लोक अदालत में कौन-कौन से मामले सुने जाते हैं, सबकुछ जान लें यहां
लोक अदालत में आमतौर पर ट्रैफिक चालान, संपत्ति बंटवारा, भूमि विवाद, वैवाहिक विवाद, नगर निगम टैक्स, हाउस टैक्स, बैंक वसूली, इंश्योरेंस क्लेम और मोटर एक्सीडेंट क्लेम जैसे मामलों की सुनवाई होती है.

देश में ऐसे कई लोग हैं, जिनके मामले अदालत में लंबे समय से लंबित पड़े रहते हैं, जिनका समाधान जल्दी नहीं हो पाता है. ऐसे मामलों को जल्द और आपसी सहमति से निपटाने के लिए समय-समय पर लोक अदालत का आयोजन किया जाता है. लोक अदालत का उद्देश्य लोगों को लंबी अदालती प्रक्रिया से राहत देना और कम समय में विवादों का समाधान करना होता है. यहां दोनों पक्षों की सहमति से समझौते के आधार पर मामले का निपटारा किया जाता है.
इस बार बिहार की राजधानी पटना में 14 मार्च को नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा. इसका आयोजन जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से किया जा रहा है. जिला प्रशासन के अनुसार, यह लोक अदालत सुबह 10:30 से शुरू होगी. इसका मुख्य उद्देश्य अदालत में लंबित मामलों को आपसी समझौते के आधार पर तेजी से निपटना है, ताकि लोगों को लंबे समय तक चलने वाली कानूनी प्रक्रिया से राहत मिल सके. ऐसे में चलिए अब हम आपको बताते हैं कि लोक अदालत में कौन-कौन से मामले सुने जाते हैं.
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लोक अदालत में कौन-कौन से मामले सुने जाते हैं?
लोक अदालत में आमतौर पर ट्रैफिक चालान, संपत्ति बंटवारा, भूमि विवाद, वैवाहिक विवाद, नगर निगम टैक्स, हाउस टैक्स, बैंक वसूली, चेक बाउंस, इंश्योरेंस क्लेम और मोटर एक्सीडेंट क्लेम जैसे मामले की सुनवाई होती है. इन मामलों में दोनों पक्षों को बुलाया जाता है और जिस बात पर दोनों की सहमति बनती है इस आधार पर समझौता करवा दिया जाता है. ऐसे में अगर कोई व्यक्ति अपने मामले का निपटारा लोक अदालत में करना चाहता है तो उसे अपने नजदीकी कोर्ट में जाकर जानकारी लेनी होती है और एक आवेदन देना होता है. इसके बाद दोनों पक्षों के बीच समझौते की प्रक्रिया होती है. लोक अदालत में मामले का निपटारा काफी तेजी से किया जाता है, इसलिए हर साल हजारों मामलों को यहां सुलझाया जाता है.
लोक अदालत के क्या हैं फायदे?
लोक अदालत में मामला सुलझाने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यहां किसी तरह की कोर्ट फीस नहीं लगती. अगर किसी मामले में पहले से कोर्ट फीस जमा की गई है और मामला लोक अदालत में सुलझ जाता है तो वह फीस वापस कर दी जाती है. इसके अलावा लोक अदालत का फैसला अंतिम और कानूनी रूप से बाध्यकारी होता है, इसके खिलाफ किसी भी उच्च अदालत में अपील नहीं की जा सकती है.
लोगों से ज्यादा से ज्यादा भागीदारी की अपील
पटना के जिला मजिस्ट्रेट ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि कार्यक्रम का व्यापक प्रचार प्रसार किया जाए, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इसका फायदा उठा सके. यहां उन्होंने लंबित मामलों से जुड़े लोगों से अपील की है कि वह लंबे समय तक कोर्ट में केस चलाने के बजाय लोक अदालत के जरिए आपसी सहमति से विवाद का समाधान करें.
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Source: IOCL



























