BJP नेता निशिकांत के पैर धोकर कार्यकर्ता ने पिया गंदा पानी, ट्रोल होने पर सांसद ने इसे ठहराया सही
बीजेपी के सांसद अपनी एक हरकत को फेसबुक पर पोस्ट करने के बाद विवादों में फंस गए हैं. उन्होंने एक पार्टी कार्यकर्ता से अपने पैर घुलवाए जिसके बाद कार्यकर्ता को वो पानी पीने दिया. यही नहीं, उन्होंने इसकी तस्वीर फेसबुक पर पोस्ट की जिसके बाद विवाद होने पर उन्होंने इसे सही भी ठहराया.

रांची: भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के एक सांसद ने कार्यकर्ताओं का घोर अपमान किया है. सांसद निशिकांत दुबे ने एक कार्यकर्ता से अपना पैर धुलवाया और धुले हुए पैर का पानी उसे पीने दिया. मामला झारखंड के गोड्डा से है जहां से निशिकांत दुबे बीजेपी के सांसद हैं. गोड्डा के कनभारा में रविवार को कार्यकर्ता पवन साह ने बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे का पैर धोकर पी लिया. ये तब हुआ जब निशिकांत दुबे पुल का शिलान्यास करते पहुंचे थे. हैरत की हद पार करने वाली बात ये है कि सांसद ने पैर धोनेवाली फोटो फेसबुक पर डाल रखी है.
बेस्ट सांसद चुने गए हैं दुबे निशिकांत दुबे वो सांसद हैं जिनको 2018 का बेस्ट सांसद चुना गया है. हैरत में डालने वाली बात ये है कि निशिकांत दुबे को अपने किए पर अफसोस नहीं हो रहा है. ऐसे मामले पर चौतरफा आलोचना के बाद वो तो कार्यकर्ता का महिमामंडन कर रहे हैं और भगवान कृष्ण से अपने इस हरकत की तुलना करके इसे सही ठहराने की कोशिश कर रहे हैं.
इससे जुड़े पोस्ट में उन्होंने लिखा है, "आज मैं अपने आप को बहुत छोटा कायकर्ता समझ रहा हूं, बीजेपी के महान कार्यकर्ता पवन साह जी ने पुल की ख़ुशी में हज़ारों के सामने पैर धोया और उसको अपने वादे पुल की ख़ुशी में शामिल किया, काश यह मौक़ा मुझे एक दिन माता-पिता के बाद मिले, मैं भी कार्यकर्ता ख़ासकर पवन जी का चरणामृत पियूं. जय भाजपा जय भारत."
विवाद के बाद किया एक और पोस्ट पोस्ट पर विवाद शुरू हुआ तो दुबे फिर उसी तस्वीर के साथ दूसरी पोस्ट डाली और लिखा, "अपनों में श्रेष्ठता बांटी नहीं जाती. कार्यकर्ता यदि खुशी का इजहार पैर धोकर कर रहा है तो क्या गजब हुआ. उन्होंने जनता के सामने क़सम खाई था और उनको ठेस ना पहुंचे इसलिए उनका सम्मान किया." फिर पांच घंटे बाद पोस्ट को एडिट कर चरणामृत पीने की बात हटा दी. दुबे आगे कहते हैं कि पैर धोना तो झारखंड में अतिथि के लिए होता ही है. सारे कार्यक्रम में आदिवासी महिलाएं क्या यह नहीं करती हैं? इसे राजनितिक रंग क्यूं घुसा रहे हैं. अतिथि का पैर धोना गलत है. अपने पुरखो से पूछीए. यहीं कांत ने कृष्ण की बात करते हुए कहा कि महाभारत में कृष्ण जी ने क्या पैर नहीं धोया था? लानत है घटिया मानसिकता पर.
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Source: IOCL
























