बंगाल में ईद की छुट्टी पर मचा बवाल, भाजपा के हमले के बाद KMC ने रद्द किया नोटिफिकेशन
पश्चिम बंगाल में ईद-उल-फितर की छुट्टी को लेकर हुआ यह विवाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में धर्म और तुष्टीकरण की बहस को फिर से तेज कर सकता है. हालांकि, केएमसी ने अधिसूचना रद्द कर दी है.

KMC Eid Holiday Dispute: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने बुधवार (26 फरवरी ) को कोलकाता नगर निगम (केएमसी) की छुट्टियों की नई अधिसूचना को लेकर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर जमकर हमला किया है. उन्होंने इस निर्णय को "पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की इस्लामी खिलाफत" करार दिया और सरकार पर धार्मिक तुष्टीकरण का आरोप लगाया.
हालांकि, कोलकाता नगर निगम (केएमसी) ने बाद में स्पष्ट किया कि यह अधिसूचना सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी के बिना जारी की गई थी और इसे रद्द कर दिया गया है. केएमसी ने यह भी कहा कि मामले को गंभीरता से लिया गया है और जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है.
विवाद की जड़: छुट्टी में बदलाव
अब रद्द की गई अधिसूचना में ईद-उल-फितर के लिए दो दिन की छुट्टी घोषित की गई थी, जबकि विश्वकर्मा पूजा की छुट्टी हटा दी गई थी. इस बदलाव पर भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया दी और इसे हिंदू त्योहारों की अनदेखी बताया.
भाजपा का आरोप
अमित मालवीय ने इस मुद्दे को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर उठाया और टीएमसी सरकार पर धार्मिक तुष्टीकरण का आरोप लगाया. उन्होंने कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम पर भी निशाना साधते हुए कहा कि हिंदू अवकाश को हटाने का आदेश उन्हीं ने दिया. मालवीय ने दावा किया कि यह फैसला ममता बनर्जी की मुस्लिम वोटों को एकजुट करने की रणनीति का हिस्सा है. उन्होंने कहा कि इस निर्णय से हिंदुओं के सांस्कृतिक अनुष्ठान प्रभावित होंगे, जबकि मुस्लिम दिहाड़ी मजदूरों पर अतिरिक्त छुट्टी का बोझ पड़ेगा.
ओबीसी कोटा को लेकर भी भाजपा का आरोप
अमित मालवीय ने ममता बनर्जी पर पहले भी ओबीसी उप-कोटा में बदलाव करके मुसलमानों को शामिल करने का आरोप लगाया था. उन्होंने कहा कि इस फैसले को कलकत्ता उच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया था, और मामला वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट की समीक्षा के अधीन है.
"भाजपा न्याय सुनिश्चित करेगी"
मालवीय ने कहा कि भाजपा संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार न्याय सुनिश्चित करेगी. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ममता बनर्जी का मुस्लिम तुष्टीकरण पश्चिम बंगाल के सामाजिक ताने-बाने को नष्ट कर रहा है.
उन्होंने कहा, "यदि ममता बनर्जी सत्ता में बनी रहीं, तो कुछ वर्षों में यह पहचानना मुश्किल हो जाएगा कि हमारा बंगाल अभी भी चैतन्य महाप्रभु, रवींद्रनाथ टैगोर, स्वामी विवेकानंद, नेताजी सुभाष चंद्र बोस और श्यामा प्रसाद मुखर्जी की भूमि है या नहीं."
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