मायावती का एलान, बीएसपी के पूर्व विधायक भीमराव अंबेडकर होंगे राज्यसभा के उम्मीदवार
मायावती इस बात से नाराज़ हैं कि मीडिया के एक वर्ग ने आनंद कुमार के चुनाव लड़ने की बात कही थी. आनंद उनके छोटे भाई हैं. बीएसपी सुप्रीमों ने कहा कि पार्टी में आनंद सिर्फ प्रशासनिक काम देखते हैं, राजनीतिक नहीं. उन्होंने कहा कि बीएसपी में परिवारवाद नहीं चलता है.

लखनऊ: बीएसपी के पूर्व विधायक भीमराव अंबेडकर को पार्टी की तरफ से राज्य सभा का उम्मीदवार घोषित किया गया है. पार्टी सुप्रीमो मायावती ने इस फैसले का एलान किया. लखनऊ में बीएसपी विधायकों और कोऑर्डिनेटरों की बैठक बुलाई गई थी. इसी मीटिंग में बहन जी ने अपना फैसला सबको सुनाया. मायावती ने सबसे भीमराव का परिचय कराया और उन्हें फूलों की माला पहनाई गई. भीमराव को पहले से ही मीटिंग में बुला लिया गया था.
I thank her (Mayawati) that she provided this opportunity to a candidate like me: Bhim Rao Ambedkar, BSP's Rajya Sabha candidate from #UttarPradesh pic.twitter.com/I2Xp01QL1W
— ANI UP (@ANINewsUP) March 6, 2018
बीएसपी में परिवारवाद नहीं चलता: मायावती
बहन जी ने ये भी बताया कि वे खुद क्यों नहीं चुनाव लड़ रही हैं. उन्होंने मीडिया को जम कर कोसा. मायावती इस बात से नाराज हैं कि मीडिया के एक वर्ग ने आनंद कुमार के चुनाव लड़ने की बात कही थी. आनंद उनके छोटे भाई हैं. बीएसपी सुप्रीमों ने कहा कि पार्टी में आनंद सिर्फ़ प्रशासनिक काम देखते हैं, राजनीतिक नहीं. उन्होंने कहा कि बीएसपी में परिवारवाद नहीं चलता है.
समाजवादी पार्टी ने राज्य सभा चुनाव में बीएसपी को समर्थन देने का फ़ैसला किया है. बदले में बीएसपी लोकसभा उपचुनाव में एसपी उम्मीदवारों का समर्थन कर रही है. यूपी में गोरखपुर और इलाहाबाद के पास फूलपुर में 11 मार्च को चुनाव होने हैं. बीएसपी के 19 विधायक हैं जबकि समाजवादी पार्टी के 47 एमएल हैं. राज्य सभा का सांसद चुने जाने के लिए 37 वोटों की जरुरत है. 23 सालों बाद बीएसपी और समाजवादी पार्टी किसी चुनाव के लिए साथ आई है.
बीएसपी में कई जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं भीमराव
बीएसपी के उम्मीदवार भीमराव अंबेडकर इटावा के रहने वाले हैं जो समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव का गृह ज़िला है. भीमराव एक बार विधायक भी चुने गए थे. 2007 में जब मायावती की सरकार बनी थी वे लखना सुरक्षित सीट से एमएलए बने थे. 2012 में वे फिर चुनाव लड़े लेकिन हार गए. पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव में पार्टी ने उन्हें टिकट ही नहीं दिया. भीमराव भी दलित समाज के हैं और मायावती की जाति से आते हैं. वे संगठन में भी कई ज़िम्मेदारियां संभाल चुके हैं.
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