ड्यूटी ड्रॉबैक घोटाले में CBI कोर्ट का बड़ा फैसला, आरोपी को सुनाई तीन साल की सजा
ड्यूटी ड्रॉबैक स्कीम सरकार की एक योजना है, जिसके तहत निर्यातकों को उनकी उत्पाद लागत कम करने के लिए आयात शुल्क से छूट दी जाती है लेकिन कुछ लोग इसका दुरुपयोग कर सरकार को करोड़ों की चपत लगाते हैं.

सीबीआई की विशेष अदालत मदुरै ने ड्यूटी ड्रॉबैक घोटाले में दोषी पाए गए ट्रेंड सेटलर्स कंपनी के पार्टनर सी. पी. रामकृष्णन को तीन साल की कठोर कैद (RI) और 60,000 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है. यह मामला सरकार को 3.48 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी से जुड़ा हुआ है, जिसमें आरोपियों ने मिलकर ड्यूटी ड्रॉबैक योजना (DEEC) का दुरुपयोग किया और गलत तरीके से लाभ उठाया.
क्या है पूरा मामला?
सीबीआई ने यह मामला 29 जून 2007 को दर्ज किया था. जांच में सामने आया कि आरोपियों ने मुंबई, कोचीन, करूर और अन्य स्थानों पर षड्यंत्र रचकर सरकार से 3.48 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की. इस घोटाले में शामिल तत्कालीन केंद्रीय उत्पाद शुल्क अधीक्षक त्रिची ने अपने पद का दुरुपयोग कर झूठी परीक्षा रिपोर्टें जारी कीं. जांच में यह भी पता चला कि एम/एस स्वीटी इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड और सी. पी. रामकृष्णन (पार्टनर, ट्रेंड सेटलर्स) ने व्यावसायिक रूप से बेकार कपड़े निर्यात किए, ताकि वे अपने एडवांस लाइसेंस के तहत कपड़ा कच्चा माल 3.54 करोड़ रुपये के मूल्य पर आयात कर सकें और उस पर ड्यूटी छूट (ड्रॉबैक) का लाभ उठा सकें.
लंबी जांच के बाद आया फैसला
सीबीआई ने इस मामले की जांच पूरी कर 9 सितंबर 2009 को मदुरै की विशेष अदालत में चार्जशीट दाखिल की. मुकदमे के दौरान आरोपी सार्वजनिक सेवक (तत्कालीन अधीक्षक) की मृत्यु हो गई, जिसके बाद उनके खिलाफ मामला समाप्त कर दिया गया. अदालत ने मामले की सुनवाई के बाद सी. पी. रामकृष्णन को दोषी करार दिया और उन्हें तीन साल की कठोर सजा सुनाई. साथ ही 60,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया.
ड्यूटी ड्रॉबैक योजना क्या है?
ड्यूटी ड्रॉबैक स्कीम (DEEC) सरकार की एक योजना है, जिसके तहत निर्यातकों को उनकी उत्पाद लागत कम करने के लिए आयात शुल्क से छूट दी जाती है लेकिन कुछ लोग इस योजना का दुरुपयोग कर नकली या बेकार सामान निर्यात कर सरकार को करोड़ों की चपत लगाते हैं.
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