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विशेष: चालाक चीन के कोरोना के आंकड़ों के छुपाने के काले सच से कैसे हुआ पर्दाफाश

चीन में कोरोना वायरस को लेकर नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ डिफेंस टेक्नोलॉजी की रिपोर्ट में चौंकाने वाला दावा किया गया है.

नई दिल्ली: ऐसा लगता है की चीन का सीधा-सीधा एक ही प्लान है अपने उसूलों और नियमों को पूरी दुनिया पर अपनी सामरिक और आर्थिक हैसियत बढ़ा कर लागू करना. चीन इसके लिए दुनिया के साथ कोई भी विश्वासघात करने को तैयार है. चीन से खुफिया तरीके से हासिल हुई हमारी जानकारी आपको पूरी तरह से हैरान कर सकती है. दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाले चीन में इंसानों की कीमत एक आंकड़े से ज्यादा नहीं और इसीलिए कोरोना की वजह से जितनी मौत हुई है वो सिर्फ आंकड़े बना कर बेहद खूफिया तरीके से दफ्न कर दिए गए.

हम जिस रिपोर्ट का ज़िक्र कर रहे हैं उसमें ऐसा साफ लिखा है. बीजिंग जिस तरह के दावे कर रहा है कि कोरोना वायरस की महामारी में उसके यहां 82 हजार 9 सौ 19 लोग संक्रमित हुए और उनमें से सिर्फ 4 हजार 6 सौ तैंतीस लोग मारे गए. लेकिन चीन की नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ डिफेंस टेक्नोलॉजी से 100 रिपोर्टर्स नाम की संस्था को लीक हुए डाटा सेट से अंदर की बात सामने आ रही है. ये मामला चीनी सेना के डाटा से जुड़ा है और इस तरह से हासिल इस डाटा सेट में जो खुलासे हैं वो बेहद हैरान करने वाले हैं.

खुलासा नंबर-1 चीन ने कोरोना वायरस के मरीजों के नाम या जगह का नाम लिखा ही नहीं बल्कि डाटा सेट में सिर्फ इलाका यानी लोकेशन दिखाया गया है.

खुलासा नंबर-2 इतना छिपाने के बाद भी डाटा में जो लोकेशन दिखाए गए वो 230 शहरों के हैं. मतलब ये है कि चीन में कोरोना सिर्फ वुहान भर या आस पास के बीजींग सांग्जी भर में नहीं फैला बल्कि कुल 230 शहरों में फैला.

खुलासा नंबर- 3 हमारे सूचना स्रोत को जो डाटा सेट मिला है उसमें 230 शहरों के लोकेशन के साथ 6 लाख 40 हजार एंट्रीज हैं – इन एंट्रीज के लैटिट्यूड दर्ज है लॉगीट्यूड दर्ज है और आगे लिखा है Confirmed. ये आंकड़े फरवरी की शुरुआत से लेकर अप्रैल महीने के आखिर तक के हैं. इन डाटा में मौत भी दर्ज है और ये भी दर्ज है कि कितने लोग ठीक हुए.

इस सनसनीखेज रिपोर्ट में जो कुछ भी लिखा है वो बेहद साफ है और ये भी साफ है कि चीन में कोरोना से संक्रमित होने वाले लोगों की तादाद 6 लाख 40 हजार थी ना कि 82 हजार जो कि चीन आज क्लेम कर रहा है. इतना ही नहीं शुरुआती दौर में जब कोरोना का टेस्ट करने का कोई इंतजाम नहीं था तब चीन सीटी स्कैन के जरिए इस बीमारी को कंफर्म कर रहा था इसका जिक्र भी हमारे हाथ लगी इस रिपोर्ट में है. मिलाजुला कर जो डाटा है उसमें उन अस्पतालों के नाम भी दर्ज हैं जहां मरीज पहुंचे इसके अलावा अपार्टमेंट, होटल, सुपरमार्केट, रेलवे स्टेशन, रेस्टोरेंट और स्कूल के नाम और लोकेशन जो दर्ज हैं वो पूरे चीन में फैले हुए हैं मतलब 230 शहरें में.

इस डेटासेट में जिक्र है झेनजियांग शहर के एक KFC मतलब केनटकी फ्राइड चिकेन के आउटलेट का जहां 14 मार्च को एक कोरोना संक्रमित मिला था. इसके अलावा इस डेटा सेट में हार्बिन शहर के एक चर्च का भी नाम है जहां 17 मार्च को दो लोग कोरोना संक्रिमत हुए थे. हैरान करने वाली बात ये है कि चीन के किसी आधिकारिक बयान में इन दोनों केस का कोई जिक्र ही नहीं है.

अब सवाल ये खड़ा होता है कि चीन में ये आंकड़े कहां से आया और उन्हें इतनी गोपनीयता के साथ दबा कैसे दिया गया बिना किसी मीडिया को भनक लगे. अगर गौर करें तो एक बात पर ध्यान जाता है – कोरोना जिस वक्त तेजी से बढ़ रहा था तब चीन ने वाशिंगटन पोस्ट के दो पत्रकारों को बिना कोई नोटिस दिए देश से बाहर कर दिया था. मतलब साफ है चीन नहीं चाहता था कि उसकी गुपचुप वाली नीतियां कोई और जान सके. चीन किसी को भनक लगे बिना अपने काम में जुटा रहा और इसमें उसकी गोपनीय़ता को बरकरार रखा सेंट्र्ल मिलिटरी कमीशन ने – जो कि चीन के चांग्सा शहर में है और ये संस्था चीन की सेना पर नजर रखने वाली बेहद मजबूत संस्था है. मतलब रिपोर्ट जिस यूनिवर्सिटी में बनाई गई वो सेना की, रिपोर्ट जिन्होंने तैयार की वो भी सेना के. वैसे भी कोरोना के वक्त क्वारंटीन करने से लेकर सप्लाई ट्रांसपोर्ट, मरीजों के अस्पताल में दाखिल करने से लेकर उनके इलाज तक में सेना ने अहम भूमिका अदा की. कोरोना के खिलाफ जंग में सेना किस तरह शामिल थी ये उनके एक प्रोपेगेंडा स्लेगन में भी दिखता है जिसमें लिखा गया कि महामारी से लड़ाई में जनता की सेना शामिल है.

चीन के अंदर से हमे जो बेहद सनसनीखेज जानकारी मिली है उससे साफ जाहिर हो रहा है कि इंसानों की जिंदगी की कोई कीमत नहीं लगाई चीन की कम्यूनिस्ट पार्टी ने. आंकड़ों को इस तरीके से पेश किया गया कि पूरी दुनिया गुमराह हो गई. चीन के मंसूबों से जुड़े ये कुछ ऐसे सच हैं जिनको छिपकर चीन ने दुनिया की आँखों में धुल झोंकी. सच नंबर-1 चीन में 82000 नहीं, चीन में 6 लाख 40 हजार से ज्यादा लोग मरे.

सच नंबर-2 चीन ने आंकड़ो में घालमेल अपनी सेना और खुफिया एजेंसियों की मदद से किया.

सच नंबर-3 चीन के आंकड़ों को छुपाया क्योंकि चीन अमेरिका को दहलाना चाहता था.

सच नंबर-4 चीन पूरी दुनिया में लोकतंत्र को बदनाम करना चाहता है.

सच नंबर-5 चीन पूरी दुनिया पर अपने देश जैसा साम्राज्य कायम करना चाहता है.

मतलब साफ है कि चीन के कोरोना से जुड़ी हर साजिश अब तक छिपी इसीलिए रही क्योंकि उसमें शुरू से आखिर तक सेना शामिल थी.

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