अमेरिका से व्यापार युद्ध में चीन को आई भारतीय मदद की याद
चीन ने भारत को आगाह भी किया कि अमेरिका की तरफ से राष्ट्रीय सुरक्षा औऱ फेयर ट्रेड के नाम पर अपनाए जा रहे संरक्षण के हथकंडे न केवल चीन बल्कि भारत के आर्थिक विकास को प्रभावित करेंगे.

नई दिल्ली: अमेरिका के साथ व्यापार युद्ध के बीच अब चीन को भारत के साथ की जरूरत और अहमियत समझ आने लगी है. चीन ने कहा कि संरक्षणवाद की इस लड़ाई में भारत औऱ चीन को साथ मिलकर लड़ना चाहिए. इतना ही नहीं चीन ने भारत को आगाह भी किया कि अमेरिका की तरफ से राष्ट्रीय सुरक्षा औऱ फेयर ट्रेड के नाम पर अपनाए जा रहे संरक्षण के हथकंडे न केवल चीन बल्कि भारत के आर्थिक विकास को प्रभावित करेंगे.
भारत में चीनी दूतावास के प्रवक्ता जी रोंग ने एक बयान जारी कर कहा कि हाल ही में चीन के खिलाफ अमेरिका के उप-राष्ट्रपति माइक पेंस ने जो आरोप लगाए वो पूरी तरह बेबुनियाद हैं. अमेरिका को खुद अपने गिरेबां में झांककर देखना चाहिए कि वो किस तरह भारत औऱ चीन के आंतरिक मामलों में मानवाधिकार औऱ धार्मिक विषयों का हवाला देकर हस्तक्षेप करता है. चीनी प्रवक्ता का यह बयान ऐसे समय आया है जब गहराते टैक्स युद्ध के बीच अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पाम्पियो दो दिन पहले चीन पहुंचे थे. बीजिंग में अमेरिकी विदेश मंत्री की मुलाकात चीनी विदेश मंत्री वांग यी समेत आला नेताओं से हुए थी.
बीते कुछ महीनों से अमेरिका औऱ चीन एक-दूसरे के खिलाफ अतिरिक्त करों के पैंतरों का इस्तेमाल कर रहे हैं. कुछ माह पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन से आने वाले सामान पर अतिरिक्त शुल्क लगा दिया था और मांग की थी कि बीजिंग 335 अरब डॉलर का व्यापार घाटा कम करे. वहीं जवाबी कार्रवाई में चीन ने भी अमेरिकी उत्पादों के खिलाफ भारी-भरकम टैक्स लगाने का एलान कर दिया. अमेरिका और चीन जून से चल रही इस खींचतान में अब तक एक दूसरे के सामान पर अरबों डॉलर का अतिरिक्त शुल्क लगा चुके हैं.
अब तक भारत के साथ व्यापार घाटे को कम करने के प्रयासों पर सुस्त रवैया अपनाते रहे चीन को न केवल नई दिल्ली के साथ की चिंता सताने लगी है बल्कि यह भी फिक्र है कि कहीं उसके घाटे का लाभ पूरी तरह भारतीय झोली में न चला जाए. लिहाजा चीन इस बात की भरसक कोशिश में है कि अमेरिका के साथ अपने व्यापार युद्ध को वो विकसित बनाम विकासशील देशों की लड़ाई में बदल सके. चीनी दूतावास प्रवक्ता ने कहा कि भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी औऱ चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में एक सुर में संरक्षणवाद का विरोध किया था. जोहानसबर्ग में हुए 10वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भी दोनों ने इसके खिलाफ आवाज बुलंद करते हुए संरक्षण वाद के विरुद्ध स्पष्ट संदेश दिया था.
महत्वपूर्ण है कि भारत औऱ चीन का आपसी कारोबार असंतुलन का शिकार है. द्विपक्षीय कारोबार में चीन को भारतीय निर्यात जहां 10.8 अरब डॉलर है वहीं आयात का आंकड़ा 44 अरब अमेरिकी डॉलर से ज्यादा का है. इस असंतुलन का हवाला देते हुए भारत लगातार चीन से आग्रह करता रहा है कि वो अपने बाजार के दरवाजे भारतीय उत्पादों के लिए अधिक खोले.
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की संरक्षणवादी आर्थिक नीतियों को लेकर भारत-अमेरिका रिश्तों में भी तनाव कम है. अमेरिका के चीन, यूपोपीय संघ और भारत से आयात होने वाली वस्तुओं पर जून 2018 में शुल्क बढ़ाए जाने के बाद जवाबी कार्रवाई में भारत ने भी कई अमेरिकी उत्पादों पर टैक्स बढ़ाने का फैसला लिया था. इसमें कृषि उत्पादों के साथ स्टील और लोहे से बनी चीजें शामिल हैं. कई वस्तुओं पर आयात शुल्क में चार गुना तक बढ़ोतरी की गई. कारोबार के इस तनाव को कम करने के लिए भारत औऱ अमेरिका के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत में चल रही है.
हालांकि, भारत और अमेरिका के बीच कारोबारी तनाव की स्थिति उतनी तनावपूर्ण नहीं है जितनी तल्खी इन दिनों चीन और अमेरिका के बीच नजर आ रही है. राष्ट्रपति ट्रंप तो चीन को चेतावनी भी दे चुके हैं कि अगर उसने नये कदम के खिलाफ कोई जवाबी कार्रवाई की तो अमेरिका सभी तरह के चीनी आयात पर शुल्क लगा देगा. चीन से अमेरिका को करीब 522.9 अरब डालर का निर्यात होता है.
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Source: IOCL

























