अब कुष्ठ रोग नहीं बन सकता तलाक़ का आधार, कानून में बदलाव करेगी मोदी सरकार
मोदी सरकार ने तलाक़ से जुड़े उन कानूनों में बदलाव करने का फ़ैसला किया है जिनमें कुष्ठरोग को तलाक़ का एक आधार बनाया गया है. संसद के इसी सत्र में इस बिल के पेश होने की संभावना है.

नई दिल्ली: अब कुष्ठरोग से पीड़ित होना तलाक़ का आधार नहीं बन सकेगा. मोदी सरकार ने तलाक़ से जुड़े उन कानूनों में बदलाव करने का फ़ैसला किया है जिनमें कुष्ठरोग को तलाक़ का एक आधार बनाया गया है. संसद के इसी सत्र में इस बिल के पेश होने की संभावना है. इस बिल के कानून बन जाने के बाद इस बीमारी के कारण महिलाओं को तलाक नहीं दिया जा सकेगा.
कैबिनेट ने दी मंज़ूरी
आज कैबिनेट की बैठक में पर्सनल लॉ ( संशोधन ) बिल , 2018 को मंज़ूरी मिल गई. बिल के ज़रिए 5 पुराने कानूनों की अलग अलग धाराओं में संशोधन करने का प्रस्ताव है जिनमें तलाक़ के लिए कुष्ठरोग को एक आधार बनाया गया है. सरकार के मुताबिक़ कुष्ठरोग को तलाक का आधार न बनाया जाए इसकी मांग सालों से हो रही है, इसलिए सरकार इस दिशा में कदम उठा रही है.
जिस वक़्त ये कानून बनाए गए थे उस समय कुष्ठरोग एक असाध्य रोग माना जाता था, लेकिन आधुनिक विज्ञान की तरक्की ने इस बीमारी को पूरी तरह ठीक करना सम्भव बना दिया है. ऐसे में आज के समय में यह तर्कसंगत नहीं है. कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा - " ऐसे में इस प्रावधान को बनाए रखना कुष्ठरोगियों से भेदभाव करने जैसा होगा. " सरकार इसी कारण इसमें बदलाव करने की सोच रही है.
पांच कानूनों में होगा बदलाव
जिन पुराने कानूनों में बदलाव किया जाएगा उनमें Divorce Act 1869 , Dissolution of Muslim Marriages Act 1939 , Special Marriages Act 1954 , Hindu Marriage Act 1955 और Hindu Adoptions & Maintenance Act 1956 शामिल हैं. इन सभी कानूनों में उन प्रावधानों को बदला जाएगा जिनमें तलाक़ की व्याख्या की गई है .
सुप्रीम कोर्ट ने भी दिया था निर्देश
इस मामले पर विधि आयोग और संसदीय समिति ने भी अपनी सिफारिशों में बदलाव करने को कहा था. सुप्रीम कोर्ट ने भी एक मामले में सरकार को कानूनों में बदलाव कर इस विसंगति को दूर करने को कहा था.
Source: IOCL

























