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Explained: TMC से टूटकर 6 साल में ममता को हराया! क्या बंगाल CM के दावेदार सुवेंदु अधिकारी को मिलेगी कुर्सी या होगी टूट-फूट?

Bengal Next CM: दिसंबर 2020 में TMC छोड़कर बीजेपी में शामिल होने वाले सुवेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को उनके ही गढ़ में हरा दिया. बंगाल में बीजेपी को 3 से 77 और फिर 207 सीटों पर ले आए.

पश्चिम बंगाल की सियासत में 2026 के विधानसभा चुनावों के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ खड़ा हुआ है कि आखिर बीजेपी की जीत का शिल्पकार कहे जाने वाले सुवेंदु अधिकारी को मुख्यमंत्री की कुर्सी मिलेगी या नहीं? पार्टी ने 207 सीटें जीतकर 15 साल पुरानी ममता सरकार को उखाड़ फेंका है. सुवेंदु अधिकारी न सिर्फ सबसे बड़े नेता के रूप में उभरे हैं, बल्कि उन्होंने खुद ममता बनर्जी को उनके गढ़ भवानीपुर से 15,000 से ज्यादा वोटों से हराकर पूरी पार्टी का चेहरा बनने का दावा ठोक दिया है. तो क्या सुवेंदु को मेहनत का फल मीठा मिलेगा?

सुवेंदु की चुनावी ताकत और पार्टी में हैसियत

सुवेंदु अधिकारी के मुख्यमंत्री पद के सबसे प्रबल दावेदार होने की पहली और सबसे ठोस वजह उनका चुनावी रिकॉर्ड है. उन्होंने 2021 में नंदीग्राम से ममता बनर्जी को हराया था और 2026 के चुनाव में एक साथ दो सीटों (नंदीग्राम और भवानीपुर) से जीत दर्ज की है. पार्टी के भीतर उन्हें एक ऐसे 'जाइंट किलर' के रूप में देखा जाता है जो अकेले दम पर TMC का किला ढहा सकता है. खुद बीजेपी के रणनीतिकार और गृह मंत्री अमित शाह ने उनके नामांकन के दौरान साथ चलकर यह संकेत दिया था कि शीर्ष नेतृत्व उनके पीछे मजबूती से खड़ा है. 

पार्टी संगठन पर सुवेंदु की मजबूत पकड़ है. 2021 की हार के बाद जब बीजेपी का संगठन बिखर रहा था और चुनाव बाद हिंसा में कार्यकर्ता डरे हुए थे, तब सुवेंदु ने अकेले मोर्चा संभाला था और पार्टी को प्रदेश भर में नए सिरे से खड़ा करने का काम किया. लोकसभा चुनावों के विपरीत, बीजेपी ने हाल के इतिहास में कभी भी किसी उम्मीदवार को एक साथ दो विधानसभा सीटों से नहीं उतारा. यह अधिकारी के करिश्मे और नेता प्रतिपक्ष के रूप में उनकी क्षमता की परीक्षा थी.

सुवेंदु पर केंद्रीय नेतृत्व का विजन सटीक बैठता है. अमित शाह ने चुनाव प्रचार के दौरान बार-बार कहा था कि राज्य का अगला मुख्यमंत्री एक 'बंगाली, उच्च शिक्षा प्राप्त और बंगाली माध्यम से पढ़ा' नेता होगा. पार्टी के अंदर एक बड़ा वर्ग मानता है कि सुवेंदु अधिकारी इस विवरण पर पूरी तरह से खरे उतरते हैं.

क्यों हैं CM पद के सबसे मजबूत दावेदार?

सुवेंदु अधिकारी के पक्ष में कई ठोस कारण हैं.

  • सुवेंदु ने मुख्यमंत्री को उनके गढ़ में हराकर ममता को चुनौती देने वाला कड़ा संदेश दिया है.
  • पार्टी के भीतर नवनिर्वाचित विधायकों और संगठन के नेताओं के बीच उनके नाम पर लगभग सर्वसम्मति है और कार्यकर्ताओं में उनके लिए समर्थन लगभग शत-प्रतिशत माना जा रहा है.
  • TMC में लंबे अनुभव की वजह से वे विपक्षी दल की आंतरिक कमजोरियों और नेताओं की कार्यशैली को गहराई से समझते हैं, जो आने वाले समय में TMC के 80 विधायकों को प्रबंधित करने में बेहद कारगर साबित हो सकता है. 

पॉलिटिकल एक्सपर्ट्स उनकी तुलना असम के हिमंत बिस्वा सरमा से कर रहे हैं, जो कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में आए और पूर्वोत्तर में पार्टी का कायाकल्प कर दिया.

क्या है आंतरिक कलह और टूट-फूट का सच?  

यह कहानी सिर्फ जीत की नहीं, बल्कि उस संभावित भूचाल की भी है जो मुख्यमंत्री पद न मिलने पर आ सकता है. हालांकि इस समय पार्टी विधायकों और संगठन के नेताओं के बीच सुवेंदु के नाम पर लगभग सर्वसम्मति है, लेकिन बीजेपी का इतिहास गवाह है कि वह मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में बिना किसी ऐलान के नए चेहरे को मुख्यमंत्री बना चुकी है. यही अनिश्चितता सुवेंदु खेमे में बेचैनी की सबसे बड़ी जड़ है.

पॉलिटिकल एक्सपर्ट्स रशीद किदवई का मानना है कि सुवेंदु खुद को पार्टी का 'इनसाइडर' न माने जाने की टीस को सार्वजनिक तौर पर स्वीकार कर चुके हैं. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी के प्रति उनका समर्पण किसी से कम नहीं है. उनके सामने शमिक भट्टाचार्य, अग्निमित्रा पॉल और दिलीप घोष जैसे दिग्गज नेताओं की चुनौती है. दिलीप घोष जैसे अनुभवी नेता को अमित शाह ने जनवरी 2026 में फिर से सक्रिय किया था, जो एक संतुलन साधने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है. इस स्थिति में, अगर शीर्ष नेतृत्व ने सुवेंदु को दरकिनार कर किसी और को मुख्यमंत्री बनाया, तो उनके समर्थक विधायकों के नाराज होने और पार्टी में बड़े स्तर पर टूट की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता.

हालांकि, फिलहाल स्थिति यह है कि बीजेपी विधायक दल की बैठक 8 मई को होने वाली है जिसमें अमित शाह खुद केंद्रीय पर्यवेक्षक के रूप में मौजूद रहेंगे और विधायक दल के नेता का चुनाव होगा. 9 मई को होने वाले शपथ ग्रहण समारोह से पहले इस सस्पेंस के खत्म होने की उम्मीद है.

ज़ाहिद अहमद इस वक्त ABP न्यूज़ में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. टेलीविजन और डिजिटल जर्नलिज्म की दुनिया में उन्हें करीब 9 साल का तजुर्बा है. इससे पहले वे 3 बड़े मीडिया संस्थानों में भी अहम जिम्मेदारियां निभा चुके हैं. वे ओरिजिनल सेक्शन की एक्सप्लेनर टीम में सीनियर सब एडिटर रहे. ज़ाहिद आउटपुट डेस्क, बुलेटिन प्रोड्यूसिंग और बॉलीवुड सेक्शन को बतौर असिस्टेंट प्रोड्यूसर लीड भी कर चुके हैं. देश-विदेश, सियासत, कारोबार, एजुकेशन, एंटरटेनमेंट, चुनाव और समाजी मुद्दों पर उनकी गहरी पकड़ है. आसान लहजे में असरदार और भरोसेमंद एक्सप्लेनर पेश करना उनकी पहचान है.

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