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बार-बार हिंदुओं के ख़िलाफ़ षड्यंत्र क्यों करती है कांग्रेस, हिंदुओं को गाली देने जैसा है आज़ाद का बयान: संबित पात्रा

पात्रा का विषय तो गुलाम नबी आजाद का बयान था लेकिन वो इससे बहुत विषयांतर हो गए. उन्होंने आज़ाद के बयान के लपेटे में उनकी पार्टी को लेते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी सोशल मीडिया के सहारे पाकिस्तान में पेड प्रमोशन कर रही है. उन्होंने इसे कांग्रेस द्वारा मोदी हटाओ के पेड प्रमोशन का नाम दिया.

नई दिल्ली: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद के बयान पर विवाद हो गया है. उन्होंने मुसलमानों के साथ बढ़े भेदभाव को लेकर जो बयान दिया था, भारतयी जनता पार्टी (बीजेपी) के प्रवक्ता संबित पात्रा ने उस पर हमला किया है. पात्रा ने कहा है कि आज़ाद का बयान हिंदुओं को गाली देने जैसा है.

हालांकि, पात्रा का विषय तो गुलाम नबी आजाद का बयान था लेकिन वो इससे बहुत विषयांतर हो गए. उन्होंने आज़ाद के बयान के लपेटे में उनकी पार्टी को लेते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी सोशल मीडिया के सहारे पाकिस्तान में पेड प्रमोशन कर रही है. उन्होंने इसे कांग्रेस द्वारा मोदी हटाओ के पेड प्रमोशन का नाम दिया.

पात्रा ने आगे कहा कि आज़ाद का बयान बेहद खेदजनक है. उन्होंने कहा कि भले ही आज़ाद कह रहे हों कि जब से मोदी पीएम बने हैं तब से देश में डर का माहौल है. लेकिन ये वो भूल गए कि ये कांग्रेस के बुरे दिन हैं. कोई कैंपेन के लिए नहीं बुलाता है और उसे हिंदू-मुस्लिम का रूप दे दिया गया.

पात्रा ने ये भी कहा कि अलिगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी को खास मानसिकता के लोग बदनाम कर रहे हैं. उन्होंने सवाल उठाए कि अगर आतंकियों के लिए नमाज-ए-जनाजा पढ़ा जाएगा तो क्या इसकी निंदा नहीं होगी? पात्रा ने कांग्रेस से ये सवाल भी किया कि पार्टी बताए कि वो बार-बार हिंदुओं के ख़िलाफ़ षड्यंत्र क्यों करती है.

पात्रा ने शशि थरूर पर भी हमला करते हुए कहा कि उन्होंने अभी हाल ही में कहा कि वो राम मंदिर नहीं चाहते हैं. उन्होंने किसी और धर्म के बारे में कभी ऐसा नहीं कहा. वो ऐसा केवल हिंदुओं के लिए कहते हैं.

क्या है आज़ाद की शिकायत? साल 2014 में दिल्ली में सत्ता का जो परिवर्तन हुआ और इन बीते चार सालों में केंद्र सरकार के शासन-प्रशासन की जो शैली रही है, उससे कांग्रेस के सीनियर लीडर और राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद बेहद दुखी नजर आते हैं. बुधवार को गुलाम नबी लखनऊ में थे और यहीं उन्होंने अपना दर्द-ए-दिल बयान किया.

वरिष्ठ कांग्रेसी नेता की शिकायत है कि अब वक्त बदल गया है और उन्हें अपने कार्यक्रम में बुलाने वाले हिंदू भाइयों और नेताओं की संख्या घट गई है. गुलाम नबी आजाद अपना दर्द कुछ यूं बयान करते हैं. वो कहते हैं, ''बीते चार सालों में मैंने पाया है कि अपने कार्यक्रमों में बुलाने वाले जो 95 फीसदी हिंदू भाई और नेता हुआ करते थे, अब उनकी संख्या घटकर महज 20 फीसदी रह गई है."

गुलाम नबी आजाद कहते हैं कि वो जब यूथ कांग्रेस में थे, तब से ही अंडमान-निकोबार से लेकर लक्षद्वीप तक, देशभर के कोने-कोने में कैंपेन के लिए जाते रहे हैं और उन्हें बुलाने वालों में 95 फीसदी हिंदू भाई और नेता हुआ करते थे, जबकि सिर्फ 5 फीसदी ही मुसलमान उन्हें अपने कार्यक्रमों में बुलाया करते थे.

अपना दुख व्यक्त करते हुए राज्यसभा में विपक्ष के नेता आजाद कहते हैं कि ऐसा होना ये बताता है कि कुछ गलत हो रहा है. वो कहते हैं, ''आज मुझे बुलाने से आदमी डरता है कि इसका वोटर पर क्या असर होगा?''

दरअसल, गुलाम नबी आजाद ने अपने बयान से उस सोच को बल देने की कोशिश की है कि केंद्र की मोदी सरकार के दौर में हिंदुओं और मुसलमानों के बीच दूरियां बढ़ी हैं और सांप्रदायिक माहौल खराब हुए हैं. विपक्ष का आरोप है कि जब से मोदी सरकार आई है, तब से लव-जेहाद, गोरक्षा, असहिष्णुता और मंदिर-मस्जिद जैसे मुद्दे पर लोगों के बीच बहसें और नफरतें बढ़ी हैं.

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