्शदीप खुराना, अक्षत गुप्ता और सिदक सिंह आनंद ने कहा कि ED की अटैचमेंट अपने आप खत्म हो जानी चाहिए थी, क्योंकि एजेंसी ने तय समय में शिकायत दाखिल नहीं की. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के S. Kasi बनाम स्टेट केस का हवाला दिया और कहा कि कोविड की वजह से दी गई समय सीमा बढ़ाने की राहत केवल न्यायिक मामलों में लागू होती है ना कि ED जैसी एजेंसियों की कार्रवाई पर.
सुप्रीम कोर्ट ने क्या दिया आदेश?
वहीं ED की तरफ से वकील जोहेब हुसैन, विवेक गुर्नानी और कनिष्क मौर्य ने कहा कि कोविड लॉकडाउन के दौरान कोर्ट का कामकाज लगभग बंद था और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत समय सीमा में छूट दी गई थी. हालांकि ट्रिब्यूनल ने कार्ती चिदंबरम को थोड़ी राहत दी है. पहले दिए गए आदेश में उनकी प्रॉपर्टी पर 'स्टेटस क्वो' यानी मौजूदा स्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया गया था.
ट्रिब्यूनल ने कहा कि अब अपील खारिज होने के बाद ये सुरक्षा खत्म हो जाएगी, लेकिन ED केवल असाधारण कारणों में ही संपत्ति का कब्जा ले सकेगी. ट्रिब्यूनल ने ये बात सुप्रीम कोर्ट के विजय मदनलाल चौधरी बनाम यूनियन ऑफ इंडिया (2022) के फैसले का हवाला देते हुए कही.
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Source: IOCL





















